राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'India AI Impact Summit 2026' ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को एक नई दिशा दिखाई है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से यह कहा कि "भारत एआई (AI) में केवल अपना भविष्य ही नहीं, बल्कि अपनी नियति (Destiny) देख रहा है", तो यह महज एक बयान नहीं बल्कि एक ग्लोबल लीडर का आत्मविश्वास था। इस समिट में दुनिया भर के टेक दिग्गजों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया, जो पीएम मोदी के 'AI फॉर ऑल' के विजन से पूरी तरह कायल नजर आए। इस समिट ने साफ कर दिया है कि एआई की वैश्विक दौड़ में भारत अब एक लीडर की भूमिका में है।
टेक दिग्गजों का जमावड़ा
इस समिट की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत मंडपम में दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख एक साथ नजर आए। समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स। इनके अलावा, एआई की दुनिया के नए किंग और ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन, Demis Hassabis (Google DeepMind), adobe के चेयरमैन एंड सीईओ शांतनु नारायण , Zscaler के सीईओ और फाउंडर जय चौधरी जैसे चेहरों ने भारत के विजन पर मुहर लगाई। सिर्फ टेक दिग्गज ही नहीं, बल्कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जैसे वैश्विक नेताओं ने भी इस मंच को साझा किया। इसके अलावा साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति भी AI सम्मेलन में शामिल हुए. भारतीय उद्योग जगत से रिलायंस के मुकेश अंबानी, टाटा संस के एन चंद्रशेखरन और इन्फोसिस के नंदन नीलेकणी ने भारत की एआई क्षमता और ₹10 लाख करोड़ तक के निवेश के संकल्प को दुनिया के सामने रखा।

AI Impact Summit
पीएम मोदी का विजन
समिट का सबसे बड़ा आकर्षण पीएम मोदी का वह दृष्टिकोण रहा, जिसमें उन्होंने टेक्नोलॉजी को 'भावनाओं' और 'समावेश' से जोड़ने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए एआई का मतलब सिर्फ कोडिंग या डेटा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का एक जरिया है। पीएम ने एआई को 'Digital Public Infrastructure' (DPI) का हिस्सा बनाने पर जोर दिया, ताकि इसका लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। टेक दिग्गजों ने भारत के 'India Stack' की सफलता को देखते हुए माना कि भारत एआई को लोकतांत्रिक बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन सकता है।
समिट की 10 बड़ी बातें (Highlights) जो दुनिया बदल देंगी
1. AI मिशन के लिए बड़ा बजट: सरकार ने 'India AI Mission' के तहत कम्प्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए भारी निवेश का खाका पेश किया, जिससे स्टार्टअप्स को सस्ती एआई सुविधाएं मिलेंगी।
2. Bhashini का विस्तार: भारतीय भाषाओं के एआई मॉडल 'भाषिणी' को अगले स्तर पर ले जाने की घोषणा हुई, जिससे भाषा की दीवार पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
3. एआई और हेल्थकेयर: एआई आधारित ऐसे डायग्नोस्टिक टूल्स लॉन्च किए गए जो ग्रामीण इलाकों में बिना विशेषज्ञ के भी गंभीर बीमारियों की पहचान कर सकेंगे।
4. एथिकल एआई (Ethical AI): पीएम मोदी ने 'Global Framework for AI Governance' का प्रस्ताव रखा, ताकि एआई का इस्तेमाल नफरत या डीपफेक फैलाने में न हो।
5. सेमीकंडक्टर हब: समिट में भारत को ग्लोबल चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में कई एमओयू (MoU) साइन हुए।
6. स्किलिंग प्रोग्राम: अगले दो वर्षों में 20 लाख युवाओं को एआई-रेडी बनाने के लिए विशेष सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू करने की बात कही गई।
7. स्मार्ट फार्मिंग: किसानों के लिए एआई आधारित वेदर फॉरकास्टिंग और सॉयल टेस्टिंग टूल्स को अनिवार्य बनाने का लक्ष्य रखा गया।
8. स्टार्टअप इंडिया 2.0: एआई स्टार्टअप्स के लिए टैक्स छूट और आसान फंडिंग के नए नियमों की घोषणा हुई।
9. AI इन एजुकेशन: स्कूलों में एआई को एक विषय के तौर पर नहीं, बल्कि एक लर्निंग टूल के रूप में शामिल करने का रोडमैप तैयार किया गया।
10. सॉवरेन एआई (Sovereign AI): भारत अपना खुद का सॉवरेन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगा ताकि देश का डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रहे।
