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अब घर खरीदारों को नहीं छल सकेंगे बिल्डर! UP RERA के घर खरीदारों के हक में बदल गए ये 5 नियम

उत्तर प्रदेश में घर खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने बिल्डरों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए 5 नए और सख्त नियम लागू किए हैं, जिससे बायर्स के अधिकार मजबूत होंगे।

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UP RERA के घर खरीदारों के हक में बदल गए ये 5 नियम

घर या फ्लैट खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन के सबसे बड़े सपनों और निवेशों में से एक होता है। हालांकि, कई बार बिल्डरों द्वारा पजेशन (Possession) में देरी करने, एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करने और अतिरिक्त पैसों की मांग करने से खरीदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के मकसद से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने नए और बेहद कड़े नियम लागू किए हैं। इन नए बदलावों के बाद अब बिल्डर अपनी मनमर्जी से खरीदारों को परेशान नहीं कर सकेंगे।

UP RERA ने क्या किया बदलाव?

UP RERA द्वारा किए गए सबसे बड़े बदलावों में से एक प्रोजेक्ट डिलीवरी और पजेशन की समय सीमा को लेकर है। नए नियमों के तहत बिल्डरों को प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के समय दी गई पजेशन डेट का सख्ती से पालन करना होगा। यदि कोई बिल्डर तय समय सीमा के भीतर घर का पजेशन देने में विफल रहता है, तो उसे खरीदार को हुए नुकसान के एवज में तय दर से ब्याज और मुआवजा देना अनिवार्य होगा। इससे बिना किसी ठोस वजह के प्रोजेक्ट्स को वर्षों तक अटकाने की बिल्डरों की आदत पर लगाम लगेगी।

दूसरा मुख्य नियम अलॉटमेंट लेटर और मॉडल सेल एग्रीमेंट को लेकर है। अक्सर बिल्डर एग्रीमेंट में अपनी सहूलियत के हिसाब से एकतरफा शर्तें जोड़ देते थे। अब यूपी रेरा ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी बिल्डरों को रेरा के मानक मॉडल एग्रीमेंट (Model Agreement for Sale) का ही पालन करना होगा। इसके अलावा, तीसरे नियम के तहत बिल्डर अब खरीदारों से सुपर एरिया या किसी भी अप्रत्यक्ष हिडन चार्ज के नाम पर extra पैसा नहीं वसूल सकते। रकम की वसूली केवल 'कार्पेट एरिया' (Carpet Area) के आधार पर ही की जाएगी।

ये नियम भी है बड़े काम का

चौथा महत्वपूर्ण बदलाव प्रोजेक्ट फंड्स की निगरानी से जुड़ा है। अब बिल्डरों को किसी प्रोजेक्ट का 70% पैसा एक अलग एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में रखना अनिवार्य होगा, जिसका इस्तेमाल केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में किया जा सकेगा। इससे एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगाने पर रोक लगेगी। पांचवां नियम शिकायतों के निपटारे और बिल्डर-बायर्स के बीच बेहतर संवाद से संबंधित है, जिसके तहत रेरा ने ऑनलाइन शिकायत प्रणाली को और तेज कर दिया है ताकि पजेशन और रजिस्ट्री में देरी जैसे मामलों को जल्द सुलझाया जा सके।

यूपी रेरा के इन 5 नए नियमों के लागू होने से रियल एस्टेट बाजार में निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी। नया घर या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अब वित्तीय सुरक्षा काफी बढ़ गई है, जिससे वे बिना किसी धोखाधड़ी या जालसाजी के डर के अपने सपनों का आशियाना खरीद सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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