आज विश्वभर में कई देश जंग में उलझे हुए हैं या जंग जैसे माहौल हैं। जैसे जहां एक ओर इस्राइल हमास के खिलाफ लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है, वहीं, दूसरी ओर रूस और यूक्रेन की जंग चार चाल होने के बाद भी जारी है। भारत और पाकिस्तान के बीच भी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ऐसे ही माहौल हो गए थे। ऐसे संघर्षों ने पूरी दुनिया पर असर डाला है, और वे अपनी सुरक्षा को लेकर और बेहतर तरीके से तैयारी कर रहे हैं। सीमाई विवाद, भू-राजनैतिक तनाव के कारण लगभग सभी देशों ने अपने-अपने सैन्य बजट को बढ़ाते हुए हथियारों की खरीद बढ़ा दी है। हथियारों की खरीद में बढोतरी ने सीधे तौर पर ग्लोबल वेपन मार्केट को प्रभावित किया है। दुनिया भर में जारी तनाव के इस माहौल में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में उन देशों के बारे में बताया है जिनका वैश्विक हथियार बाजार पर दबदबा है। सिपरी की इसी रिपोर्ट के आधार पर हम आपको बताएंगे कि दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार कौन सा देश बेचता है। इसके अलावा ग्लोबल वेपन मार्केट पर बादशाहत हासिल करने वाले टॉप पांच देशों के बारे में भी बताएंगे।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI हर साल दुनिया भर में हथियारों के बड़े निर्यातकों और आयातकों का विश्लेषण प्रकाशित करता है। सिपरी की ताजा रिपोर्ट में वैश्विक हथियार व्यापार में कुछ देशों का दबदबा साफ दिखाई देता है। इनमें साफ पता चलता है कि अमेरिका वैश्विक हथियार मार्केट का बादशाह बना हुआ है। हालांकि उसके विरोधी रूस को यूक्रेन से लड़ाई के कारण हथियारों की बिक्री में भी नुकसान उठाना पड़ा है।
अमेरिका
सिपरी की ताजा रिपोर्ट में दुनिया के सबसे ज्यादा हथियार बेचने वाले देशों में अमेरिका सबसे ऊपर है। ग्लोबल वेपन मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 2020 से 2024 के बीच 43 फीसदी रही। इससे पता चलता है कि इन सालों में दुनियाभर में बेचे गए हथियारों का लगभग आधे अकेले अमेरिका ने बेचे हैं। इसके अलावा, अमेरिका दुनियाभर के देशों में फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और एडवांस टेक्नॉलॉजी से लैस वेपन भेजता है। अमेरिका के मुख्य खरीदार देशों में सऊदी अरब,यूक्रेन,जापान शामिल हैं। इससे साफ पता चलता है कि उसे दुनिया की महाशक्ति यूहीं नहीं कहा जाता है। अमेरिका की निर्यात क्षमता और विशाल रक्षा कंपनियों ने उसे वैश्विक हथियार बाजार में असाधारण बढ़त दी है।
फ्रांस
वहीं, हथियार के सबसे बड़े निर्यातकों में दूसरे नंबर पर फ्रांस का होना चौंकाने वाला है। रूस को पीछे छोड़ फ्रांस ने हथियारों की बिक्री के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। वैश्विक हिस्सेदारी में फ्रांस का हिस्सा अब 10 फीसदी से ज्यादा हो गया है। फ्रांस की इस छलांग में भारत द्वारा 36 राफेल की खरीद से भी आया है। राफेल के अलावा, फ्रांस ने लड़ाकू विमान, युद्धक हेलीकॉप्टर, मिसाइल आदि शामिल हैं। भारत के अलावा कतर और ग्रीस जैसे देशों को हथियार बेचकर फ्रांस ने रक्षा बाज़ार में अपनी पकड़ मजबूत की है।
रूस
हथियारों की बिक्री की इस दौड़ में रूस तीसरे पायदान पर पहुंच गया है। यूक्रेन से जारी जंग का नुकसान उसे यहां भी उठाना पड़ा है। कभी रूस को हथियार बाजार में अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी माना जाता था, लेकिन अब स्थितियां बदली हुई हैं। सिपरी के मुताबिक, रूस के हथियार बाजार में लगभग 64 फीसदी की गिरावट आई है। अब वैश्विक हथियार बाजार में उसकी हिस्सेदारी 7 से आठ फीसदी के बीच रह गई है। 2015-19 की तुलना में रूस के हथियार निर्यात में भारी गिरावट देखी गई है,इसका मुख्य कारण यूक्रेन युद्ध और उसपर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंध हैं। रूस अब भी भारत,चीन और कजाखस्तान जैसे मुख्य ग्राहकों को हथियार देता है। रूस के हथियारों के निर्यात में कमी के कारण भले ही उसका औरा कम हुआ हो बावजूद इसके वह अभी भी प्रमुख शक्ति बना हुआ है।
चीन
चीन इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है। चीन ने अपने सस्ते हथियारों के दम पर हथियार बिक्री में अपनी वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 5.8 फीसदी बना ली है। चीन से हथियार खरीदने वाले देशों में सबसे बड़ा नाम पाकिस्तान का है। भारत से तनाव के चलते पाकिस्तान बड़े पैमाने पर चीन से हथियार खरीदता है। पाकिस्तान के अलावा, बांग्लादेश, म्यांमार और अफ्रीकी देश भी शामिल हैं।
जर्मनी
इस लिस्ट में पांचवां नंबर जर्मनी का है। वैश्विक बाजार में जर्मनी की हिस्सेदारी चीन से कम है। इसका आंकड़ा 5.6 फीसदी है। जर्मनी के अलावा,इटली, यूके, इज़राइल, स्पेन, दक्षिण कोरिया जैसे अन्य देश भी वैश्विक निर्यातों में शामिल हैं। इन देशों ने बड़े पैमाने पर तकनीकी और उन्नत सैन्य प्रणालियाँ वैश्विक बाज़ार में उपलब्ध कराई हैं।