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पायलट को बचाने वाले मिशन में CIA-इजराइल की भी है खास भूमिका, ईरान को ऐसे दिया 'चकमा'

युद्ध के दौरान जब कोई पायलट दुश्मन के इलाके में फंस जाता है तो या किसी वजहों से पीछे छूट जाता है तो उसे निकालना बहुत बड़ी चुनौती होती है। युद्ध की योजना बनाने वाले के सामने चुनौती आ जाती है कि उस पायलट को सुरक्षित वहां से निकाले कैसें। वह कहां पर है, किन हालातों में है, वहां का मौसम कैसा है।

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यूएस ने ईरान से अपने पायलट का रेस्क्यू किया। तस्वीर-@USSOCCENT
Written by: Alok Rao
Updated Apr 7, 2026, 08:56 IST

CIA and Israel role in rescuing pilot from Iran: बात अपने पायलट को बचाने के लिए अमेरिका द्वारा ईरान में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन की। 'असंभव को संभव' बनाने वाले इस मिशन की तारीफ दुनिया भर में हो रही है। यह एक तरह का मिशन इम्पॉसिबल था जिसे यूएस ने कर दिखाया। दुश्मन की टेरिटरी में घुसकर अपने पायलट को सुरक्षित निकालने वाले इस मिशन की तारीफ दुनिया भर में हो रही है। यह बहुत ही हाई रिस्क ऑपरेशन था। दुश्मन के अत्यंत दुर्गम एवं कठिन इलाके में जाकर ऑपरेशन चलाना आसान काम नहीं होता, वह भी तब जब आपके दुश्मन को पहले से पता हो कि आपका एक पायलट उसके इलाके में है और आप उसे निकालने के लिए ऑपरेशन चलाएंगे।

सबसे पहले खुफिया जानकारी एकत्र करते हैं रणनीतिकार

युद्ध के दौरान जब कोई पायलट दुश्मन के इलाके में फंस जाता है तो या किसी वजहों से पीछे छूट जाता है तो उसे निकालना बहुत बड़ी चुनौती होती है। युद्ध की योजना बनाने वाले के सामने चुनौती आ जाती है कि उस पायलट को सुरक्षित वहां से निकाले कैसें। वह कहां पर है, किन हालातों में है, वहां का मौसम कैसा है, दुश्मन की वहां पर मौजूदगी किस तरह की है। तत्काल ये सारी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इस तरह के हालात जब बनते हैं तो रणनीतिकार सबसे पहले उस इलाके की खुफिया जानकारी जुटाते हैं, उस जगह के बारे में पता करते हैं कि पायलट कहां पर हो सकता है, वहां का मौसम कैसा है और दुश्मन वहां से कितनी दूरी पर है। ऑपरेशन यदि शुरू होता है तो वह किस तरह से इसमें रूकावट बन सकता है या हमला कर सकता है। इस पूरे ऑपरेशन में कितनी तरह की जोखिम हो सकती है, इस पूरी बात का आकलन किया जाता है।

इजराइल ने ईरान में अपने हमले रोक दिए

इस ऑपरेशन को शुरू करने के लिए अमेरिका के पास ज्यादा वक्त नहीं था। उसे जल्द से जल्द ईरान के अंदरूनी इलाके में दाखिल होकर ऑपरेशन को सफलता को अंजाम देना था। उसने सभी हालातों का जायजा लेने के बाद कॉम्बैट सर्च एंड रिस्क्यूक टास्क फोर्स (CSARTF) लॉन्च कर दिया। आगे क्या हुआ यह सब आपको पता है लेकिन यूएस के इस मिशन की सफलता बहुत कुछ इजराइल के दी गई खुफिया जानकारी पर निर्भर करती है। रिपोर्टों के मुताबिक इस ऑपरेशन के लिए इजराइल ने जो खुफिया जानकारी यूएस को दी वह बहुत ही उपयोगी साबित हुईं।

US Army

US Army

इजराइल जो कि इन दिनों ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर हमले कर रहा है, पायलट के ईरान में फंसने की रिपोर्ट आने के बाद उसने अपने हमले को रोक दिया। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह नहीं चाहता था कि इससे रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की दिक्कत आए। CNN की रिपोर्ट में इजराइल के दो अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस मिशन के लिए उनके देश ने अमेरिका को इंटेलिजेंस रिपोर्ट मुहैय्या कराई। इजराइल की खुफिया रिपोर्ट और अमेरिका की अपनी सूचनाओं के बाद अमेरिका की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी CIA ने पायलट की संभावित लोकेशन का पता लगाया।

CIA ने अपनी प्रोपगैंडा मिशनरी सक्रिय कर दी

अमेरिकी सेना के रणनीतिकार जब मिशन की तैयारी कर रहे थे, उसी समय CIA ने अपनी प्रोपगैंडा मिशनरी को सक्रिय कर दिया। संभावित मिशन की तैयारी के साथ CIA को अपना काम कैसा करना है, उसका भी खाका तैयार होने लगा। अमेरिकी खुफिया विभाग के ऑपरेटिव ने ईरान में खबर फैलानी शुरू कर दी कि F-15 ई के दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें बचा लिया गया है। ऐसा उसने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी ऑर्म्ड फोर्सेज यानी IRCG को भ्रमित और उनका ध्यान भटकाने के लिए किया। अमेरिका को जब यह लग गया कि ऑपरेशन शुरू करने का वक्त आ गया है तो उसने स्पेशल ऑपरेशन के फोर्स उस दुर्गम पहाड़ी इलाके में पहुंच गए जहां पायलट छिपा हुआ था। वहां पहुंचते ही अमेरिकी वायु सेना के विमानों ने इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए उन सभी जगहों पर भारी बमबारी की जहां से आईआरजीसी, ईरान के सुरक्षाबल या उनके स्थानीय लड़ाके आ सकते थे।

US Army

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क्षतिग्रस्त हुए विमानों का यूएस ने नष्ट किया-रिपोर्ट

ईरान में ही ऑपरेशन वाली जगह से कुछ दूरी पर अमेरिका के दो MC-130J परिवहन विमान उतरे थे। यह हवाईपट्टी ईरान की ही थी जो एक तरह से बंद पड़ी थी। ये दोनों विमान स्पेशल कमांडो और पायलट को वापस ले जाने का इंतजार कर रहे थे लेकिन बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान वे थोड़े क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद यह फैसला हुआ कि क्षतिग्रस्त हुए विमानों को वहीं छोड़ जाएगा और वहां से निकलने के लिए नए विमान भेजे जाएंगे। अमेरिका का दावा है कि उसने खुद ही क्षतिग्रस्त हुए अपने विमानों को नष्ट कर दिया। नष्ट विमानों की तस्वीरें भी मीडिया में सामने आई हैं। अमेरिका नहीं चाहता था कि उसके विमान किसी तरह से ईरान के हाथों में पड़े। इसलिए उसने इन्हें बमों से उड़ा दिया।

US की पेशेवर सेना ने किया असंभव जैसा काम

ईरान की धरती पर पायलट के होने की खबर अमेरिका के लिए बहुत ही परेशान करने वाली थी। खबर सुनते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेचैन हो उठे। शुक्रवार का अपना पूरा दिन उन्होंने वेस्ट विंग में बिताया। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार मिशन के बारे में हर पल का अपडेट जानने के लिए वह व्हाइट हाउस के डाइनिंग रूम से ओवल ऑफिस के बीच आना-जाना करते रहे। शनिवार को उन्होंने अपना पसंदीदा खेल गोल्फ भी नहीं खेला। वह व्हाइट में रहकर ऑपरेशन के बारे में जानकारी लेते रहे। यही नहीं, इस पूरे ऑपरेशन को उन्होंने सिचुएशन रूम में बैठकर देखा। इस ऑपरेशन से अमेरिकी वायु सेना के पायलटों को यह साफ संदेश गया कि उनकी फौज और सरकार उन्हें पीछे नहीं छोड़ेगी। किसी भी कीमत पर उन्हें छुड़ाकर लाएगी। चाहे उसके लिए उसे कितने भी लोगों, एयरक्रॉफ्ट को दुश्मन के इलाके में भेजना पड़े। कुल मिलाकर यूएस का यह ऑपरेशन शानदार और लाजवाब है। अमेरिकी सेना पेशेवर है। इसमें कोई संदेह नहीं है। उसकी तारीफ बनती है।

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