Farmer ID: जयपुर में पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि सुधारों के नए दौर की शुरुआत हुई। इस सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने किसानों की आय बढ़ाने, फूड और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, डिजिटल कृषि और फार्मर आईडी आधारित योजनाओं पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के ‘सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ विजन को जमीन पर उतारने के लिए सम्मेलन को एक साझा प्लेटफॉर्म बताया गया। मंत्री शिवराज ने ट्वीट कर कहा कि मैं सभी राज्यों से निवेदन करना चाहता हूं कि आप गंभीर हो जाएं, फार्मर आईडी के काम को अगले दो महीनों में हर हाल में पूरा करना है। यह अत्यंत जरूरी है कि कोई भी किसान खाद से वंचित न रहे। इसलिए फार्मर आईडी के आधार पर जो व्यवस्था बनाई जा रही है, उसके माध्यम से खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि एक भी बोरी फालतू न जाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब एक दिन की औपचारिक मीटिंग की जगह अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के लिए विशेष क्षेत्रीय सम्मेलन होंगे।
खाद लेने के लिए किसानों को मिलेगी फार्मर आईडी (तस्वीर-X)
फार्मर आईडी और डिजिटल कृषि
केंद्रीय मंत्री ने फार्मर आईडी को डिजिटल कृषि का सबसे उपयोगी उपकरण बताया। इससे बैंक लोन, सरकारी मदद और खाद वितरण जैसी सेवाएं सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेंगी। कुछ राज्यों में फार्मर आईडी के माध्यम से करोड़ों रुपये सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। आगे खाद वितरण को भी किसान की भूमि और फसल के आधार पर फार्मर आईडी से लिंक किया जाएगा, ताकि सस्ता खाद गलत जगह न पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए कहा कि डिजिटल और डेटा आधारित कृषि प्रशासन से ही देश और किसानों को सुरक्षित रखा जा सकता है। सभी राज्यों से फार्मर आईडी मिशन को 100 प्रतिशत पूरा करने का आग्रह किया गया।
तीन प्रमुख लक्ष्य: फूड सुरक्षा, आय और पोषण
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि के तीन मुख्य लक्ष्य बताए देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा। गेहूं और चावल में देश के भंडार पर्याप्त हैं, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता बढ़ानी है। इससे देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह अपनी उत्पादन क्षमता पर आधारित होगी और आयात पर निर्भरता खत्म होगी। किसानों की आय बढ़ाना और जीवन स्तर सुधारना प्राथमिकता है, साथ ही पोषण सुरक्षा को नीति का अहम हिस्सा बताया गया।
MSP, खरीद और बाजार भाव
दलहन और तिलहन की खरीद PM-AASHA के माध्यम से कृषि विभाग करेगा, जबकि गेहूं और चावल की खरीद खाद्य विभाग करेगा। समय पर खरीद सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है। चने, मसूर और तुअर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी। जहां फिजिकल खरीद संभव नहीं, वहाँ भावांतर भुगतान के माध्यम से MSP और बाजार भाव का अंतर सीधे किसानों के खाते में दिया जाएगा। आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों में अंतरराष्ट्रीय कारणों से गिरती कीमतों की चुनौती को देखते हुए MIS व्यवस्था को उपयोगी बताया गया। इसमें मॉडल रेट और बाजार भाव का अंतर सीधे किसानों को दिया जाएगा, 50 प्रतिशत केंद्र और 50 प्रतिशत राज्य वहन करेंगे। बड़े शहरों तक उपज पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी भी साझा की जाएगी।
कृषि रोडमैप और स्थानीय अभियान
विकसित कृषि संकल्प अभियान अब राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आयोजित होंगे। भारत सरकार वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों की टीम भेजकर राज्यों के कार्यक्रम को सहयोग देगी। राजस्थान में ICAR की टीम खेत स्तर पर वैज्ञानिक सलाह और इनोवेशन विस्तार करेगी। केंद्र और राज्यों के सहयोग से कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। राजस्थान ने शुरुआत की है और ICAR वैज्ञानिक और मंत्रालय के नोडल अधिकारी राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। अन्य राज्यों को भी उनके रोडमैप के लिए पूरा सहयोग मिलेगा।
नीतियों में लचीलापन और बजट का समयबद्ध उपयोग
1 अप्रैल से लागू नए बजट को तुरंत राज्यों को जारी करने और साल की शुरुआत से ही योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की अपील की गई। इस बार केंद्र राज्य पर योजनाएं थोपेगा नहीं, बल्कि राज्य अपनी जरूरत के अनुसार प्राथमिकता चुनेंगे। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी योजनाओं में लचीलापन रहेगा। ‘टीम एग्रीकल्चर’ के तहत नीतियां केंद्र बनाएगा, लेकिन क्रियान्वयन राज्यों के हाथ में होगा। जितनी गंभीरता से राज्य काम करेंगे, योजनाओं के लाभ उतनी ही तेजी से किसानों तक पहुंचेंगे।
आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य
हाल के मौसमीय असंतुलन और नुकसान का हवाला देते हुए किसानों को नुकसान का सही आकलन करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया गया। इससे प्रभावित किसानों को पूरा लाभ मिलेगा। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सभी से स्वास्थ्य पर ध्यान देने और संतुलित भोजन लेने की अपील की गई, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है और कृषि नेतृत्व को सक्रिय रहकर किसानों की सेवा करनी चाहिए।
