Father Son Viral Story: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सिविक सेंस और पैरेंटिंग (Civic Sense Parenting) को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। इस वीडियो को ट्रैवल व्लॉगर दीपक समल ने शेयर किया है। उन्होंने अपने दो साल के बेटे के साथ ट्रेन में हुई एक छोटी-सी घटना को एक बड़ी सीख में बदल दिया। दीपक अपने बेटे के साथ ट्रेन से सफर कर रहे थे। खिड़की के बाहर भारत के सुंदर नजारे दिखाई दे रहे थे। डिब्बा साफ-सुथरा और शांत था। चारों तरफ व्यवस्था (Train Cleanliness Awareness) देखकर उन्हें अच्छा लग रहा था। यात्रा आरामदायक थी। इसी दौरान उनका दो साल का बेटा खेलते-खेलते चिप्स खाने लगा और कुछ टुकड़े फर्श पर गिरा दिए। यह एक छोटी-सी बात थी। दीपक चाहते तो तुरंत झुककर खुद ही चिप्स उठा सकते थे।
ट्रेन में पिता ने बेटे को सिखाई जिम्मेदारी (फोटो: Instagram/travelwithsamalvlogs)
बच्चे से उठवाये गिरे हुए चिप्स
इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता और किसी को पता भी नहीं चलता, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने सोचा कि अगर वह हर बार बच्चे की गलती खुद सुधार देंगे, तो बच्चा जिम्मेदारी कैसे सीखेगा? इसलिए उन्होंने अपने बेटे को प्यार से रोका और पूछा, "इसे कौन साफ करेगा?" बेटा उन्हें देखने लगा। वह छोटा था, इसलिए तुरंत जवाब नहीं दे पाया। तब दीपक ने उसे समझाया, "यह हमारा घर नहीं है, लेकिन यह भी हमारी जगह है। यह ट्रेन सबकी है। अगर हम गंदगी (Positive Parenting Story) करेंगे, तो किसी और को साफ करना पड़ेगा।" बच्चा कुछ पल चुप रहा।
फिर वह धीरे-धीरे नीचे झुका और अपने छोटे हाथों से चिप्स के टुकड़े उठाने लगा। दीपक ने उसे डांटा नहीं, बस समझाया। इस छोटी-सी घटना में एक बड़ी सीख छिपी थी। साफ-सफाई केवल (train latest viral video) नियमों से नहीं सिखाई जा सकती। नागरिक जिम्मेदारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों से बनती है। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। हर दिन लाखों लोग Indian Railways से यात्रा करते हैं। ट्रेनों को साफ रखना केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। यह वीडियो याद दिलाता है कि बड़ी सीख अक्सर छोटे पलों में ही छिपी होती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
