US-Venezuela Oil Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक बड़े और ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की है। इस समझौते के तहत अमेरिका को वेनेजुएला के करीब 65 अरब बैरल के विशाल और अप्रयुक्त तेल भंडारों तक लागत मूल्य पर पहुंच मिलेगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील करार दिया है। इस डील के जरिए अमेरिका घरेलू स्तर पर बढ़ती ईंधन कीमतों को काबू में करने और अपने सामरिक तेल भंडार को फिर से भरने की कोशिश कर रहा है।
समझौते की मुख्य शर्तें और 100 साल के अधिकार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच बातचीत के बाद यह डील तय हुई है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका एक निजी ऑपरेटर के साथ मिलकर वेनेजुएला में एक नई कंपनी बनाएगा। रोड्रिगेज सरकार ने इस नई कंपनी को 17 तेल क्षेत्रों के विकास के लिए 100 साल के अधिकार दिए हैं। इस व्यवस्था में अमेरिका को कुल उत्पादन का 55% प्रभावी हिस्सा मिलेगा। इसमें मालिकाना हक के साथ-साथ लागत मूल्य पर तेल खरीदने का अधिकार भी शामिल है। यह नई निजी कंपनी सऊदी अरामको के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तेल भंडार धारक कंपनी बन जाएगी। वेनेजुएला सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से देश के तेल क्षेत्र में $100 अरब का निवेश आएगा और कराकस को $209 अरब से ज्यादा का टैक्स राजस्व मिलेगा।
अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतें और ईरान युद्ध का दबाव
यह डील ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति ट्रंप पर अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों को कम करने का भारी राजनीतिक दबाव है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। इस संकट के चलते अमेरिका में औसतन गैस की कीमत $4.09 प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल $3.21 थी। अमेरिका ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से भारी मात्रा में तेल निकाला है, जिससे यह भंडार गिरकर 300 मिलियन बैरल से भी कम रह गया है। इस समझौते से मिलने वाला तेल मुख्य रूप से अमेरिका के सामरिक भंडार को भरने और सैन्य जरूरतों को पूरा करने के काम आएगा।
वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन और निजीकरण की ओर कदम
यह घटनाक्रम वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सैन्य अभियान द्वारा हटाए जाने और गिरफ्तार किए जाने के करीब 9 महीने बाद देखने को मिला है। मादुरो इस समय अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी और नारको-आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद हैं। मादुरो के हटने के बाद सत्ता में आई डेल्सी रोड्रिगेज ने देश के तेल क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए हैं। इसने पिछले दो दशकों से चले आ रहे समाजवादी शासन के उस सिद्धांत को उलट दिया है जिसके तहत तेल संसाधनों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। ट्रंप का कहना है कि दशकों पहले हुगो चावेज द्वारा अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करके चुराया गया तेल अब वापस अमेरिका के प्रभाव में आ रहा है।
चुनौतियां और तेल उत्पादन में समय लगने की संभावना
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समझौते का असर अमेरिकी बाजारों में तुरंत देखने को नहीं मिलेगा। वेनेजुएला के पास दुनिया का करीब 17% (303 अरब बैरल) तेल भंडार है, लेकिन खराब और जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण वह फिलहाल दुनिया का केवल 1% तेल ही निकाल पाता है। तेल क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को सुधारने और उत्पादन बढ़ाने में कई साल का समय और अरबों डॉलर का निवेश लगेगा। इसके अलावा, दशकों की राजनीतिक अस्थिरता और पुराने अनुभवों को देखते हुए बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियों को दोबारा वहां निवेश के लिए राजी करना एक बड़ी चुनौती होगा। पूर्व में एक्सॉनमोबाइल जैसी प्रमुख कंपनियों ने वेनेजुएला को निवेश के अयोग्य बताया था, हालांकि ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अब वहां स्थिति स्थिर हो चुकी है।
