जो काम नहीं कर पाए कैप्टन उसे पूरा करेंगे राकेश झुनझुनवाला ! जानें भारत के 'वॉरेन बफे' का 'आकाश' प्लान

बिजनेस
प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Oct 12, 2021 | 21:38 IST

Rakesh Jhunjhunwala Akasa Airline:भारतीय एविएशन सेक्टर में  करीब 18 साल बाद, एक बार फिर अल्ट्रा लो कॉस्ट कैरिअर (Low cost carrier) की दस्तक हो रही है। आकाश एयर 2022 की गर्मियों मे अपनी सेवाएं शुरू कर सकती है।

Rakesh jhunjhunwala Akasa Airline
निवेशक राकेश झुनझुनवाला की आकाश एयरलाइन को मिली एनओसी 
मुख्य बातें
  • CAPA की रिपोर्ट के अनुसार आकाश एयर में राकेश झुनझुनवाला 35 मिलियन अमेरिकी डालर का निवेश कर सकते हैं।
  • भारत में लो कॉस्ट एयरलाइन एयर डेक्कन की कैप्टन गोपीनाथ ने शुरूआत की थी।
  • उड़ान स्कीम की तहत देश में इस 369 रुट पर हवाई सेवाएं दी जा रही हैं। जो छोटे शहरों को कनेक्ट करती हैं।

नई दिल्ली: कहते हैं इतिहास अपने आप को दोहराता है। भारतीय एविएशन सेक्टर में  करीब 18 साल बाद, एक बार फिर  अल्ट्रा लो कॉस्ट कैरिअर (Low cost carrier) की दस्तक हो रही है। जी हां हम, देश के वॉरेन बफे (Warren Buffet) कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला की सपोर्ट वाली आकाश एयर (Akasa Air) की बात कर रहे हैं। आकाश एयर को चलाने वाली कंपनी एसएनवी एविएशन के अनुसार, उसे सरकार से NOC सर्टिफिकेट मिल चुका है। और कपंनी की 2022 की गर्मियों में अपनी सेवाएं शुरू करने की योजना है। कंपनी  Akasa Air के सीईओ विनय दुबे के बयान से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि कंपनी एविएशन सेक्टर में अल्ट्रा लो कॉस्ट एयरलाइंस  शुरू करेगी। उन्होंने अपने बयान में कहा है "एयरलाइन ग्राहकों को सबसे अफोर्डेबल, भरोसेमंद, दक्ष यात्रा का अनुभव देगी।" इसके पहले 2003 में कैप्टन गोपीनाथ ने भारत में अल्ट्रा लो कॉस्ट एयरलाइन एयर डेक्कन की शुरूआत की थी। 

राकेश झुनझुनवाला की होगी 40 फीसदी हिस्सेदारी !

भारत के वॉरेन बफे कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला की आकाश एयर में 40 फीसदी हिस्सेदारी हो सकती है। एविएशन कंसल्टेंसी फर्म CAPA की रिपोर्ट के अनुसार राकेश झुनझुनवाला 40% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 35 मिलियन अमेरिकी डालर के निवेश की योजना पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत कंपनी अगले चार वर्षों के भीतर 70 विमान अपने बेड़े में शामिल करेगी। और उनकी कोशिश है 180 सीटों वाले विमानों को कंपनी के बेड़े में शामिल किया जाय।

एविशन सेक्टर के दिग्गजों ने मिलाया है हाथ

आकाश एयर में राकेश झुनझुनवाला के साथ उसके सीईओ के रुप में विनय दुबे भी जुड़े हैं। जो कि जेट एयरवेज के सीआईओ रह चुके हैं। इसके अलावा भारत में लो कॉस्ट एयरलाइन को सफल मॉडल के रुप में पेश करने वाले इंडिगो के पूर्व सीईओ आदित्य घोष भी कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल हुए है। इन दिग्गजों के एक साथ आने का सीधा मतलब है कि कंपनी जेट एयरवेज, किंगफिशर के बंद होने के बाद एविएशन सेक्टर में खाली पड़े स्पेस को हथियाना चाहती है।

क्या होता है अल्ट्रा लो कॉस्ट मॉडल (ULCC)

इस तरह के मॉडल में कंपनियां बिजनेस क्लॉस का विकल्प ग्राहकों को नहीं देती है। भोजन, नाश्ते, सामान रखने की सुविधा आदि को किराए में शामिल नहीं करती है। इसके अलावा पसंद की सीट लेने, सामान की चेक-इन आदि की सुविधा  के लिए भी अलग से पैसे लेती हैं। जाहिर है  वह अपनी परिचालन लागत को कम रखना चाहती है। जिससे कि यात्रियों के लिए हवाई किराया कम से कम रखा जा सके। अभी भी इंडिगो, स्पाइस जेट जैसी लो कॉस्ट एयरलाइन किराया कम रखने के लिए, कई सुविधाओं को किराए में शामिल नहीं करती है। 

कैप्टन गोपीनाथ ने 1 रुपये में दिए थे टिकट

जब कैप्टन गोपीनाथ ने 2003 में एयर डेक्कन शुरू की थी, तो कंपनी ने उस समय कई ऐसे ऑफर दिए थे, जिससे कि भारतीय एविशन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल गई थी। मसलन एक रुपये में हवाई यात्रा, 500 रुपये में हवाई यात्रा जैसे कई ऑफर कंपनी लेकर आई थी। उस दौर में ऐसे ऑफर भारतीय एविएशन इंडस्ट्री और यात्रियों के लिए चौंकाने वाले थे। इसके अलावा एयर डेक्कन ने पहली बार छोटे शहरों के बीच हवाई शुरू कर, इंडस्ट्री का मॉडल बदल दिया था। कंपनी ने उस समय विजयवाड़ा, मदुरैई , ग्वालियर जैसे शहरों के लिए हवाई सेवा शुरू की थी।  बाद में बढ़ती  ईंधन की कीमतों और छोटे शहरों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, लो फ्रिल एयरपोर्ट टर्मिनल  नहीं होने से एयर डेक्कन बाजार में नहीं टिक पाई। इसके बाद 2008 में कंपनी का किंगफिशर एयरलाइंस में विलय हो गया। हालांकि एयर डेक्कन के अनुभव ने भारत में लो कॉस्ट एयरलाइंस का रास्ता तैयार कर दिया और उसी का परिणाम है कि इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी कंपनी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं।

आकाश के लिए क्या संभावना

एविएशन एक्सपर्ट हर्षवर्धन, टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से आकाश जैसे एयरलाइंस की संभावनाओं पर कहते हैं, देखिए जेट एयरवेज और किंगफिशर के बंद होने के बाद भारत में नई एयरलाइन कंपनियों के लिए काफी मौके हैं। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था को देखते हुए भी मौके बन रहे हैं। जहां तक एयर डेक्कन से तुलना की बात है तो उस दौर और आज के दौर में काफी अंतर है। अब कंपनियां यह मानकर चलती हैं कि एविएशन सेक्टर में कमाई करने में समय लगता है। उसी आधार पर निवेशक आदि भी लाती हैं। ऐसे में संभावना की कोई कमी नहीं है।

छोटे शहरों में भी तैयार हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर

आकाश एयर के लिए एक अच्छी बात यह है कि अगर वह छोटे शहरों की कनेक्टिविटी पर फोकस करेगी। तो उसे पहले से ही तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। केंद्र सरकार द्वारा 2017 में उड़ान स्कीम के तहत शुरू की गई सेवाओं के जरिए 26 अगस्त 2021 तक 369 रुट पर हवाई सेवाएं दी जा रही हैं। इसी तरह 10 जून 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार 59 एयरपोर्ट उड़ान स्कीम के तहत ऑपरेशनल हैं। 

डीजीसीए के अगस्त 2021 के आंकड़ों के अनुसार घरेलू बाजार में इंडिगों की 57 फीसदी, एयर इंडिया की 13.2 फीसदी, स्पाइस जेट की 8.7 फीसदी, गो एयर की 6.8 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं जनवरी से अगस्त 2021 के दौरान देश में 4.60 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की है।

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