अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) 19 अप्रैल, 2026 को है। इससे ठीक पहले सोने का दाम अपने शीर्ष स्तर से तो काफी नीचे आ चुका है, लेकिन पिछले साल के भाव की तुलना में काफी ऊंचे स्तरों पर बना हुआ है। बहरहाल, अक्षय तृतीया पर गोल्ड खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो जानें ज्वेलरी से लेकर Gold ETF तक कौनसा तरीका इन्वेस्ट करने के लिए बेस्ट है। ज्वेलरी, ETF, डिजिटल और फिजिकल गोल्ड को लेकर निवेशकों की क्या राय है।
फिलहाल किस रेंज में है भाव?
गोल्ड के रेट लंदन, शिकागो, शंघाई और मुंबई के स्पॉट मार्केट से होते हुए फ्यूचर मार्केट तक आपस में लिंक रहते हैं। MCX पर जून डिलीवरी गोल्ड करीब ₹1,53,079 प्रति 10 ग्राम के आसपास है। जबकि प्रमुख शहरों में 24 कैरेट रेट करीब ₹1.55 लाख से ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुके हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसी साल जनवरी में 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के शीर्ष के लिहाज से देखा जाए, तो शॉर्ट टर्म में बड़ी गिरावट से ज्यादा, सीमित रेंज में तेज उतार-चढ़ाव की तस्वीर दिख रही है।
फिलहाल मांग कमजोर
जेफरीज के मुताबिक गोल्ड फिलहाल एक कंसोलिडेशन जोन में है। वहीं, भारतीय बाजार में रिटेल डिमांड कमजोर होती दिख रही है, क्योंकि ऊंचे दाम खरीदारी पर ब्रेक लगा रहे हैं। भारत में मांग में सुस्ती के पीछे सरकार की तरफ से आयात को हतोत्साहित करने के साथ इंटरनेशनल फैक्टर हावी है। खासतौर पर रुपये की कमजोरी और जियोपॉलिटिकल ऑर्डर डिमांड को दबा रहे हैं।
ज्वेलरी, ETF, डिजिटल या फिजिकल कौन बेस्ट?
किसी भी एसेट को निरपेक्ष रूप से बेस्ट नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि, यह पूरी तरह से निवेशक के नजरिये पर निर्भर करता है। मसलन, सुविधा के लिहाज से देखा जाए, तो Gold ETF को बेहतर माना जा सकता है, क्योंकि इसे घर बैठे खरीदा जा सकता है। AMFI के मुताबिक इसमें लिक्विडिटी हाई रहती है और यह गोल्ड के प्राइस को ट्रैक करते हुए ही रिटर्न ऑफर करते हैं। वहीं, World Gold Council भी कहता है कि फिजिकल गोल्ड ETF में निवेशक को स्टोरेज, चोरी और प्योरिटी की चिंता नहीं करनी पड़ती और यह शेयर की तरह एक्सचेंज पर खरीदा-बेचा जा सकता है।
वहीं, फिजिकल गोल्ड (बुलियन) आपको अपने एसेट पर पूरे कंट्रोल की भावना देता है, क्योंकि यह आपके हाथ में होता है। इसके अलावा हाथ इसमें आपको मेकिंग जैसे लॉस की चिंता नहीं करनी पड़ती है। वहीं, गोल्ड ज्वेलरी निवेश और यूटिलिटी दोनों लिहाज से काम आती है। लेकिन, इसमें मेकिंग चार्ज और डिजाइन जैसी चीजों के पैसे देने पड़ते हैं, जो आपको वापस नहीं मिलते हैं। World Gold Council भी ज्वेलरी को लोअर इन्वेस्टमेंट पॉटेंशियल वाला मानता है। इसलिए ज्वेलरी दोहरे मकसद से लेना तो ठीक है, लेकिन केवल रिटर्न के लिहाज से यह रिस्की है।
डिजिटल गोल्ड को यहां सबसे कमजोर विकल्प माना जा सकता है, क्योंकि फिलहाल भारत में यह अनरेगुलेटेड है। SEBI ने इसे लेकर सार्वजनिक चेतावनी भी जरी की है। इस तरह अगर सवाल सिर्फ निवेश का है, तो Gold ETF सबसे साफ और समझदारी भरा विकल्प है।
अगर नजरिया है निवेश, क्या है बेस्ट?
SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट Anuj Gupta के मुताबिक अक्षय तृतीया पर आमतौर पर गोल्ड की फिजिकल डिमांड बढ़ती है, जिससे लोकल बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलता है। उनका कहना है कि इस बार सोना अपने पिछले हाई करीब ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे आकर ₹1.50 लाख के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिससे खरीदारों को एक तरह का “डिस्काउंट जोन” मिल रहा है।
फेस्टिव सीजन में ज्वेलर्स की तरफ से मेकिंग चार्जिस और ऑफर्स का फायदा भी मिल सकता है, इसलिए जरूरत के हिसाब से खरीदारी का यह अच्छा मौका है। हालांकि निवेश के नजरिए से ज्वेलरी को उचित विकल्प नहीं मानते हुए वे सलाह देते हैं कि Gold ETF या एक्सचेंज के जरिए मिलने वाले गोल्ड में निवेश बेहतर है, जिसे डिमैट अकाउंट में आसानी से होल्ड किया जा सकता है और SIP के जरिए गिरावट पर चरणबद्ध निवेश भी किया जा सकता है। लंबी अवधि में गोल्ड में पॉजिटिव ट्रेंड बने रहने की उम्मीद भी उन्होंने जताई है।
अक्षय तृतीय तक कहां जाएगा गोल्ड?
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार टेक्निकल तौर पर गोल्ड अभी मजबूत लेकिन सीमित दायरे में फंसा दिख रहा है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में $4800 का स्तर मजबूत सपोर्ट की तरह काम कर रहा है, जबकि ऊपर $4900–$4950 का जोन रेजिस्टेंस बना हुआ है। MCX पर ₹1.52 लाख के ऊपर बने रहना बुल्स के कंट्रोल का संकेत है, और अगर ₹1.57 लाख पार होता है तो अगला उछाल तेज हो सकता है। हालांकि बढ़ती VIX और डॉलर की स्थिरता के चलते शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी हाई रहेगी, इसलिए गिरावट पर खरीदारी की रणनीति ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है।
क्या निकलता है नतीजा?
अगर मकसद पूजा, पहनावा या पारिवारिक गिफ्ट है, तो ज्वेलरी लें। अगर हाथ में सोना चाहिए, तो coin/bar पर जाएं। डिजिटल गोल्ड इस समय सबसे कम आकर्षक दिखता है। कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया पर खरीदारी करें तो भाव देखकर नहीं, अपने मकसद देखकर फैसला करना ज्यादा सही रहेगा।
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