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PSU Bank News: अब सिर्फ 3-4 बड़े सरकारी बैंक ही बचेंगे? क्या है सरकार का प्लान

PSU Bank News: सरकार सेबी नियमों को पूरा करने के लिए 4 पीएसयू बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करेगी। साथ ही, 3-4 बड़े सरकारी बैंक बनाए रखने के तहत 2 अन्य बैंकों के निजीकरण की योजना है।

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SEBI के नियमों के तहत 4 सरकारी बैंकों में हिस्सा बेचेगी सरकार

Photo : iStock

PSU Bank News : भारत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के 4 प्रमुख बैंकों सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार कर रही है। यह कदम शेयर बाजार नियामक (SEBI) के 'न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता' (Minimum Public Shareholding) के नियमों को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एकीकरण और विलय की अगली रणनीति पर भी काम कर रही है, जिसके तहत दो और बैंकों को निजीकरण के लिए चिह्नित किया जा सकता है।

निजीकरण की दिशा में अगला कदम

केंद्र सरकार ने बजट 2021-22 में घोषणा की थी कि आईडीबीआई बैंक के अलावा, दो और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी का निजीकरण किया जाएगा। हाल ही में सरकार ने घोषणा की है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स' आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में खरीदेगी। इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक सरकार का लॉन्गटर्म उद्देश्य देश में केवल 3 से 4 बड़े सरकारी बैंकों को बनाए रखना है।

नीति आयोग द्वारा बैंकों का चयन

सूत्रों और रिपोर्टों के अनुसार नीति आयोग ने निजीकरण के लिए पहले ही सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को शॉर्टलिस्ट किया था। एक अधिकारी के अनुसार, पहला कदम अगले एक वर्ष के भीतर इन चारों बैंकों में सार्वजनिक शेयरधारिता (पब्लिक फ्लोट) को बढ़ाना है। बैंक अपनी रणनीति के अनुसार बाजार से पूंजी जुटा सकते हैं, वहीं सरकार बाजार की स्थितियों को देखते हुए ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचेगी।

वैल्यूएशन और शेयर बाजार में सुधार की उम्मीद

बैंकों में जनता की हिस्सेदारी बढ़ने से शेयर बाजार में इनकी तरलता बढ़ेगी, जिससे इन बैंकों के मूल्यांकन (Valuation) में सुधार होने की संभावना है। सरकार का मानना है कि केवल 3 या 4 बड़े बैंकों को बनाए रखने का निर्णय लेते समय प्रौद्योगिकी अनुकूलता (Technology Compatibility), भौगोलिक पहुंच (Geographical Spread) और व्यवसाय मिश्रण जैसे कारकों पर ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, वित्त मंत्रालय को भेजे गए सवालों का कोई जवाब जारी होने तक नहीं मिला था।

विधायी बदलाव और छूट की सीमा

बैंकों के निजीकरण के लिए कानून में संशोधन करने की आवश्यकता होगी, जिसमें 'बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम' शामिल है। यह संशोधन बैंकों के समेकन (Consolidation) अभ्यास के साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को अगस्त 2026 तक 25% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियम से छूट दी थी, और इस छूट की अवधि को और आगे बढ़ाए जाने की संभावना है।

आईडीबीआई बैंक के वैल्यूएशन का उदाहरण

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के मामले में सरकार ने स्पष्ट किया था कि शेयर बाजार में कम कारोबार होने के कारण बैंक के अस्थिर शेयर मूल्य को नजरअंदाज किया गया था, क्योंकि वह मूल्य संस्था के वास्तविक और आंतरिक मूल्य (Intrinsic Value) से मेल नहीं खाता था। सरकार अब इसी अनुभव का लाभ उठाकर अन्य बैंकों की पुनर्संरचना प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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