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दुनियाभर में Brahmos Missile खरीदने की होड़, खरीदारों की लिस्ट में इंडोनेशिया भी शामिल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस की क्षमताएं पूरी दुनिया ने देखीं। अब तमाम देश इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को खरीदना चाहते हैं। इसे खरीदने वालों में अब इंडोनिशया भी शामिल हो गया है।

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चीन के आसपास के देश दिखा रहे रुचि

India Defence Export : ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री में भारत अब एक नेट आयातक की पहचान से मेजर डिफेंस एक्सपोर्टर के तौर पर उभर रहा है। दुनियाभर के देश अपने डिफेंस को मजबूत करने में जुटे हैं। इसकी वजह से डिफेंस इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जकार्ता दौरे के दौरान इंडोनेशिया आधिकारिक तौर पर भारत की घातक 'ब्रह्मोस' सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का नया विदेशी खरीदार बन गया है। Defence Export के लिहाज से यह भारत की एक बड़ी कामयाबी है। ब्रह्मोस के अलावा इंडोनेशिया भारत से एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर और बियॉन्ड विजुअल रेंज की एयर टू एयर मिसाइल ASTRA भी खरीदेगा।

ब्रह्मोस के कितने खरीदार?

भारत की इस अचूक मिसाइल को अपनी सेना का हिस्सा बनाने के लिए दुनिया के कई देशों में रेस लगी हुई है। भारत और रूस की तरफ से Brahmos Missile को मिलकर बनाया है। साल 2022 में फिलीपींस भारत की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को खरीदने वाला दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय देश बना। वियतनाम के साथ डील आखिरी चरण में है। वहीं, इंडोनेशिया खरीदारों की लिस्ट में शामिल नया कन्फर्म नाम है। रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रह्मोस की मारक क्षमता को देखते हुए दुनिया के कई शक्तिशाली देश भी इसे अपनी डिफेंस लाइन में शामिल करना चाहते हैं।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) : यूएई इस समय भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल और 'आकाशतीर' (Akashteer) एयर डिफेंस सिस्टम दोनों को खरीदने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है। इसके अलावा साउथ अफ्रीका और थाईलैंड ने भी भारतीय रक्षा मंत्रालय के सामने ब्रह्मोस को लेकर अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। वहीं,

लैटिन अमेरिकी देशों में ब्राजील (Brazil) और चिली (Chile) जैसे देश भी भारत से इस मिसाइल को इंपोर्ट करने में दिलचस्पी दिखा चुके हैं।

आखिर क्यों है 'ब्रह्मोस' की इतनी डिमांड?

ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे घातक और तेज क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी लोकप्रियता के पीछे इसकी कई बेजोड़ खूबियां हैं। भारत-रूस ने मिलकर इस मिसाइल को बनाया है। मोटे तौर पर यह भारत के डीआरडीओ (DRDO) और रूस के 'एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया' का एक संयुक्त उद्यम है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी को मिलाकर रखा गया है।

ऑपरेशन सिंदूर में दिखा जलवा

यह मिसाइल दागो और भूल जाओ (Fire-and-Forget) सिद्धांत पर काम करती है। इसे जमीन (Land), समुद्र (Sea), पनडुब्बी (Sub-sea) और लड़ाकू विमान (Air Platforms) यानी चारों जगहों से दागा जा सकता है। मैक 2.8 की सुपरसोनिक स्पीड से हमला करने वाली यह मिसाइल दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं देती है। यह मिसाइल बेहद कम ऊंचाई पर उड़ती है (Low-altitude terminal flight profile), जिसकी वजह से दुश्मन के रडार या एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान पर भारतीय रक्षा बलों ने इस मिसाइल से प्रहार किया। इसके सटीक हमलों और विध्वंसक नतीजों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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