Parle-G biscuits record sale : लॉकडाउन में पारले-जी बिस्कुट की इतनी हुई बिक्री कि टूट गया 82 वर्षों का रिकॉर्ड

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 9, 2020, 04:12 PM IST

Parle-G biscuit record sales during coronavirus lockdown लॉकडाउन के दौरान सभी कंपनियों की हालत खराब है लेकिन पारले-जी बिस्कुट ने बिक्री में पिछले 82 सालों का रेकॉर्ड तोड़ दिया।

Parle-G biscuits record sale : लॉकडाउन में पारले-जी बिस्कुट की इतनी हुई बिक्री कि टूट गया 82 वर्षों का रिकॉर्ड

मुंबई: कोरोना वायरस की वजह से देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। कई कंपनियां बर्बाद हो गई। उसकी कमाई में भारी कमी हो गई। लेकिन पारले-जी (Parle-G) बिस्कुट की इतनी अधिक बिक्री हुई कि पिछले 82 सालों का रेकॉर्ड टूट गया है। पारले-जी बिस्कुट का 5 रुपए वाला पैकेट लॉकडाउन के दौरान एक राज्य से दूसरे राज्य या शहर जाने वाले प्रवासियों के लिए बहुत काम आया। जिन्होंने अपने घर वापस जाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर की पैदल और साइकिल से यात्रा की। जबकि कई ने तो पारले-जी के साथ अपने घरों का स्टॉक किया। बहुत लोगों ने पारले-जी जरूरतमंदों को बांटा भी। कोरोना वायर प्रकोप के दौरान गरीबों के लिए यह बहुत ही मददगार साबित हुआ।

1938 में स्थापित कंपनी की सर्वाधिक बिक्री लॉकडाउन में

इकोनोमिक्स टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक 1938 में स्थापित घरेलू ब्रांड पारले-जी ने लॉकडाउन के दौरान बिस्कुट की अधिकतम संख्या को बेचने का एक अनूठा मुकाम हासिल किया। हालांकि पारले प्रोडक्ट्स, पारले-जी ब्रांड के निर्माताओं ने विशिष्ट बिक्री संख्या शेयर करने से इनकार कर दिया, उन्होंने पुष्टि की कि मार्च, अप्रैल और मई आठ दशकों में उनके सबसे अच्छे महीने रहे हैं।

पारले की बढ़ी कमाई में 90% हिस्सा पारले-जी का

पारले प्रोडक्ट्स के श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा कि हमने अपनी कुल बाजार हिस्सेदारी को करीब 5% बढ़ा दिया है और इस वृद्धि में 90% हिस्सा पारले-जी की बिक्री से आया है। यह अभूतपूर्व है।

पारले ने कम समय में उत्पादन बढ़ाया

25 मार्च को लॉकडाउन होने के बाद पारले जैसे संगठित बिस्कुट निर्माताओं ने बहुत कम समय के भीतर अपना ऑपरेशन्स को चालू कर दिया। इनमें से कुछ कंपनियों ने अपने काम के लिए एक आसान और सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन की भी व्यवस्था की। एक बार जब फैक्ट्रियां चालू हो गईं, तो इन कंपनियों का ध्यान उन ब्रांडों का उत्पादन करना था, जिसकी अधिकतम बिक्री हो रही थी।

लोगों ने वही खरीदे जो सस्ते थे

क्रिसिल रेटिंग के सीनियर डायरेक्टर, अनुज सेठी ने हाल ही में एफएमसीजी कंपनियों पर एक अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि जो उपलब्ध थे उपभोक्ता वह ले रहे थे लेकिन वह सस्ती भी हो। हो सकता है कुछ कंपनियां मूल्य पर अधिक ध्यान केंद्रित किया हो। साथ ही उन्होंने कहा कि कंपनियां पिछले 18-24 महीनों में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, यह महामारी के दौरान उनके लिए अच्छा काम किया।

कम कीमत वाले बिस्कुट की बढ़ी बिक्री

पिछले तीन महीनों में प्राइस बिंदुओं पर बिस्कुट की बिक्री में भारी वृद्धि देखी गई है। एक्सपर्ट ने कहा कि ब्रिटानिया के गुड डे, टाइगर, मिल्क बिकिस, बॉर्बन और मैरी और पारले की क्रैकजैक, मोनाको और हाइड एंड सीक की लॉकडाउन के दौरान काफी संख्या में बिक्री हुई है।

कम कीमत वाले बिस्कुट पर ध्यान केंद्रित

पारले प्रोडक्ट्स ने अपने सबसे अधिक बिकने वाले-लेकिन-कम-मूल्य वाले पार्ले-जी ब्रांड के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि इसने सभी ग्राहक सेग्मेंट्स से भारी मांग की परिकल्पना की थी। खुदरा दुकानों पर प्रोडक्ट्स उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कंपनी एक सप्ताह के भीतर अपने वितरण चैनलों को भी रीसेट कर दी।

आम आदमी का बिस्कुट है पारले-जी

शाह ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान, पारले-जी कई लोगों के लिए आराम का भोजन बन गया और कई अन्य लोगों के लिए यह एकमात्र भोजन था जो उनके पास था। यह एक आम आदमी का बिस्कुट है; जो लोग ब्रेड नहीं खरीद सकते, वे पारले-जी खरीदते हैं।

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