NSE IPO: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ से जुड़े सभी लंबित मसले जल्द सुलझा लिए जाएंगे। उन्होंने उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह भरोसा जताया कि सेबी और एनएसई के बीच लगातार संवाद हो रहा है और समाधान की दिशा में काम जारी है।
एनएसई का आईपीओ प्रस्ताव वर्षों से अटका
एनएसई का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) प्रस्ताव पिछले आठ वर्षों से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। सबसे पहले 2016 में एनएसई ने सेबी के पास आईपीओ लाने के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे। उस समय कंपनी ने मौजूदा शेयरधारकों के 22% हिस्सेदारी को बिक्री पेशकश (OFS) के जरिए बेचकर करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी।
'को-लोकेशन' विवाद बना रोड़ा
आईपीओ को मंजूरी में सबसे बड़ी बाधा 'को-लोकेशन' से जुड़ी अनियमितताएं रही हैं। इस व्यवस्था के तहत कारोबारी सदस्य अपने सर्वर को एक्सचेंज के परिसर में स्थापित कर सकते हैं, जिससे उन्हें डेटा और ऑर्डर निष्पादन में तेज़ी से लाभ मिलता है। आरोप है कि कुछ ब्रोकर्स ने इस सुविधा का अनुचित लाभ उठाया, जिससे एनएसई जांच के दायरे में आ गया।
समस्याओं के समाधान पर जोर
सेबी चेयरमैन ने कहा कि वे किसी निश्चित समयसीमा का उल्लेख तो नहीं कर सकते, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि यह मामला जल्द सुलझ जाएगा। मार्च 2024 में सेबी ने आईपीओ प्रस्ताव की समीक्षा के लिए एक आंतरिक समिति का गठन भी किया है, और एनएसई को सभी शेष मसलों के समाधान का निर्देश दिया गया है।
एनएसई की मौजूदा स्थिति
एनएसई का बाजार मूल्यांकन फिलहाल लगभग 4.7 लाख करोड़ रुपये है। ‘2024 बरगंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया’ की सूची के अनुसार एनएसई देश की दसवीं सबसे मूल्यवान निजी कंपनी है। ऐसे में इसके आईपीओ को लेकर निवेशकों और बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं।
भाषा इनपुट के साथ
