ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो (British MP Rupert Lowe) ने व्यवस्थित यौन शोषण, हिंसा, डराने-धमकाने, नस्लीय रूप से निशाना बनाने और पुलिस की कथित मनमानी के रोंगटे खड़े कर देने वाले ब्योरे पढ़कर सुनाए, साथ ही यह भी आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारियों,स्वास्थ्यकर्मियों और बच्चों के घरों के कर्मचारियों ने बार-बार कमजोर बच्चों की सुरक्षा करने में लापरवाही बरती।
ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो ने बताए रोंगटे खड़े करने वाले वाकये (फाइल फोटो: Facebook/istock)
ब्रिटिश सांसद ने संसद में एक भावुक भाषण देकर UK के 'ग्रूमिंग गैंग्स' (Grooming Gangs) पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। इस भाषण में उन्होंने पीड़ितों के बयान पढ़कर सुनाए। उन्होंने संसद को बताया कि दुनिया को यह सुनना चाहिए कि हमारे स्वतंत्र 'रेप गैंग' जांच की दो हफ्तों की सुनवाई के दौरान क्या-क्या बातें सामने आईं; उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी जांच की जरूरत कभी पड़नी ही नहीं चाहिए थी। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इन बहादुर पीड़ितों के बयानों को सुनें और आखिरकार इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएं।
सुनियोजित यौन शोषण, हिंसा, डराने-धमकाने, नस्लीय भेदभाव
अपने भाषण में, लो ने सुनियोजित यौन शोषण, हिंसा, डराने-धमकाने, नस्लीय भेदभाव और पुलिस की कथित लापरवाही के दिल दहला देने वाले किस्से पढ़कर सुनाए। इसके साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकारी अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी और बच्चों के घरों (चिल्ड्रन्स होम) का स्टाफ, कमजोर और बेसहारा बच्चों की सुरक्षा करने में बार-बार नाकाम रहा।
'मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के पुरुष शामिल थे'
ये गवाहियां बच्चों के साथ होने वाले सामूहिक यौन शोषण की एक स्वतंत्र जांच के दौरान इकट्ठा की गई थीं। इस प्रयास से जुड़ी सामग्री के अनुसार, पिछले साल उनके नेतृत्व में की गई एक निजी जांच में पूरे UK के कम से कम 85 इलाकों में 'गिरोह-आधारित बाल यौन शोषण' (Gang-based Child Sexual Exploitation) की पहचान की गई थी। पिछले साल अगस्त में लो द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था कि 'बलात्कार करने वाले गिरोह' जिनमें मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल (Pakistani Heritage) के पुरुष शामिल थे और दशकों से सक्रिय थे और वे जितना सोचा गया था, उससे कहीं ज़्यादा बड़े पैमाने पर फैले हुए थे। इसमें आगे कहा गया है कि 'मुख्य रूप से पाकिस्तानी पुरुषों से जुड़े पैटर्न, और साथ ही सार्वजनिक निकायों की घोर लापरवाही, स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकते हैं।'
दुर्व्यवहार और शोषण की दिल दहला देने वाली दास्तानें
लो ने जिन मामलों का जिक्र किया, उनमें से एक में एक पीड़ित ने बताया, 'उन आदमियों ने मुझे जबरदस्ती नीचे दबाए रखा, और फिर एक-एक करके उन्होंने मेरे साथ रेप किया; जब यह हमला खत्म हुआ, तो उन आदमियों ने मुझे बार-बार पीटा और धमकी दी कि अगर मैंने किसी को भी बताया कि मेरे साथ क्या हुआ है, तो वे मुझे ढूंढ़ निकालेंगे, मुझे जान से मार देंगे, और मेरे प्रियजनों को भी नुकसान पहुंचाएंगे।'
'कुछ पुरुष मुस्लिम लड़कियों को ज़्यादा गरिमा और ऊंचे नैतिक मूल्यों वाला बताते थे'
लो ने उन गवाहियों का भी जिक्र किया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ अपराधियों ने पीड़ितों को नीचा दिखाने, उन्हें अलग-थलग करने और उन पर अपना नियंत्रण जमाने के लिए उनकी जाति और धर्म का इस्तेमाल किया। जांच की सुनवाई के दौरान एक पीड़ित ने बताया-'लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं, जिनसे यह जाहिर होता था कि गोरी लड़कियों यानी ईसाई लड़कियों को कम नैतिक या कम मूल्यों वाला माना जाता था; जबकि कुछ पुरुष मुस्लिम लड़कियों को ज़्यादा गरिमा और ऊंचे नैतिक मूल्यों वाला बताते थे। इन तुलनाओं का इस्तेमाल मेरे साथ किए गए बर्ताव को सही ठहराने और मुझे और ज़्यादा अपमानित करने तथा मुझ पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए किया जाता था।'
एक और गवाही में बताया गया कि किस तरह उत्पीड़न के दौरान पीड़ित के ईसाई धर्म का कथित तौर पर मज़ाक उड़ाया गया। 'धर्म से जुड़ा मेरा मुख्य टकराव यह था कि मैं एक ईसाई के तौर पर बड़ी हुई थी। मैं हमेशा अपना क्रॉस पहनती थी, क्योंकि वह मेरे लिए बहुत खास था। लेकिन, उन्होंने इसका इस्तेमाल मुझे मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया।'
पीड़ितों के बयानों में पुलिस पर आरोप
ब्रिटिश सांसद ने एक महिला का भी जिक्र किया, जिसने आरोप लगाया कि उस पर हमला करने वालों में से कुछ पुलिस अधिकारी थे। गवाही में कहा गया, 'इस पूरे उत्पीड़न के दौरान, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा रेप किया।'
अन्य बयानों में उत्पीड़न के बड़े पैमाने और पीड़ितों के अनुसार, संस्थाओं की ओर से दखल न देने की नाकामियों का ज़िक्र किया गया। एक गवाही में कहा गया- 'यह तब शुरू हुआ जब मैं 13 साल की थी। तीन सालों में, शायद करीब छह या सात सौ अलग-अलग पुरुषों ने मेरा रेप किया।'
'ईद और छुट्टियों के आस-पास हालात और बिगड़ जाते थे'
एक और गवाही में, एक सर्वाइवर ने कहा- 'ईद और छुट्टियों के आस-पास हालात और बिगड़ जाते थे। पार्टियां बड़ी हो जाती थीं, हालात और खराब हो जाते थे, और ज़्यादा हिंसा होती थी। ज़्यादा लोग शामिल होते थे, ज़्यादा लड़कियां शामिल होती थीं। पार्टियां बस और बड़ी हो जाती थीं।'
'15-20 महिलाओं को पिंजरों में बंद देखा'
लो ने कहा कि यह बयान जांच के दौरान पेश की गई सबसे परेशान करने वाली गवाहियों में से एक था। उन्होंने एक महिला की गवाही का भी जिक्र किया, जिसने आरोप लगाया कि उसने 15-20 महिलाओं को पिंजरों में बंद देखा था और बताया कि उनके साथ किस हद तक दुर्व्यवहार किया गया था।
'उस आदमी ने बस मेरा चेहरा पकड़ रखा था...'
'मेरे आस-पास कुछ आदमी थे-वे न तो डरे हुए थे, न ही उन्हें कोई घिन आ रही थी, और न ही वे मेरी मदद कर रहे थे; बल्कि वे तो वीडियो बना रहे थे और हंस रहे थे उस आदमी ने बस मेरा चेहरा पकड़ रखा था, मेरी आंखों में सीधे घूर रहा था, और वह मुझे टूटते हुए देखना चाहता था। और उसने मुझे टूटते हुए देखा भी,' एक और पीड़ित ने बताया।
'किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसा न हो...'
लो ने गवाहियों की इस कड़ी को, एक पीड़ित की ओर से कार्रवाई की अपील के साथ समाप्त किया। गवाही में कहा गया, 'मैं बस यही चाहता था कि यह सब रुक जाए और किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसा न हो; और लोग सचमुच कोई कदम उठाएं, कुछ करें और डरना छोड़ दें। मैं तो घंटों तक बोलता रह सकता हूं।'
