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'डील करो, वरना हम तुम पर बम गिरा देंगे': दुनिया ने पहले भी 5 बार सुनी यह धमकी, इसके बाद क्या हुआ था?

US Iran News Hindi: ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और शांति समझौता करने के लिए 48 घंटे की समय-सीमा दी है। महाशक्तियों ने अतीत में 5 बार ऐसी धमकियां दी हैं। उसके बाद क्या?

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'डील करो, वरना हम तुम पर बम गिरा देंगे': दुनिया ने पहले भी 5 बार सुनी यह धमकी, इसके बाद क्या हुआ था?
Edited by: Nitin Arora
Updated Apr 6, 2026, 16:45 IST
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War News: 'दबाव वाली कूटनीति' (coercive diplomacy) की इस बेहद जोखिम भरी दुनिया में, महाशक्तियां अक्सर बिना पूरी तरह से युद्ध छेड़े अपने राजनीतिक लक्ष्यों को पाने के लिए बल प्रयोग की धमकी यानी 'समझौता करो, वरना बमबारी होगी', का सहारा लेती हैं। इन धमकियों के नतीजे बहुत अलग-अलग हो सकते हैं। ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत से लेकर विनाशकारी संघर्षों तक।

ऐसे में हम कुछ ऐसी घटनाओं को खोज कर लाए हैं, जहां इसी प्रकार से बम मारने की धमकी दी गई थी। रिपोर्ट में जानेंगे कि ईरान को अमेरिका की हालिया धमकी और 'समझौता करो, वरना बमबारी होगी' वाली कुछ सबसे मशहूर घटनाओं के दौरान असल में आगे हुआ क्या था?

5 बार जब महाशक्तियों ने दीं ऐसी धमकियां और जमीन पर मच गया घमासान। जानते हैं इसमें अमेरिका से लेकर ब्रिटेन, चीन और रूस जैसे देश कैसे शामिल हुए? जहां पहली धमकी ट्रंप की ही गिनते हैं। इसके बाद एक ऐसा मौका आया, जब तीन शक्तियों अमेरिका, UK, चीन ने मिलकर जापान को धमकी दी। आइए जानते हैं इसके बारे में

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को हाल की धमकी

हाल के घटनाक्रम में, तनाव 'डील या बम' की हद तक पहुंच गया है। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और 'शांति डील' करने के लिए 48 घंटे की डेडलाइन दी है, नहीं तो कहा कि पावर प्लांट और पुलों सहित उसके पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले का सामना करना पड़ेगा।

तेहरान ने इस अल्टीमेटम को 'बेबस और घबराया हुआ' बताते हुए ध्यान देने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि U.S. और इजरायली सेनाओं ने पहले ही ईरानी न्यूक्लियर, पेट्रोकेमिकल और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले शुरू कर दिए हैं, जबकि ईरान ने इलाके के टारगेट पर जवाबी कार्रवाई की है।

ट्रंप ने दी बम गिराने की धमकी

ट्रंप ने दी बम गिराने की धमकी

पॉट्सडैम घोषणा, THE POTSDAM DECLARATION (1945)

अमेरिका, ब्रिटेन और चीन ने जापान से बिना किसी शर्त के सरेंडर करने की आखिरी मांग की और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर तुरंत और पूरी तरह से तबाही हो जाएगी।

आगे क्या हुआ: जापान ने शुरू में इस घोषणा को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए, जिसके कुछ ही समय बाद जापान ने औपचारिक रूप से सरेंडर कर दिया।

क्यूबा मिसाइल संकट, THE CUBAN MISSILE CRISIS (1962)

इसे आम तौर पर सफल जबरदस्ती वाली कूटनीति का 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने क्यूबा के चारों ओर नौसेना की घेराबंदी (एक 'क्वारंटाइन') का आदेश दिया और सोवियत संघ से मांग की कि वह अपनी परमाणु मिसाइलें हटा ले, वरना उसे सीधे सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

आगे क्या हुआ: एक समझौता हुआ। सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने मिसाइलों को हटाने पर सहमति जताई। इसके बदले में अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से यह वादा किया कि वह कभी क्यूबा पर हमला नहीं करेगा और एक गुप्त समझौता किया जिसके तहत तुर्की से अमेरिकी मिसाइलें हटा ली जाएंगी।

ट्रंप बिना बम गिराए कर पाएंगे डील?

ट्रंप बिना बम गिराए कर पाएंगे डील?

बाल्कन, THE BALKANS (1995 and 1999)

NATO ने सर्बियाई नेताओं को अल्टीमेटम दिया। हवाई हमलों की धमकी देते हुए कहा कि वे बोस्निया और बाद में कोसोवो में जातीय भेदभाव और मिलिट्री ऑपरेशन बंद करें।

आगे क्या हुआ: 1995 में, एक सीमित बमबारी अभियान (ऑपरेशन डेलिबरेट फोर्स) के बाद, सर्बियाई नेता डेटन शांति समझौते पर सहमत हुए। 1999 में, स्लोबोदान मिलोसेविक को आखिरकार शांति योजना स्वीकार करने में 78 दिन का बमबारी अभियान (ऑपरेशन एलाइड फोर्स) लगा।

रूस का NATO को अल्टीमेटम, RUSSIA’S ULTIMATUM TO NATO (2021–2022)

रूस ने मांगों की एक लिस्ट जारी की, जिसमें यूक्रेन के NATO में शामिल होने पर परमानेंट बैन और पूर्वी यूरोप से NATO सैनिकों को हटाना शामिल था। इसके लिए रूस ने बड़ा मिलिट्री हमला करने की धमकी दी थी।

आगे क्या हुआ: NATO और US ने मुख्य मांगों को खारिज कर दिया, और इसके बजाय ट्रांसपेरेंसी मैकेनिज्म की पेशकश की। रूस ने इन काउंटर-प्रपोजल को नॉन-कंस्ट्रक्टिव बताकर खारिज कर दिया और फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला कर दिया।

कुछ सवाल, जिनके उत्तर आपको पता होने चाहिए

'डील करो, वरना हम तुम पर बम गिरा देंगे' का संदर्भ किससे है?

क्यूबा मिसाइल संकट और खाड़ी युद्ध।

किन नेताओं ने इस तरह की जबरदस्ती वाली धमकियों का इस्तेमाल किया था?

जॉन एफ. केनेडी, जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश, सद्दाम हुसैन।

इस तरह की धमकियों का क्या नतीजा निकला?

बातचीत के जरिए तनाव कम करना (क्यूबा)। कूटनीति विफल होने पर सैन्य हस्तक्षेप (इराक)।

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