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नई आर्थिक उड़ान! 2026 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था का रहेगा जलवा कायम

India economy 2026: भारत 2026 में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूत स्थिति बनाए रखने के रास्ते पर है। इसके पीछे तेज आर्थिक वृद्धि, कम मुद्रास्फीति और सुदृढ़ बैंकिंग प्रणाली जैसे अनुकूल कारक हैं। 2025 में दर्ज की गई आर्थिक गति को जारी रखने के लिए सरकार कई सुधार पहलें भी लागू करने की तैयारी कर रही है।

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विश्व में भारत का जलवा: 2026 में भी चौथा सबसे बड़ा आर्थिक महाशक्तिशाली देश (तस्वीर-istock)

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India economy 2026 : भारत 2026 में भी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने की राह पर है। इसके पीछे मजबूत आर्थिक वृद्धि, कम मुद्रास्फीति और बैंकिंग सेक्टर का सुदृढ़ प्रदर्शन जैसे कारक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 में जिस गति से अर्थव्यवस्था ने बढ़त दिखाई, उसे बनाए रखने के लिए सरकार नई सुधार योजनाओं पर काम कर रही है। केंद्र सरकार आगामी बजट में पूंजीगत व्यय और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जीवन सुगमता और कारोबार सुगमता को बढ़ाकर भारत को निवेश के लिए और आकर्षक बनाना। इससे शुल्क और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

जीडीपी और मुद्रास्फीति का हाल

आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातार बढ़ी है। 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। खुदरा मुद्रास्फीति साल के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निचली सीमा से दो प्रतिशत से भी कम रही। सरकार ने बताया कि भारत ने 4180 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़ते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया है। अनुमान है कि 2030 तक 7300 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है।

घरेलू मांग और निवेश ने दी मजबूती

2025 में आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग, कम मुद्रास्फीति और स्थिर निवेश के कारण हुई। सेवा क्षेत्र का विस्तार लगातार बना रहा, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में भी वापसी हुई। कृषि में बेहतर खरीफ उत्पादन और पर्याप्त खाद्यान्न भंडार ने कीमतों को स्थिर रखने में मदद की। इन सभी कारकों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का भरोसा

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025-26 के लिए GDP वृद्धि अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। विश्व बैंक, IMF, मूडीज, OECD, फिच और S&P जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति की पुष्टि की। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन मजबूत घरेलू बुनियाद और सुधारों से वृद्धि बनी रहेगी।

निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स

भारत ने 2025 के अंत में GST दरों में कटौती की और नए श्रम संहिताओं को लागू किया। कई वैश्विक कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणाएं की हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक 17.5 अरब डॉलर, अमेज़न अगले पांच वर्षों में 35 अरब डॉलर और गूगल अगले पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है। इसके अलावा एप्पल, सैमसंग और आर्सेलरमित्तल जैसी कंपनियों ने भी विस्तार की योजना घोषित की।

व्यापार समझौते और निर्यात

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता निर्यात और MSME सेक्टर के लिए मददगार साबित होंगे। इससे घरेलू और विदेशी निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी।

मुद्रा और पूंजी प्रवाह

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बहिर्वाह के कारण रुपये पर दबाव रहा, लेकिन नवंबर में अस्थिरता कम हुई। RBI और विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजी प्रवाह और मुद्रा की अस्थिरता अस्थायी है। सरकार पूंजीगत व्यय के लक्ष्यों को बनाए रखेगी और निवेश को समर्थन देगी।

भविष्य की राह

क्रिसिल और इक्रा जैसी एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि अगले कुछ तिमाहियों में GDP वृद्धि 6.5–7 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। मुद्रास्फीति नियंत्रित रहेगी और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से निवेश और विकास को और बल मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और सुधारों के चलते वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वृद्धि कायम रहेगी।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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