सऊदी अरब द्वारा 'मक्का समझौता' (Makkah Pact) लागू करने के बाद पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू विमान यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में हिस्सा ले रहे हैं। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने गुरुवार को रिपोर्ट दी कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की द्वारा अपना त्रिपक्षीय सैन्य समझौता-जिसे 'मक्का समझौता' कहा जाता है-लागू करने के कुछ दिनों बाद, पाकिस्तान वायु सेना (PAF) ने यमन में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में भाग लिया।
हूतियों पर PAF जेट्स ने की स्ट्राइक (प्रतीकात्मक फोटो)
रिपोर्ट में कहा गया, 'पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने, जिन्होंने ऑपरेशन से जुड़े मामलों पर चर्चा करने के लिए नाम न बताने की शर्त पर बात की, बुधवार को कहा कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।'
इसमें कहा गया, 'पाकिस्तान में अमेरिकी सेना के पूर्व अटैची और डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व शीर्ष विश्लेषक कर्नल डेविड ओ. स्मिथ ने बुधवार को कहा कि हालांकि उनके पास गोपनीय आंकड़े नहीं हैं, लेकिन विश्लेषकों के बीच आम सहमति यह है कि लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिकों को सऊदी अरब भेजा गया है।'
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अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, 'उन्होंने कहा कि इन सैनिकों में पाकिस्तान वायु सेना और आर्मी एयर डिफेंस की टुकड़ी शामिल है, और संभवतः उनका इस्तेमाल तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में मदद के लिए किया जाएगा। कर्नल स्मिथ ने आगे कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों के हूती विद्रोहियों के साथ सीधे संघर्ष में शामिल होने की संभावना कम है, क्योंकि इस्लामाबाद ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने के लिए बहुत सावधानी से कदम उठा रहा है।'
पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय ने NYT की रिपोर्ट को 'फर्जी और मनगढ़ंत' बताया
रिपोर्ट में कहा , 'एक अन्य पाकिस्तानी अधिकारी ने भी नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस संघर्ष में पाकिस्तान की भूमिका यमन में जमीनी हमले के बजाय हवाई सहायता के जरिए हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल खतरों को कम करने पर केंद्रित होने की उम्मीद है। हालांकि, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने NYT की रिपोर्ट को 'फर्जी और मनगढ़ंत' बताते हुए खारिज कर दिया और इस बात से इनकार किया कि हूतियों के खिलाफ PAF के विमानों का इस्तेमाल किया गया था।
मक्का समझौता क्या है?
मक्का समझौते पर अगस्त में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। 5 अक्टूबर को, अल जजीरा और खाड़ी क्षेत्र के अन्य मीडिया आउटलेट्स ने खबर दी थी कि तीनों देश आपसी रक्षा समझौते के तहत 'रोकथाम के उपाय' (deterrence measures) लागू करने और सऊदी अरब में तेजी से सेना तैनात करने पर सहमत हुए हैं, ताकि हूती विद्रोहियों के हमलों का मुकाबला किया जा सके। हूती विद्रोही यमन की सरकार के खिलाफ अपने हमले के साथ-साथ सऊदी अरब को भी निशाना बनाते रहे हैं।
