VB-G RAM G Act 2025 Explained : ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार और कमाई के अवसर बहुत मायने रखते हैं। गांवों में कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी आय खेती या मजदूरी पर निर्भर करती है। खेती के मौसम में काम मिल जाता है, लेकिन बाकी समय रोजगार की कमी हो सकती है। ऐसे में ग्रामीण परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण रोजगार से जुड़े कानून में बदलाव किया गया है। विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM G एक्ट, 2025, ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने और गांवों में टिकाऊ विकास कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है। दिए गए डिटेल के मुताबिक, यह कानून 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ और इसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा या MGNREGA) की जगह ली। इस कानून के तहत हर पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देने का प्रावधान है। पहले मनरेगा के तहत यह सीमा 100 दिन थी। नए कानून में रोजगार के साथ-साथ पानी बचाने, गांवों में जरूरी सुविधाएं विकसित करने और आजीविका के साधन मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
क्या है VB-G RAM G एक्ट?
VB-G RAM G एक्ट का पूरा नाम विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मजदूरी के जरिए रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में ऐसे काम कराना है, जिनका फायदा लोगों को लंबे समय तक मिल सके। आसान भाषा में समझें तो इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को केवल कुछ दिनों का काम देने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है। इसके साथ ऐसे संसाधन और सुविधाएं तैयार करने पर भी जोर है, जो गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकें। उदाहरण के लिए, किसी गांव में पानी की कमी है, तो वहां जल संरक्षण से जुड़े काम कराए जा सकते हैं। किसी गांव में सड़क या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरुरत है, तो वहां विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सकती है। इससे एक ओर लोगों को मजदूरी मिलेगी, वहीं दूसरी ओर गांव में उपयोगी संपत्तियां भी बनेंगी। इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण विकास को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जोड़ना भी है।
100 दिन की जगह अब 125 दिन के रोजगार की गारंटी
इस कानून की सबसे प्रमुख विशेषता रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करना है। इसका मतलब है कि पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन तक मजदूरी वाला रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह सुविधा उन ग्रामीण परिवारों के लिए है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हैं। अकुशल काम का मतलब ऐसे काम से है, जिसके लिए किसी खास तकनीकी प्रशिक्षण या पेशेवर योग्यता की जरूरत नहीं होती। मसलन, जल संरक्षण के लिए गड्ढे खोदना, तालाबों के विकास में मदद करना और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े कुछ काम इस तरह के रोजगार का हिस्सा हो सकते हैं। रोजगार की अवधि बढ़ने से परिवारों को साल में ज्यादा दिनों तक कमाई का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि जरूरतमंद लोगों को समय पर काम मिलता है या नहीं और मजदूरी का भुगतान कितना नियमित रहता है।
गांवों के विकास के लिए 4 प्रमुख क्षेत्र
VB-G RAM G एक्ट में ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों को चार प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है। इनका उद्देश्य गांवों में ऐसी सुविधाएं तैयार करना है, जो रोजगार देने के साथ भविष्य की जरुरतों को भी पूरा करें।
- जल सुरक्षा:- इसके तहत पानी को बचाने और जल संसाधनों को बेहतर बनाने से जुड़े काम किए जाएंगे। तालाबों का विकास, वर्षा जल को सहेजना और पानी के संरक्षण से जुड़े कार्य इसके उदाहरण हो सकते हैं। इससे खेती और ग्रामीण जीवन में पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
- बुनियादी ग्रामीण ढांचा:- गांवों में जरूरी सुविधाओं और सार्वजनिक संपत्तियों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करना है।
- आजीविका से जुड़ा ढांचा:- इसके तहत ऐसे संसाधन तैयार करने पर जोर होगा, जो लोगों की कमाई के साधनों को मजबूत करें। इनका लाभ ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका से जुड़े कामों में मिल सकता है।
- खराब मौसम और आपदाओं से बचाव:- जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं से गांवों को होने वाले नुकसान को कम करने वाले कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य गांवों को सूखा, बाढ़ और मौसम से जुड़ी दूसरी चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।
इन चार क्षेत्रों के जरिए रोजगार के साथ गांवों की लंबे समय की जरुरतों को पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
15 दिन में काम नहीं मिला तो क्या होगा?
रोजगार की गारंटी तभी उपयोगी है, जब जरुरत पड़ने पर लोगों को काम मिले। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कानून में रोजगार उपलब्ध कराने की समयसीमा का प्रावधान है। आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। अगर तय समय में काम नहीं मिलता है, तो पात्र आवेदक को नियमानुसार बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार हो सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार मांगने वाले लोगों को अनिश्चित समय तक इंतजार न करना पड़े। हालांकि, इसके वास्तविक लाभ के लिए आवेदन की सही प्रक्रिया, पात्रता और भत्ते से जुड़े नियमों की जानकारी होना जरूरी है।
रोजगार की गारंटी से गांवों के विकास तक… क्या है VB-G RAM G एक्ट? (तस्वीर-AI)
मजदूरी का भुगतान और काम की दूरी से जुड़े नियम
नए कानून में मजदूरी के भुगतान और काम की जगह को लेकर भी प्रावधान दिए गए हैं। मजदूरी का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया जाएगा। यानी पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाएगा। मस्टर रोल बंद होने के बाद सामान्य तौर पर एक पखवाड़े के भीतर मजदूरी देने का प्रावधान है। भुगतान में देरी होने पर नियमानुसार मुआवजे का प्रावधान भी है। काम की दूरी के मामले में भी एक व्यवस्था तय की गई है। रोजगार देने की कोशिश आवेदक के गांव से 5 किलोमीटर के भीतर की जानी चाहिए। अगर काम 5 किलोमीटर से अधिक दूर, लेकिन उसी ब्लॉक के भीतर मिलता है, तो मजदूरी के ऊपर 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान है। इन नियमों का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को काम पाने और मजदूरी प्राप्त करने में होने वाली परेशानियों को कम करना है।
गांव की योजना अब गांव के लोग ही तैयार करेंगे
इस कानून की एक और अहम विशेषता है विकसित ग्राम पंचायत योजना (Viksit Gram Panchayat Plans यानी VGPPs)। इसके तहत गांवों के विकास की योजना स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। ग्राम पंचायतें गांव में मौजूद सुविधाओं, सरकारी संपत्तियों और विकास से जुड़ी कमियों का आकलन करेंगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन कामों को पहले पूरा करना जरूरी है। इन योजनाओं को ग्राम सभा की मंजूरी दी जाएगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी गांव में पानी की समस्या गंभीर है, लेकिन दूसरे गांव में सड़क या सार्वजनिक सुविधाओं की कमी है, तो दोनों जगह एक जैसी योजना लागू करना जरूरी नहीं होगा। स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कामों की प्राथमिकता तय की जा सकेगी। इस प्रक्रिया का मकसद यह है कि विकास की योजनाएं केवल ऊपर से तय न हों, बल्कि गांव के लोग भी उनमें अपनी भागीदारी निभाएं।
क्या है VGPP और इसमें तकनीक की क्या भूमिका होगी?
विकसित ग्राम पंचायत योजना का उद्देश्य रोजगार से जुड़े कामों को गांव के विकास की बड़ी योजना से जोड़ना है। इसके तहत पहले यह देखा जाएगा कि गांव में कौन-सी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं और कहां सुधार की जरुरत है। योजना तैयार करने में GIS यानी भौगोलिक सूचना प्रणाली और डिजिटल मैपिंग जैसे साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। युक्तधारा और पीएम गतिशक्ति जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से उपलब्ध संसाधनों और विकास कार्यों की जगह की जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस इलाके में किस तरह के काम की जरुरत है। साथ ही, पहले से मौजूद संपत्तियों की जानकारी मिलने से एक ही तरह के काम को बार-बार कराने की आशंका कम हो सकती है। इस योजना के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों में 318 तरह के कार्यों की पहचान की गई है। ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार योजनाओं को ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण विकास के अलग-अलग प्रयासों में तालमेल बढ़ाना है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल व्यवस्था
VB-G RAM G एक्ट के तहत रोजगार देने, काम की निगरानी करने और भुगतान से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें ई-केवाईसी, चेहरे की पहचान के जरिए हाजिरी, काम की जगह की जियो-टैगिंग, इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसे साधन शामिल हैं। इनका उद्देश्य मजदूरों की पहचान की पुष्टि करना, काम की प्रगति पर नजर रखना और बनाई गई संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विश्लेषण से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर निगरानी और योजना बनाने में मदद मिल सकती है। काम की जगह पर जनता बोर्ड लगाना भी जरूरी होगा। इन बोर्डों के जरिए संबंधित काम और उससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जा सकेगी। इससे ग्रामीण लोगों को यह जानने में मदद मिलेगी कि उनके गांव में कौन-सा काम हो रहा है। हालांकि, तकनीक से पारदर्शिता बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी होगा कि डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल न कर पाने वाले मजदूरों को परेशानी न हो। इंटरनेट, पहचान सत्यापन या तकनीकी दिक्कतों के कारण किसी पात्र व्यक्ति को रोजगार और मजदूरी से वंचित नहीं होना चाहिए।
खेती के मौसम में मजदूरों की उपलब्धता पर भी ध्यान
ग्रामीण इलाकों में बुवाई और कटाई के समय खेतों में मजदूरों की मांग बढ़ जाती है। अगर इसी दौरान दूसरे कामों में भी बड़ी संख्या में मजदूर लग जाते हैं, तो किसानों को श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए नए कानून में राज्यों को बुवाई और कटाई के प्रमुख समय के लिए ऐसी अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान है, जब इस कानून के तहत काम नहीं कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य खेती के जरूरी मौसम में खेतों के लिए मजदूरों की उपलब्धता बनाए रखना है। हालांकि, यह व्यवस्था राज्यों की ओर से अधिसूचित अवधि और लागू नियमों के अनुसार काम करेगी।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच खर्च का बंटवारा
ग्रामीण रोजगार योजना को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच खर्च बांटने की व्यवस्था भी तय की गई है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 90:10 होगा। अन्य राज्यों और विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 60:40 रखा गया है। बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों का खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। इस व्यवस्था के तहत राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधन, कर्मचारियों की उपलब्धता और पंचायतों की प्रशासनिक क्षमता जरूरी होगी।
अब तक कितने लोगों को मिला रोजगार?
उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 24 सितंबर 2026 तक VB-G RAM G के तहत 31.69 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार पैदा हुआ था। इससे 2.81 करोड़ से अधिक श्रमिकों को लाभ मिला। इस दौरान रोजगार में महिलाओं की भागीदारी 61.65 प्रतिशत रही। यहां मानव-दिवस का मतलब समझना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को एक दिन काम मिलता है, तो उसे एक मानव-दिवस माना जाता है। इसी तरह, 100 लोगों को एक दिन काम मिलने पर कुल 100 मानव-दिवस होंगे। ये आंकड़े योजना के शुरुआती कार्यान्वयन की तस्वीर दिखाते हैं। हालांकि, योजना का व्यापक असर जानने के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि कितने परिवारों को उनकी मांग के अनुसार काम मिला, मजदूरी समय पर पहुंची या नहीं और बनाए गए संसाधनों से गांवों को कितना फायदा हुआ।
क्या बदल सकती है गांवों की तस्वीर?
VB-G RAM G एक्ट में रोजगार की अवधि बढ़ाने, स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाएं बनाने और गांवों में टिकाऊ संपत्तियां तैयार करने पर जोर दिया गया है। अगर इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त कमाई के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, पानी, बुनियादी ढांचे और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं में सुधार की संभावना भी है। लेकिन किसी भी कानून की सफलता केवल उसके प्रावधानों से तय नहीं होती। इसके लिए जरूरी है कि पंचायतों को पर्याप्त संसाधन मिलें, मजदूरों को समय पर काम और भुगतान मिले, शिकायतों का समाधान हो और डिजिटल व्यवस्था सबके लिए सुलभ रहे।
कुल मिलाकर, VB-G RAM G एक्ट ग्रामीण रोजगार को गांवों के लॉन्ग टर्म विकास से जोड़ने की कोशिश करता है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि रोजगार की कानूनी गारंटी कितनी प्रभावी रहती है और योजनाओं से बनने वाली संपत्तियां ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को कितना पूरा कर पाती हैं।
