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Israel vs Hamas: तीन इजरायली बंधकों को आज रिहा करेगा हमास, 369 फिलिस्तीनी कैदियों को भी इजरायल की जेल से मिलेगी आजादी

World News: इजरायल और हमास के बीच हुए समझौते की कड़ी में आज हमास तीन इजरायली बंधकों को रिहा करेगा, जबकि 369 फिलिस्तीनी कैदियों को इजरायल रिहा करेगा। बंधक-कैदी अदला-बदली का ये छठा दौर होगा। एक दिन पहले हमास आतंकवादी समूह ने तीन पुरुष बंधकों के नाम बताया, जिन्हें गाजा युद्ध विराम समझौते के तहत आज रिहा कर दिया जाएगा।

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आज रिहा हो जाएंगे 369 फिलिस्तीनी कैदी और तीन इजरायली बंधक।

Israel-Hamas Ceasefire Agreement: गाजा युद्ध विराम समझौते के तहत इजरायल और हमास आज बंधक-कैदी अदला-बदली करेंगे। 369 फिलिस्तीनी कैदियों को इजरायल की जेल से आजादी मिलेगी, तो वहीं हमास भी आज तीन इजरायली बंधकों को रिहा करेगा। अदला-बदली का छठा दौर होगा। इससे एक दिन पहले हमास आतंकवादी समूह ने तीन पुरुष बंधकों के नाम बताए, जिन्हें गाजा युद्ध विराम समझौते के तहत आज को रिहा किया जाएगा। जिसके बाद इजरायल ने पुष्टि की कि उसे तीन बंधकों की सूची मिली है, जिन्हें गाजा पट्टी में हमास की कैद से शनिवार को रिहा किया जाएगा।

इन तीन इजरायली बंधकों को रिहा करेगा हमास

  1. साशा ट्रोफानोव (29)
  2. सागुई डेकेल-चेन (36)
  3. यायर हॉर्न (46)

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने शुरू में कहा था कि यह सूची "इजरायल को स्वीकार्य है", लेकिन बाद में नेतन्याहू के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इजरायल को केवल सूची प्राप्त हुई है। प्रवक्ता ने कहा, "यह पूरी तरह से तथ्यात्मक विवरण है और इस मामले पर इजरायल की किसी भी स्थिति को नहीं दर्शाता है।" यह सूची कतर और मिस्र के मध्यस्थों के माध्यम से इजरायल को सौंपी गई।

हमास की सैन्य शाखा अल-कस्साम ब्रिगेड्स के एक बयान के अनुसार, बंधकों में 29 वर्षीय इजरायली-रूसी नागरिक अलेक्जेंडर (साशा) ट्रोफानोव, 36 वर्षीय इजरायली-अमेरिकी नागरिक सागुई डेकेल-चेन और 46 वर्षीय इजरायली यायर हॉर्न शामिल हैं।

333 फिलिस्तीनी कैदियों को गाजा वापस भेजा जाएगा

समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि शनिवार को 369 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाएगा। उनमें से 333 को गाजा वापस भेजा जाएगा, 10 अन्य को वेस्ट बैंक में उनके घरों में वापस भेजा जाएगा और एक को पूर्वी यरूशलम में रिहा किया जाएगा, जबकि आजीवन कारावास की सजा पाए, बाकी 25 कैदियों को या तो गाजा भेजा जाएगा या मिस्र के जरिए विदेश भेजा जाएगा।

बीते 19 जनवरी को लागू हुए युद्धविराम समझौते के तहत यह इजरायल और हमास के बीच कैदियों के आदान-प्रदान का छठा बैच होगा। यह रिहाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चेतावनी दिए जाने के बाद बढ़े तनाव के बीच हुई है कि यदि शनिवार दोपहर तक गाजा में "सभी बंधकों" को मुक्त नहीं किया गया, तो युद्धविराम रद्द कर दिया जाएगा। नेतन्याहू और इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने चेतावनी दोहराते हुए कहा कि इजरायल गाजा पर अपना हमला फिर से शुरू कर देगा।

हमास ने सोमवार को घोषणा की कि वह शनिवार को निर्धारित बंधकों की रिहाई में देरी करेगा, क्योंकि इजरायल ने समझौते का उल्लंघन किया है और इजरायल से युद्धविराम बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि करने की मांग की है।

अब तक कितने बंधकों और कैदियों को कराया गया मुक्त

19 जनवरी को युद्ध विराम शुरू होने के बाद से दोनों पक्षों ने पांच बार बंधक-कैदी अदला-बदली की है। युद्ध विराम के पहले चरण के दौरान अब तक 21 बंधकों और 730 से अधिक फिलिस्तीनी कैदियों को मुक्त कराया गया है।

हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला करके 251 बंधकों को पकड़ लिया और लगभग 1,200 लोगों को मार डाला था जिसके बाद युद्ध शुरू हो गया। गाजा के हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल के हमले में कम से कम 48,239 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इजरायल के हमलों से गाजा की लगभग दो-तिहाई इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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