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क्या मकान मालिक काट सकता है आपका बिजली-पानी?

अगर आप भी किराए के घर में रहते हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। कई बार मकान मालिक और किरायेदार की लड़ाई में मकान मालिक घर का बिजली पानी काट देते हैं लेकिन क्या वो ऐसा कर सकते हैं आइए जानते हैं?

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क्या मकान मालिक काट सकता है आपका बिजली-पानी?

भारत में मिडिल क्लास और नौकरीपेशा आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा किराए के मकानों में रहता है। किराए (Rent) पर रहने वाले लोगों के मन में अक्सर यह चिंता और सवाल रहता है कि अगर कभी किसी बात पर मकान मालिक के साथ उनका कोई विवाद या अनबन हो जाए, तो क्या मकान मालिक (Landlord) उनके घर की बिजली या पानी जैसी बेहद जरूरी सुविधाएं बंद कर सकता है? असल में, देश के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आती हैं जहां मकान मालिक किराएदार पर घर खाली करने का दबाव बनाने के लिए या अपनी बात मनवाने के लिए अचानक बिजली का कनेक्शन काट देते हैं या पानी की सप्लाई रोक देते हैं।

अगर आप भी किराए (Rent) के मकान में रहते हैं, तो आपको इस बात की राहत देने वाली जानकारी होनी चाहिए कि देश का कानून किराएदारों को इस मामले में बहुत मजबूत अधिकार देता है। कानूनी विशेषज्ञों और अदालतों के अनुसार, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं किसी भी इंसान के सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए मौलिक आवश्यकताएं मानी जाती हैं, इसलिए केवल आपसी विवाद के आधार पर इन्हें रोकना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

क्या मकान मालिक काट सकता है बिजली पानी?

इस विषय पर देश की अदालतों का रुख हमेशा से बेहद कड़ा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान इस बात को पूरी तरह स्पष्ट किया था कि मकान मालिक और किराएदार के बीच चल रहे किसी भी कानूनी या व्यक्तिगत विवाद का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किराएदार को बिजली जैसी बुनियादी और आवश्यक सुविधा से वंचित कर दिया जाए। उस मामले में किराएदार सालों से रह रहा था और बिजली का बिल बकाया होने के कारण कनेक्शन कट गया था।

जब किराएदार ने अपनी तरफ से सारा बकाया पैसा जमा कर दिया और बिजली दोबारा जोड़ने की मांग की, तब मकान मालिक ने 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) देने से साफ मना कर दिया ताकि बिजली बहाल न हो सके। इस पर अदालत ने साफ तौर पर कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा संविधान के तहत सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार (Right to Life) से जुड़ी है। इसे मकान मालिक अपनी मर्जी से या आपसी दुश्मनी निकालने के लिए रोक नहीं सकता है।

क्या है मॉडल टेनेंसी एक्ट?

किराएदारों के इन्हीं अधिकारों को और अधिक मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 'मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021' (Model Tenancy Act, 2021) लाया गया था। इस कानून में आवश्यक सेवाओं को बहुत ही स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, कोई भी मकान मालिक बिना किसी ठोस और उचित कारण के अपने किराएदार की आवश्यक सेवाओं को बंद नहीं कर सकता है। इन सेवाओं में सिर्फ बिजली और पानी की सप्लाई ही शामिल नहीं है, बल्कि पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (PNG), लिफ्ट और सीढ़ियों की लाइट, सामान्य उपयोग के रास्ते, पार्किंग की जगह, साफ-सफाई, कम्यूनिकेशन लिंक (जैसे इंटरनेट या टेलीफोन वायर) और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं भी शामिल हैं।

हालांकि, यहां यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 एक केंद्रीय ढांचा है और यह अभी देश के सभी राज्यों में पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। भारत के अलग-अलग राज्यों में अभी भी उनके अपने स्थानीय किरायेदारी नियम (Local Rent Control Acts) प्रभावी हैं, लेकिन बुनियादी अधिकारों के मामले में सभी कानून किराएदार के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं।

किरायेदार क्या करें?

ऐसी स्थिति में किराएदार को कानून अपने हाथ में लेने या घबराने के बजाय संबंधित कानूनी मंच या अपने क्षेत्र के 'रेंट अथॉरिटी' (किराया प्राधिकरण) से तुरंत संपर्क करना चाहिए। शिकायत मिलने पर रेंट अथॉरिटी मामले की प्राथमिक जांच करती है और यदि समस्या गंभीर हो, तो वह दोनों पक्षों की अंतिम सुनवाई से पहले ही आवश्यक सेवाओं को तुरंत और अस्थायी रूप से बहाल करने का अंतरिम आदेश दे सकती है। इसके बाद दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है।

अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि मकान मालिक ने गलत तरीके से और बिना किसी ठोस वजह के किराएदार को परेशान करने के लिए बिजली-पानी काटा था, तो प्राधिकरण मकान मालिक पर जुर्माना लगा सकता है और किराएदार को उचित मुआवजा दिलाने का आदेश दे सकता है। वहीं, अगर किराएदार की शिकायत झूठी पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता पर भी कार्रवाई हो सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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