US Iran Peace Deal: पीस डील पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत क्या अटक गई है? हम यह बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि हम पीस डील के बेहद करीब है और जल्द ही इसकी बारे में कोई घोषणा हो सकती है लेकिन इस बातचीत के बीच हमले हो जाते हैं। अमेरिका, ईरान के ठिकानों पर हमले कर देता है और ईरान, कुवैत, बहरीन की ओर अपनी मिसाइलें, ड्रोन दाग देता है, फिर दोनों देश एक दूसरे को धमकियां देते हैं। लेबनान में इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने बातचीत सस्पेंड करने की बात कही तो ट्रंप ने कहा कि पीस डील पर बातचीत तेज गति से चल रही है और बहुत अच्छी बातचीत हुई है।
मोजतबा खामनेई के सैन्य सलाहकार का बयान
शनिवार तड़के भी हमले हुए। हमले और बातचीत के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने बयान दिया है। उनका बयान बताता है कि दोनों मुल्कों के बीच आखिर चल क्या रहा है। रेजाई ने तेहरान में CNN को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि पीस डील चाहिए या युद्ध, यह यूएस को तय करना है। बॉल अब ट्रंप के कोर्ट में है।
पहले फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करे यूएस-ईरान
इस एक्सक्लूसिव बातचीत में रेजाई ने यह भी कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित पीस डील संभव है और यह तभी संभव है जब अमेरिका उसकी जब्त की गई संपत्तियों जो कि 24 अरब डॉलर की हैं उसे रिलीज करे। रेजाई का कहना है कि अभी पीस डील पर गतिरोध बन गया है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस डेडलॉक को जरूर तोड़ना चाहिए। यही नहीं ईरान चाहता है कि पीस डील पर शुरुआती सहमति बनते ही जब्त की गई संपत्तियों की आधी रकम यानी 24 अरब डॉलर में से 12 अरब डॉलर अमेरिका को रिलीज करनी होगी। बाकी 12 अरब डॉलर बाद में उसे देना होगा। रेजाई का कहना है कि ट्रंप तेहरान को यदि भरोसे में लेना चाहते हैं, यदि वह चाहते हैं कि ईरान उन पर भरोसा करे तो उन्हें फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करना होगा। यह अमेरिका का पहला टेस्ट है जिसमें उसे पास होना चाहिए।
Mojtaba Khamnei
ट्रंप के लिए गले की फांस बन गई है शर्त
जाहिर है कि पीस डील पर आगे बढ़ने को लेकर ईरान ने अपने पत्ते साफ कर दिए हैं। पीस डील पर आगे बढ़ना है तो ट्रंप को उसकी यह शर्त माननी होगी। यानी पीस डील के भविष्य को ईरान ने ट्रंप पर छोड़ दिया है। एक्सपर्ट इसे ईरान का मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं। ईरान की यह शर्त डील के लिए छटपटा रहे ट्रंप के लिए गले की फांस बन गई है। वह पसोपेश में पड़ गए हैं कि आखिर क्या करें। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि जब्त संपत्तियों को रिलीज करने पर ईरानी रिजीम पर जो एक तरह का दबाव और लेवरेज है, वह कम हो जाएगा या हट जाएगा। दूसरा, ईरान को आर्थिक मुआवजा देने को लेकर ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर तीखे हमले और उनकी कड़ी आलोचना कर चुके हैं।
शर्त मानने पर डेमोक्रेट्स घेरना शुरू करेंगे
अब वह यदि ईरान की जब्त संपत्तियों को रिलीज करने का फैसला करते हैं तो उनकी भद्द पिटनी शुरू हो जाएगी क्योंकि वह कई बार शेखी बघार चुके हैं कि देखो ओबामा ने अमेरिकी खजाने को ईरान पर लुटाया और एक मैं हूं जिसने उसकी नौसेना, वायु सेना बर्बाद कर दी, उसके पूरे लीडरशिप को खत्म कर दिया। ऐसे में ईरान की जब्त संपत्तियों को रिलीज करने का फैसला यदि वह करते हैं तो जाहिर तौर पर उनकी थू-थू होगी। डेमोक्रेट्स उन्हें घेरना और ट्रोल करना शुरू कर देंगे। आर्थिक मुआवजे को लेकर ओबामा को बुरा-भला यदि नहीं बोले होते तो ईरान की फ्रीज संपत्तियों पर निर्णय करना उनके लिए ज्यादा आसान होता लेकिन अब यही बयानबाजी उनके लिए मुसीबत बन गई है।
...तो युद्ध का दायरा बढ़ा देगा ईरान!
दूसरा, इस इंटरव्यू में रेजाई ने जो एक और बड़ी बात कही है वह, यह है कि अमेरिका यदि आगे ईरान पर हमला करता है तो ईरान की तरफ से होने वाली जवाबी कार्रवाई काफी भीषण होगी। युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए वह इसे पर्शियन गल्फ से बाहर ले जाएगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, हिंद महासागर, बॉब अल मंडेब, लाल सागर से लेकर मेडिटेरिनियन सी तक वह युद्ध का मोर्चा खोल देगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि रेजाई का यह बयान, ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े करता है, क्योंकि ट्रंप बार-बार दावा कर चुके हैं कि अपने हवाई हमलों में उन्होंने ईरान की वायु सेना, नौसेना और उसकी सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। सवाल है कि ईरान की सैन्य क्षमताएं यदि पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं तो वह कुवैत, बहरीन और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कैसे कर पा रहा है। असलियत क्या है यह चीज पूरी दुनिया को दिख रही है।
Donald Trump
मोजतबा से मिलने की ट्रंप ने जताई है इच्छा
अपनी एक और बात से ट्रंप ने दुनिया को चौंकाया है। उन्होंने कहा है कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई से मिलना चाहते हैं। ट्रंप की इस ख्वाईश पर भी रेजाई ने जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा नहीं होगा। रेजाई ने मुलाकात की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि अभी हम वार्ता के शुरुआती दौर में हैं और ट्रंप की वजह से वार्ता पर गतिरोध बन गया है। कुल मिलाकर, रेजाई के इस इंटरव्यू से यह पता चलता है कि पीस डील और युद्ध को लेकर ईरान की रिजीम क्या सोच रही है। पीस डील पर वार्ता यदि आगे नहीं बढ़ पा रही है तो दिक्कत और गतिरोध कहां है। रेजाई ने अपने इस इंटरव्यू के जरिए ईरान का रुख सामने रखा है। अब ट्रंप प्रशासन का रवैया क्या रहता है, यह देखने वाली बात होगी।
