Emergency Fund : कोविड इमरजेंसी फंड तैयार करने का स्मार्ट और सिंपल तरीका

कोरोना वायरस महामारी आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। इससे निपटने के लिए इमरजेंसी फंड बनाने के लिए सिंपल और आसान तरीका है।

Smart and simple way to prepare Covid Emergency Fund
इमरजेंसी फंड तैयार करने का आसान तरीका  |  तस्वीर साभार: IANS

मुख्य बातें

  • आमदनी बंद होने के कारण लोगों का फाइनेंसियल हेल्थ बिगड़ गया है
  • पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग अब सबसे महत्वपूर्ण हो गया है
  • एक इमरजेंसी फंड रखना और भी जरूरी हो गया है

मौजूदा कोविड-19 वैश्विक-महामारी ने दुनिया भर में आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। इस खतरनाक बीमारी की वजह से कई लोगों की नौकरियां जाने और आमदनी बंद होने के कारण लोगों का फाइनेंसियल हेल्थ बिगड़ गया है। इस अप्रत्याशित परिस्थिति से जूझ रहे लोगों के लिए पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग अब सबसे महत्वपूर्ण हो गया है जिसमें एक इमरजेंसी फंड तैयार करना भी शामिल है।

एक इमरजेंसी फंड, बुरे दिनों के लिए अलग रखे जाने वाले पैसों के गुल्लक के समान है। इससे इमरजेंसी का सामना करने में मदद मिलती है। कोविड-19 प्रकोप के कारण एक इमरजेंसी फंड रखना और भी जरूरी हो गया है, इसलिए लोग अब ऐसे इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस ढूंढ रहे हैं जिनकी मदद से वे सुरक्षित और असरदार तरीके से यह फंड तैयार कर सकें।

एक ऐसा ही इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, सेविंग्स बैंक कस्टमर्स के लिए विभिन्न बैंकों द्वारा दी जाने वाली ऑटो स्वीप-इन फिक्स्ड डिपोजिट फैसिलिटी। इस आर्टिकल में, हम इस फैसिलिटी के बारे में विस्तार से बात करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि यह ऑप्शन एक इमरजेंसी फंड तैयार करने में कैसे मदद करता है।

स्वीप-इन फिक्स्ड डिपोजिट क्या है?

मान लीजिए, आपके सेविंग्स अकाउंट में 1 लाख रु. हैं जिस पर आपको सिर्फ 3-4% इंटरेस्ट मिलेगा, लेकिन अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आपको सिर्फ 30.000 रुपए की जरूरत है। इसलिए आप बाकी पैसे एक FD में रख सकते हैं जिस पर 5-6% इंटरेस्ट मिल सकता है जिसे आप जब चाहे, तोड़ सकते हैं। अगर FD में पैसे डालने और तोड़ने का काम ऑटोमैटिक तरीके से हो सके तो कैसा रहेगा? स्वीप-इन FD ठीक इसी तरह काम करता है। एक पूर्व-निर्धारित सीमा से अधिक पैसा अपने आप FD में चला जाता है जिस पर ज्यादा रिटर्न मिलता है। जरूरत पड़ने पर पैसे निकालते समय वह पैसा आपके FD से अपने आप निकलकर आपके सेविंग्स अकाउंट में चला आता है और इस तरह खुद FD तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

स्वीप-इन FD कैसे मदद करता है?

स्वीप-इन FD आपको ज्यादा इंटरेस्ट कमाने में मदद करता है। लेकिन, यह इंटरेस्ट, FD में रखे गए पैसे के टाइम पीरियड के आधार पर मिलता है। जैसे, एक स्वीप-इन FD में 30 दिन तक 5000 रु. रखने पर बैंक के 30 दिन के टाइम पीरियड रेट के आधार पर इंटरेस्ट मिलेगा। ये अकाउंट्स तभी उपयोगी होते हैं जब आपके अकाउंट में एक्स्ट्रा पैसे रहते हैं जिन्हें तुरंत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होती है।

स्वीप-इन एक इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए एक अच्छा ऑप्शन क्यों है

स्वीप-इन FD एक इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए एक बहुत बढ़िया ऑप्शन हो सकता है क्योंकि इन पर ज्यादा रिटर्न मिलने के साथ-साथ इन्हें आसानी से तोड़ा भी जा सकता है। इमरजेंसी में पैसे की जरूरत पड़ने पर निर्धारित अमाउंट आपके सेविंग्स बैंक अकाउंट में वापस आ जाता है। लेकिन याद रखें, यह सब समय आपके सेविंग्स अकाउंट से जुड़ा रहता है। इसलिए, आपको स्वीप-इन FD का इस्तेमाल करते समय खुद पर काबू रखना चाहिए और उसका इस्तेमाल रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नहीं करना चाहिए। यदि आपके सेविंग्स अकाउंट में हमेशा ज्यादा पैसे पड़े

रहते हैं तो आपको ज्यादा रिटर्न कमाने और इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए स्वीप-इन FD का इस्तेमाल करना चाहिए। आपके इमरजेंसी फंड में कम-से-कम आपके तीन महीने के इनकम के बराबर पैसे होने चाहिए या जो आपके लाइफ स्टाइल के आधार पर किसी इमरजेंसी से निपटने के लिए काफी हो।

स्वीप-इन FD अकाउंट खोलते समय ध्यान में रखने लायक बातें

स्वीप-इन FD अकाउंट खोलने के नियम और शर्तें, अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग होती हैं। मालूम कर लें कि आपके अकाउंट पर स्वीप-इन फैसिलिटी मिल सकती है या नहीं। इसके अलावा निम्नलिखित बातों का भी ध्यान रखें:-

थ्रेसहोल्ड: अपने बैंक से पूछें कि आपको अपने अकाउंट में कितने पैसे रखने होंगे। इस थ्रेसहोल्ड से ज्यादा पैसा, FD में चला जाएगा। कुछ बैंक आपको अपना थ्रेसहोल्ड सेट करने दे सकते हैं। थ्रेसहोल्ड सेट करते समय अपने बैंक से अपने सेविंग्स अकाउंट में मेन्टेन किए जाने वाले मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) के बारे में पूछ लें। क्योंकि इस MAB वैल्यू के ऊपर का अमाउंट ही स्वीप-इन हो सकता है।

इंटरेस्ट रेट्स और टाइम पीरियड: अपने बैंक से विभिन्न टाइम-पीरियड और इंटरेस्ट रेट के बारे में पूछ लें। ये इंटरेस्ट रेट, आम तौर पर रेगुलर फिक्स्ड डिपोजिट के समान होते हैं। प्रमुख बैंकों के इंटरेस्ट रेट्स की तुलना करें। आप कोई भी टाइम पीरियड चुन सकते हैं। तुरंत पैसे निकालने की जरूरत होने पर, स्वीप-इन FD में इन्वेस्ट करना बेहतर होगा। तुरंत पैसे की जरूरत न होने पर, रेगुलर FD या दूसरे ऑप्शन जैसे लिक्विड म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्ट करना बेहतर होगा।

समय से पहले पैसे की निकासी: पैसे निकालने के नियमों के बारे में जान लें क्योंकि अलग-अलग बैंकों में ये नियम अलग-अलग होते हैं। आम तौर पर, स्वीप-इन FD अकाउंट से समय से पहले पैसे निकालने पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती है। इसलिए, कुछ पैसे निकालने के बाद भी बाकी पैसे पर इंटरेस्ट मिलता रहेगा। उदाहरण के लिए, एक स्वीप-इन FD अकाउंट में एक साल के लिए 6% की दर से पैसे इन्वेस्ट करने पर, और 30 दिन में कुछ पैसे निकाल लेने पर जिसका इंटरेस्ट रेट 4% है, आपको निकाले गए पैसे पर 4% और बाकी पैसे पर 6% इंटरेस्ट मिलेगा।

स्वीप-इन FD में इन्वेस्ट करते समय, उसके रिटर्न पर लगने वाले टैक्स को ध्यान में रखें। स्वीप-इन FD पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर रेगुलर FD की तरह टैक्स लगता है। यह इंटरेस्ट, सेक्शन 80TTA के अनुसार आपके इनकम में जुड़ जाएगा जिसका लाभ सिर्फ कम टैक्स ब्रैकेट वाले लोगों को मिलेगा। FD, पैसे की जरूरत और पैसे की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में काफी मददगार होते हैं लेकिन ज्यादा रिटर्न कमाने में नहीं। इसलिए, इनका इस्तेमाल सोच-समझकर करें।

(इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर दी जा रही है। बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं, इसलिए निवेश के पहले अपने स्तर पर सलाह लें।) ( ये लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसको निवेश से जुड़ी, वित्तीय या दूसरी सलाह न माना जाए)

अगली खबर