अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों तरफ से लगातार मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं। इजरायल और अमेरिका के हमलों से ईरान में तबाही का मंजर है, उधर ईरान ने इजरायल के साथ ही मिडल ईस्ट के कई देशों पर मिसाइलें दागी हैं, ड्रोन से हमले किए हैं। इस बीच व्हाइट हाउस की तरफ से एक बड़ा दावा किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति भवन के अनुसार अमेरिका ने ईरान को संयुक्त परमाणु कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया था।
अमेरिका ने ईरान को दिया था संयुक्त असैन्य परमाणु कार्यक्रम का ऑफर
व्हाइट हाउस की तरफ से दावा किया गया है कि हमलों से पहले वॉशिंगटन ने तेहरान को एक संयुक्त असैन्य परमाणु कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने ठुकरा दिया। यह प्रस्ताव उस समय रखा गया था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं की थी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों ने 'गुड फेथ नेगोशिएशन' के तहत यह पेशकश की थी। उन्होंने बताया, प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन ढांचे को स्थायी रूप से खत्म कर दे, तो अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंध हटाने, शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ईंधन उपलब्ध कराने और अमेरिकी निवेश के साथ एक संयुक्त असैन्य परमाणु कार्यक्रम शुरू करने को तैयार था।
लेविट ने कहा, 'उन्होंने शांति के संदेश पर हामी नहीं भरी और अब वे उसके परिणाम भुगत रहे हैं।' जानकारी के मुताबिक, यह प्रस्ताव ओमान की मध्यस्थता में हुई तीन दौर की वार्ताओं से निकला था। इन बैठकों में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने अमेरिकी प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) और जेरेड कुश्नर (Jared Kushner) से मुलाकात की थी।
हालांकि, ओमान के विदेश मंत्री ने बाद में संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल की तरफ से हमले ऐसे समय हुए जब तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अभूतपूर्व रियायतों के लिए तैयार था। इससे अमेरिका से इस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और यूरेनियम संवर्धन को वह अपना संप्रभु अधिकार मानता है।
