Hydropower Projects: ईरान-अमेरिका में सीजफायर हो गया है। लेकिन दुनिया इस समय तेल-गैस संकट से जूझ रही है। ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उथल-पुथल बनी हुई है। कब हालात फिर बिगड़ जाएं, यह कहना मुश्किल है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है, जिससे देश की ऊर्जा जरुरतों को सुरक्षित किया जा सके और विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में दो बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का मकसद स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और देश को आत्मनिर्भर (Urja Aatmanirbharta) बनाना है। ये दोनों प्रोजेक्ट्स मिलकर भारत के ऊर्जा सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकते हैं और भविष्य में तेल-गैस संकट के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तेल संकट के बीच भारत की बड़ी तैयारी (तस्वीर-istock)
कालाई-II हाइड्रो प्रोजेक्ट
पहला प्रोजेक्ट है 1200 मेगावाट का कालाई-II हाइड्रो प्रोजेक्ट, जो अरुणाचल प्रदेश के अंजा जिले में लोहित बेसिन पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 14,105 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पूरा होने के बाद हर साल करीब 4852.95 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। यह प्रोजेक्ट THDC इंडिया लिमिटेड और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से तैयार किया जाएगा। केंद्र सरकार भी इसमें आर्थिक सहायता देगी।
कमला प्रोजेक्ट से और बढ़ेगी ताकत
दूसरा प्रोजेक्ट 1720 मेगावाट का कमला हाइड्रो प्रोजेक्ट है, जो क्षमता के मामले में कालाई-II से भी बड़ा है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के चालू होने के बाद अरुणाचल प्रदेश बिजली उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को फायदा होगा। खासतौर पर पीक डिमांड के समय बिजली की कमी को पूरा करने में ये प्रोजेक्ट अहम भूमिका निभाएंगे।
मेगा हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर बताया कि मोदी सरकार पूर्वोत्तर को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। केंद्रीय केबिनेट द्वारा स्वीकृत दो जलविद्युत परियोजनाएं जिनकी कुल लागत 40,175 करोड़ रुपये है। इस क्षेत्र की समृद्धि को और गति प्रदान करेंगी। 1200 MW की कलाई-II जलविद्युत परियोजना और 1720 MW की कमला जलविद्युत परियोजना के लिए अरुणाचल प्रदेश के हमारे भाई-बहनों को हार्दिक बधाई।
नॉर्थ-ईस्ट में विकास और रोजगार के नए अवसर
इन प्रोजेक्ट्स का असर सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र के विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। प्रोजेक्ट्स के निर्माण और संचालन के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित होगा। इसके अलावा, इन प्रोजेक्ट्स तक पहुंच बनाने के लिए करीब 29 किलोमीटर नई सड़कें और पुल बनाए जाएंगे। इससे दूर-दराज के इलाके भी मुख्यधारा से जुड़ेंगे और वहां के लोगों की जिंदगी आसान होगी। बुनियादी ढांचे के विकास से शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिलेगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन प्रोजेक्ट्स का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे। अरुणाचल प्रदेश को इन प्रोजैक्ट्स से 12 प्रतिशत बिजली मुफ्त मिलेगी। इसके अलावा 1 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड के लिए रखी जाएगी। इस फंड का इस्तेमाल स्कूल, अस्पताल और सड़कों के विकास के लिए किया जाएगा।
चीन को रणनीतिक संदेश
इन प्रोजेक्ट्स का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलू भी है। जिस इलाके में ये प्रोजेक्ट्स बन रही हैं, वह संवेदनशील सीमा क्षेत्र के पास है, जहां चीन अक्सर अपनी दावेदारी जताता रहता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और विकास कार्य करना भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। यह कदम साफ संकेत देता है कि भारत अपने नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और यहां विकास की रफ्तार तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह देश की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को भी मजबूती देता है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
कुल मिलाकर करीब 40,000 करोड़ रुपये की इन प्रोजेक्ट्स को भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा एनर्जी गिफ्ट माना जा सकता है। इससे न सिर्फ देश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में जब दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ सकती है, तब भारत का यह कदम उसे एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर स्थिति में ला सकता है। यह पहल न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
