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बांग्लादेश में बीएनपी का डूबता राजनीतिक भविष्य! क्या खालिदा के बेटे तारिक रहमान पार लगा पाएंगे नैया?

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की संस्थापक नेता और चार दशकों तक देश की सबसे मजबूत आवाज रहीं बेगम खालिदा जिया के निधन के साथ ही एक लंबे राजनीतिक युग का अंत हो गया है। उनका जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है,बल्कि वह धुरी भी टूट गई है, जिसके इर्द-गिर्द बीएनपी की पूरी राजनीति घूमती रही। अब सवाल यह है कि क्या खालिदा जिया के बेटे और BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान इस विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे? और क्या वे ऐसे समय में पार्टी को सत्ता के करीब ला सकते हैं,जब बांग्लादेश की राजनीति खुद एक नए और अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुकी है?

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बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान (फाइल फोटो- tariquerahman.bdbnp)
Authored by: Shiv Shukla
Updated Dec 31, 2025, 21:58 IST
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बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों बड़े बदलावों से गुजर रही है। एक ओर वहां अस्थिर सत्ता व्यवस्था है। देश हिंसा की आग में झुलस रहा है और डेढ़ महीने बाद देश में आम चुनाव होने हैं। इस बीच,बीते दिन बीएनपी की प्रमुख और पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन हो गया। खालिदा जिया ने लंबे समय तक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का मजबूती से नेतृत्व किया और देश की राजनीति में अपना रसूख बरकरार रखा। चुनाव से ऐन पहले खालिदा के निधन को बीएनपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे में लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी के भविष्य का क्या होगा। क्या पार्टी संस्थापक जिया उर रहमान की विरासत को आगे बढ़ाते हुए खालिदा जिया के बाद तारिक रहमान प्रभावी नेतृत्व दे पाएंगे और आगामी आम चुनावों में BNP को फिर से मजबूत स्थिति में ला पाएंगे?

खालिदा जिया थीं बीएनपी की रीढ़ की हड्डी

खालिदा जिया केवल चार दशकों से बीएनपी की नेता ही नहीं थीं,बल्कि वे पार्टी की पहचान,एकता और वैचारिक धुरी थीं। दो बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया ने बीएनपी को एक जन आधारित पार्टी बनाया। पार्टी के भीतर मतभेद होते या कैसी भी स्थिति होती,लेकिन अंतिम निर्णय उन्हीं का माना जाता था। वे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए सिर्फ नेता नहीं,बल्कि एक भावनात्मक प्रतीक थीं। यही कारण है कि जेल,बीमारी और राजनीतिक दबाव के बावजूद वे पार्टी को टूटने से बचाती रहीं। उनके निधन के साथ BNP के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि अब पार्टी को एकजुट रखने वाला वह चेहरा नहीं रहा।

khalida

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तारिक के पास मजबूत विरासत, लेकिन चुनौतियां भी

तारिक रहमान, खालिदा जिया के बड़े बेटे और बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। वे लंबे समय तक पार्टी के रणनीतिक फैसलों में शामिल रहे हैं, लेकिन बीते 17 वर्षों तक ब्रिटेन में निर्वासन के कारण वे जमीनी राजनीति से दूर रहे। हाल ही में उनकी बांग्लादेश वापसी ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा जरूर भरी है,लेकिन साथ ही कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या वे पार्टी के अंदर मौजूद गुटबाजी को संभाल पाएंगे? और सबसे अहम,क्या वे मां जैसी जन-अपील हासिल कर पाएंगे? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो खालिदा जिया की मास अपील को दोहराना लगभग असंभव है। वे संघर्ष,जेल और सत्ता तीनों का प्रतीक थीं। तारिक रहमान के पास अभी वह नैतिक और राजनीतिक वजन नहीं है।

राजनीतिक पंडित बता रहे 50-50 का मामला

बांग्लादेश की राजनीति पर बेहद नजदीकी से नजर रखने वाले विशेषज्ञ इस स्थिति को बीएनपी और खास कर तारिक रहमान के लिए 50-50 संभावना देखते हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि हाल ही में देश वापस लौटे तारिक रहमान के लिए ये हालात बहुत सही नहीं हैं। उन्हें नेतृत्व और पार्टी में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उनका ये भी कहना है कि खालिदा के निधन के बाद उनके बेटे तारिक रहमान को जनका का व्यापक समर्थन और सहानुभूति मिल सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि तारिक अपने पुराने समर्थकों को जोड़े रखें और हालात के हिसाब से चुनावी रणनीति बनाएं।

khlida zia son Tarique Rahman

khlida zia son Tarique Rahman

BNP के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

हिंसा की आग में झुलस रहे देश में आम चुनाव से ठीक पहले मुख्य पार्टी की कद्दावर नेता के निधन से बीएनपी और खास कर खालिदा के बेटे तारिक के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की एकता ही है। खालिदा जिया पार्टी को एक धागे में बांधे रखने वाली ताकत थीं। उनके बाद BNP में नेतृत्व को लेकर असंतोष और गुटबाजी बढ़ सकती है। अगर पार्टी अंदर से कमजोर हुई,तो चुनावी लड़ाई और कठिन हो जाएगी। इसके अलावा, तारिक रहमान को अपना कद भी साबित करना होगा। सिर्फ खालिदा जिया का बेटा होने से तारिक को स्वीकार्यता नहीं मिलेगी। उन्हें खुद को एक स्वतंत्र और मजबूत नेता के रूप में साबित करना होगा। साथ ही तारिक रहमान पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के पुराने आरोप हैं। सत्ता पक्ष इन मुद्दों को चुनाव में हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, जिससे BNP की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इसके आलावा बीएनपी को बदलते वक्त के साथ सोंचना होगा। आज युवा रोजगार,महंगाई,शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। सिर्फ राजनीतिक विरासत अब वोट दिलाने के लिए काफी नहीं है।

हालांकि तारिक के लिए मौके भी हैं

खालिदा जिया के निधन से पूरे बांग्लादेश में दुख की लहर है। लोगों की सहानुभूति तारिक और बीएनपी के प्रति है। ऐसे में बीएनपी को इस सहानुभूति का फायदा आगामी चुनाव में मिल सकता है, हालांकि इसके लिएउसे सही दिशा में काम करना होगा।
शेख हसीना

शेख हसीना

इस बार खालिदा और शेख हसीना दोनों चुनावी मैदान में नहीं

इसके अलावा,फरवरी में होने वाले आम चुनावों में पिछले तीन दशकों में पहली बार ऐसा होगा जब न तो खालिदा जिया चुनावी मैदान में होंगी और न ही शेख हसीना चुनाव लड़ेंगी। ऐसे में देश की दोनों प्रभावशाली महिलाओं के बीच की ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता भी समाप्त हो गई है। इससे वोटर नए नेतृत्व को मौका देने के बारे में सोच सकते हैं। ऐसे में अब यह आने वाले चुनाव और तारिक रहमान का नेतृत्व ही तय करेगा कि बीएनपी का क्या होगा।

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