बिजनेस

Home Loan Interest Rates: रेपो रेट बढ़ गया, अब होम लोन होंगे महंगे! जानें किन बैंकों में मिल रहे हैं सस्ते

Home Loan Interest Rates: RBI द्वारा रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% करने से होम लोन की दरें और EMI बढ़ेंगी। हालांकि, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और LIC हाउसिंग जैसे संस्थानों में अभी भी 7%–7.15% की शुरुआती दर पर सस्ता लोन उपलब्ध है।

Image

रेपो रेट बढ़ा, पर मौका बाकी! इन बैंकों में अभी भी मिल रहा है सबसे सस्ता होम लोन, चेक करें नई लिस्ट

Photo : iStock

Home Loan Interest Rates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अक्टूबर 2026 की बैठक में रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में इस 0.25% की बढ़ोतरी के कारण, एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) से जुड़े सभी होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी तय है। हालांकि, बैंकों द्वारा दरें बढ़ाए जाने से पहले, नया घर खरीदने की योजना बना रहे ग्राहक अभी भी मौजूदा कम ब्याज दरों पर लोन बुक करके फायदा उठा सकते हैं। अगर आप 75 लाख रुपये तक होम लोन लेने की सोच रहे हैं, तो सरकारी, प्राइवेट और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) की नई ब्याज दरों को समझकर एक सही फैसला ले सकते हैं।

सरकारी बैंकों में सबसे सस्ती ब्याज दरें

देश के सरकारी बैंकों में फिलहाल बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया सबसे कम ब्याज दर पर होम लोन दे रहे हैं। इन दोनों ही बैंकों में शुरुआती ब्याज दर 7.00% है। इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया 7.10% और इंडियन बैंक तथा यूको बैंक 7.15% की शुरुआती दर पर लोन की ऑफर कर रहे हैं। अगर आप 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल की अवधि के लिए 7.00% की शुरुआती दर पर लेते हैं, तो आपकी अनुमानित मासिक किस्त (EMI) करीब 38,765 रुपये बनेगी। इसी लोन राशि पर अगर ब्याज दर बढ़कर 7.25% (जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शुरुआती दर है) हो जाती है, तो आपकी EMI बढ़कर 39,519 रुपये हो जाएगी। अन्य प्रमुख सरकारी बैंकों में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 7.15%, बैंक ऑफ बरोदा और पंजाब नेशनल बैंक 7.20%, तथा पंजाब एंड सिंध बैंक 7.35% से 10.75% तक की दरों पर लोन दे रहे हैं।

बैंकब्याज दर
बैंक ऑफ महाराष्ट्र7.00–9.90%
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया7.00–9.15%
बैंक ऑफ इंडिया7.10–10.00%
इंडियन बैंक7.15–9.15%
यूको बैंक7.15–9.25%
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया7.15–9.60%
बैंक ऑफ बड़ौदा7.20–9.00%
केनरा बैंक*7.20–10.00%
इंडियन ओवरसीज बैंक7.20% से शुरू
पंजाब नेशनल बैंक7.20–9.15%
भारतीय स्टेट बैंक (SBI)7.25–8.55%
पंजाब एंड सिंध बैंक7.35–10.75%

प्राइवेट बैंकों का क्या है हाल?

प्राइवेट बैंकों की बात करें तो साउथ इंडियन बैंक सबसे कम 7.25% की शुरुआती दर पर 30 लाख रुपये से 75 लाख रुपये तक का होम लोन दे रहा है। इसके बाद फेडरल बैंक 7.35% और एचएसबीसी (HSBC) बैंक 7.45% की शुरुआती दर की ऑफर कर रहा है। अगर आप साउथ इंडियन बैंक से 7.25% की दर पर 50 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो आपकी महीने की EMI करीब 39,519 रुपये रहेगी। यही लोन अगर आईसीआईसीआई बैंक की शुरुआती दर 7.55% या एचडीएफसी बैंक की शुरुआती दर 7.75% पर लिया जाता है, तो EMI क्रमशः 40,433 रुपये और 41,028 रुपये तक पहुंच जाएगी। अन्य प्राइवेट बैंकों में कोटक महिंद्रा बैंक 7.60%, एक्सिस बैंक 8.00% से 11.90%, और बंधन बैंक 8.55% से 13.52% के बीच ब्याज वसूल रहे हैं।

बैंकब्याज दर
साउथ इंडियन बैंक7.25% से शुरू
फेडरल बैंक7.35–10.50%
HSBC बैंक7.45% से शुरू
कर्नाटक बैंक7.51–11.83%
ICICI बैंक7.55% से शुरू
कोटक महिंद्रा बैंक7.60% से शुरू
HDFC बैंक7.75% से शुरू
तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक7.90–9.30%
एक्सिस बैंक8.00–11.90%
CSB बैंक8.30% से शुरू
सिटी यूनियन बैंक8.50–10.00%
करूर वैश्य बैंक8.50–10.65%
बंधन बैंक8.55–13.52%
RBL बैंक9.00% से शुरू
हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के होम लोन ऑफर

गैर-बैंकिंग हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में LIC हाउसिंग फाइनेंस सबसे कम 7.15% की शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन दे रही है। इसके ठीक बाद बजाज हाउसिंग फाइनेंस 7.25% की प्रतिस्पर्धी दर पर लोन दे रही है। अगर आप LIC हाउसिंग फाइनेंस से 7.15% की दर पर 50 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए चुनते हैं, तो आपकी किस्त करीब 39,222 रुपये महीना बनेगी। ICICI होम फाइनेंस 7.50% और गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस 7.65% से शुरुआत कर रहे हैं। इसके अलावा, PNB हाउसिंग फाइनेंस 7.60% से 10.05%, आदित्य बिड़ला कैपिटल 7.75%, टाटा कैपिटल 8.00%, और सम्मान कैपिटल (पूर्व में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस) 8.75% की शुरुआती दरों पर लोन उपलब्ध करा रहे हैं।

HFCब्याज दर
LIC हाउसिंग फाइनेंस7.15% से शुरू
बजाज हाउसिंग फाइनेंस7.25% से शुरू
ICICI होम फाइनेंस7.50% से शुरू
गोडरेज हाउसिंग फाइनेंस7.65% से शुरू
PNB हाउसिंग फाइनेंस7.60–10.05%
आदित्य बिरला कैपिटल7.75% से शुरू
टाटा कैपिटल8.00% से शुरू
GIC हाउसिंग फाइनेंस8.20% से शुरू
सम्मान कैपिटल (पूर्व में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस)8.75% से शुरू
SMFG इंडिया होम फाइनेंस9.25% से शुरू

होम लोन EMI क्या है और यह कैसे तय होती है?

EMI यानी 'इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट' वह मासिक राशि है जो आप अपने लोन को चुकाने के लिए हर महीने बैंक को देते हैं। इस किस्त में दो हिस्से शामिल होते हैं: पहला मूलधन (Principal) और दूसरा बकाया राशि पर लगने वाला ब्याज (Interest)।

बैंक विज्ञापन में जिस शुरुआती ब्याज दर का दावा करते हैं, वह हर ग्राहक के लिए एक समान नहीं होती। बैंक लोन स्वीकृत करते समय आपकी मासिक आय, लोन की राशि, पुनर्भुगतान की अवधि, रोजगार का प्रकार (सरकारी, प्राइवेट या सेल्फ-एम्प्लॉयड) और पुराने वित्तीय लेन-देन को ध्यान में रखते हैं। सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आपके क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) की होती है। बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को बैंक सबसे कम ब्याज दर पर लोन देते हैं।

रेपो रेट बढ़ने से आपके होम लोन पर क्या असर पड़ता है?

रेपो रेट वह दर है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को लोन देता है। जब RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है, तो बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से फंड जुटाना महंगा हो जाता है। इस बढ़ी हुई लागत की भरपाई करने के लिए बैंक अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले EBLR-लिंक्ड होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देते हैं। ब्याज दर में महज 0.25% की बढ़ोतरी भी आपके पूरे लोन कार्यकाल पर हजारों-लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। यही वजह है कि होम लोन लेने वाले ग्राहकों को विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों की दरों की तुलना करने के बाद ही आवेदन करना चाहिए।

दरें बढ़ने पर होम लोन ग्राहकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी का मानना है कि चूंकि RBI की ओर से फिलहाल दरों में कटौती की संभावना कम है, इसलिए ग्राहकों को कम EMI की उम्मीद लगाकर अपनी योजना नहीं बनानी चाहिए। आदिल शेट्टी सलाह देते हैं कि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कई बैंक आपकी EMI राशि को स्थिर रखने के लिए लोन की अवधि को बढ़ा देते हैं। देखने में यह आसान लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि के कारण आपको बैंक को काफी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है। इसलिए ग्राहकों को अपने बैंक से स्पष्ट बात करनी चाहिए कि दर वृद्धि का असर उनके लोन पर कैसे लागू किया जा रहा है। इसके अलावा, हर साल लोन का कुछ हिस्सा प्री-पेमेंट (समय से पहले थोड़ा भुगतान) करते रहने से अतिरिक्त ब्याज के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article