Protest in Nepal : भारत के पड़ोसी देश नेपाल में उग्र एवं हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। लोगों की मांग है कि राजशाही का दौर फिर से लौटना चाहिए और नेपाल को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए। राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी (RPP) के बैनर तले मंगलवार को हुए मार्च एवं प्रदर्शन में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। अपनी मांगों को लेकर उद्वेलित प्रदर्शनकारी काठमांडू के प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हो गए जहां पुलिस के साथ उनकी हिंसक झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार का सहारा लेना पड़ा। पुलिस की कार्रवाई में कई लोग घायल भी हुए।
काठमांडू में मंगलवार को हुआ उग्र प्रदर्शन।
देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी है RPP
मार्च का आयोजन करने वाली संसद की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी आरपीपी ने पुलिसिया कार्रवाई के लिए डिप्टी पीएम और गृह मंत्री को निशाने पर लिया। आरपीपी ने दोनों नेताओं का इस्तीफा मांगा है। आरपीपी के मुखिया राजेंद्र लिंगदेन ने कहा कि हमने एक महीना पहले अपनी 40 सूत्रीय मांग का मसौदा सरकार को सौंपा था। हमारी प्रमुख मांग नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और राजशाही लौटाने की है। गृह मंत्री को लमिछाने या तो तुरंत इस्तीफा दें या उन्हें सरकार से बाहर निकाला जाए।
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लमिछाने के इस्तीफे की मांग
लमिछाने पहले से ही मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के निशाने पर हैं। विपक्षी पार्टी को-ऑपरेटिव घोटाले में अपनी कथित संलिप्तता पर घिरे लमिछाने से उनका इस्तीफा मांग रही है। नेपाली कांग्रेस के हंगामे की वजह से मंगलवार को संसद में कामकाज नहीं हो पाया। लमिछाने का कहना है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे।
सिंघा दरबार की तरफ बढ़े प्रदर्शनकारी
मंगलवार का प्रदर्शन का आकार काफी बड़ा था। बड़ी संख्या में प्रदर्शकारियों के सड़कों पर आने से काठमांडू की मुख्य सड़क पर भारी जाम लग गया। प्रदर्शनकारी सिंघा दरबार की तरफ बढ़े। यहां पुलिस की सख्ती बढ़ने पर लोग प्रतिबंधित इलाके में दाखिल हो गए। प्रदर्शनकारी राजशाही की वापसी और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने वाले नारे लगा रहे थे।
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संविधान बदलने की जरूरत-प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारी आंग चिरिंग लामा ने कहा कि इस देश का संविधान बदलने की जरूरत है। आरपीपी की यही प्रमुख मांग है। राजशाही की बहाली और हिंदू राष्ट्र घोषित होने पर ही नेपाल को बचाया जा सकता है।
अगर ऐसा नहीं होता है तो यह देश और बुरे हालात में चला जाएगा। लोग आगे देश का पतन होता नहीं देख सकते। देश की मौजूदा हालत देखकर ही लोग सड़कों पर उतरे हैं और आरपीपी उनका नेतृत्व कर रही है।
