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'1945 का फॉर्मूला 2026 में नहीं चलेगा', UNSC में भारत का प्रचंड प्रहार, आतंकवाद पर पाकिस्तान-चीन को बुरी तरह धोया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की कार्यवाहक राजदूत योजना पटेल ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में पारदर्शिता की मांग की है। भारत ने साफ कहा कि सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल आतंकवादियों को बचाने या राजनीतिक फायदे के लिए नहीं होना चाहिए।

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संयुक्त राष्ट्र में गूंजी भारत की आवाज (फाइल फोटो)

Photo : PTI

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज बुलंद की है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सुरक्षा परिषद जैसे शक्तिशाली मंच का इस्तेमाल राजनीतिक हित साधने या आतंकवादियों को बचाने के लिए बिल्कुल नहीं होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने परिषद की बैठकों और प्रतिबंध व्यवस्थाओं में पूरी तरह से पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने पर जोर दिया।

योजना पटेल ने चिंता जताते हुए कहा कि कई बार सुरक्षा परिषद की सदस्यता का फायदा उठाकर आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट से बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है। ऐसा करके उन अपराधियों को सामाजिक और राजनीतिक वैधता देने की कोशिश होती है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, बिना किसी पुख्ता सबूत या दस्तावेजों के महज राजनीतिक सोच के आधार पर किसी संस्था को निशाना बनाना या बचाना भी पूरी तरह गलत है।

'छिपा हुआ वीटो'

भारत लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि UNSC की '1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति' जैसी संस्थाओं में फैसले बंद कमरों में और अपारदर्शी तरीके से लिए जाते हैं। जब किसी आतंकी को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को बिना कोई ठोस वजह बताए रोक दिया जाता है, तो यह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को कमजोर करता है। भारत ने इसे 'छिपा हुआ वीटो' करार दिया है। इसके साथ ही, भारत ने सुरक्षा परिषद के सहायक निकायों के अध्यक्षों के चयन में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई।

80 साल पुराने ढांचे पर उठाए सवाल

साल के कई महीने बीत जाने के बाद भी अध्यक्ष तय न होना इन संस्थाओं के काम को प्रभावित करता है। डेनमार्क ने भी भारत के इस रुख का समर्थन किया है। अंत में, भारत ने 1945 में बने सुरक्षा परिषद के 80 साल पुराने ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। अब यूएन के सदस्यों की संख्या चार गुना बढ़ गई है। इसलिए, वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यता का विस्तार तथा व्यापक सुधार होना बेहद जरूरी है।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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