Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Gold Import पर 150% टैक्स बढ़ाकर सरकार को क्या मिला, आप पर क्या होगा असर?

PM Modi के गोल्ड खरीदारी घटाने की अपील के तीन दिन बाद गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी में 150% का इजाफा किया गया है। यहां समझें इस फैसले से सरकार को क्या फायदा होगा और आपकी जेब पर क्या असर होगा?

Image
गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सरकार को मिलेगा फायदा
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated May 13, 2026, 12:42 IST
Follow on Google News

Gold Import Duty Hike Explained : भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि भावनाओं, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का हिस्सा माना जाता है। लेकिन अब सरकार ने गोल्ड और सिल्वर खरीदने वालों को बड़ा झटका दिया है। इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दी गई है। सवाल यह है कि आखिर सरकार को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा और इसका असर आम लोगों से लेकर अर्थव्यवस्था तक कितना गहरा होगा?

सरकार का बड़ा फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक साल तक गोल्ड खरीद कम करने की अपील की थी। इसके कुछ दिनों बाद ही केंद्र सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर इफेक्टिव इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी। अब गोल्ड इंपोर्ट पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस लगेगा। पहले यह 5% और 1% था। यानी कुल टैक्स बोझ में 150% की भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकार का यह फैसला सिर्फ टैक्स बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे देश की आर्थिक सुरक्षा और विदेशी मुद्रा बचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

घटकपहलेअबबदलाव
बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD)5%10%100% बढ़ोतरी
AIDC सेस1%5%400% बढ़ोतरी
कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी6%15%150% बढ़ोतरी

सरकार को इतनी चिंता क्यों हुई?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है। देश में जरूरत का लगभग पूरा सोना विदेशों से आयात होता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर का गोल्ड इंपोर्ट किया। यह भारत के कुल इंपोर्ट बिल का लगभग 9-10% हिस्सा था।

इसी बीच ईरान युद्ध, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक तनावों ने भारत के फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव बढ़ा दिया। IMF ने भी चेतावनी दी कि अगर जियोपॉलिटिकल संकट लंबा चला तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट और बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट कम करने को सबसे तेज और असरदार तरीका माना। सरकार का गणित साफ है। अगर गोल्ड इंपोर्ट में 30-40% की कमी आती है तो भारत सालाना 20-25 अरब डॉलर बचा सकता है।

अब कितना महंगा होगा सोना?

नई ड्यूटी लागू होने के बाद सोना तुरंत महंगा हो गया। MCX पर गोल्ड और सिल्वर दोनों में 6% से ज्यादा की तेजी देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक 24 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब 15,475 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई, जबकि सिल्वर 2.78 लाख से 2.90 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास ट्रेड करता दिखा।

अगर पहले 1,54,750 रुपये के गोल्ड पर करीब 9,285 रुपये ड्यूटी लगती थी, तो अब वही ड्यूटी बढ़कर 23,212 रुपये हो गई है। इसमें अभी GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं हैं। यानी आने वाले दिनों में ग्राहकों को गहने खरीदना और महंगा पड़ सकता है।

गोल्ड वैल्यू (10 ग्राम)पुरानी व्यवस्थानई व्यवस्था
बेस प्राइस₹1,54,750₹1,54,750
ड्यूटी राशि₹9,285₹23,212
ड्यूटी के बाद कीमत₹1,64,035₹1,77,962

खरीदारी पर कितना असर

भारत में गोल्ड खरीदारी का बड़ा हिस्सा शादी और त्योहारों से जुड़ा होता है। सरकार का यह कदम सीधे इसी मांग को प्रभावित करेगा। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लोग अब ज्वेलरी खरीद टाल सकते हैं, छोटे डिजाइन चुन सकते हैं या पुराने गहने एक्सचेंज करवा सकते हैं।

सरकार का मकसद सिर्फ निवेश आधारित खरीदारी रोकना नहीं बल्कि भावनात्मक और परंपरागत खरीदारी पर भी ब्रेक लगाना है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री की अपील और टैक्स बढ़ोतरी को एक साथ देखा जा रहा है।

Gold Import Duty Explained

Gold Import Duty Explained

अब कहां निवेशक करेंगे लोग?

गोल्ड की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशक अब फिजिकल गोल्ड की जगह Gold ETF, डिजिटल गोल्ड और पेपर गोल्ड की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के महीनों में Gold ETF में निवेश पहले ही तेजी से बढ़ा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है क्योंकि डिजिटल माध्यमों में स्टोरेज, मेकिंग चार्ज और चोरी जैसे जोखिम नहीं होते।

कारोबारियों की मुश्किल

इस फैसले का सबसे बड़ा असर ज्वेलरी इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। Titan, Kalyan Jewellers, Senco Gold और PC Jeweller जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। ज्वेलर्स के लिए कच्चा माल महंगा होगा, जिससे वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ेगी और मार्जिन पर असर पड़ेगा।

इंडस्ट्री को सबसे बड़ा डर स्मगलिंग और ग्रे मार्केट के दोबारा सक्रिय होने का है। जब ड्यूटी ज्यादा होती है तो अवैध रास्तों से गोल्ड लाना फायदे का सौदा बन जाता है। बुलियन कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि इससे नकद लेनदेन और समानांतर अर्थव्यवस्था बढ़ सकती है।

सरकार का असली गेमप्लान क्या है?

सरकार का मानना है कि गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता कम किए बिना भारत के डॉलर भंडार को सुरक्षित रखना मुश्किल होगा। इसलिए यह कदम सिर्फ महंगा सोना बेचने के लिए नहीं बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

साथ ही सरकार गोल्ड रीसाइक्लिंग, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और घरेलू वैल्यू चेन को भी बढ़ावा देना चाहती है ताकि नया सोना आयात करने की जरूरत कम हो।

End of Article