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जब कैलाश की पवित्रता के सामने झुका सुपरहीरो, रेनहोल्ड मेसनर की दिलचस्प कहानी

रेनहोल्ड मेसनर पहले इंसान थे जिन्होंने दुनिया के सभी 14 ऐसे पर्वत जो 8,000 मीटर से ऊंचे हैं की चोटियां चढ़ी। दुनिया की सबसे ऊंची और खतरनाक चट्टानी दीवार नंगा परबत की चुनौती को स्वीकार किया इसके अलावा बिना सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर अकेले ही चढ़ाई की। लेकिन, उन्होंने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने से मना कर दिया था जिसका कारण आपको जरूर जानना चाहिए।

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पहाड़ों का सुपरहीरो

अगर तुम्हें एडवेंचर का क्रेज है, तो संभावना कम ही है कि तुमने रेनहोल्ड मेसनर का नाम ना सुना हो। उनके साहस की मिसाल इस बात से समझ सकते हैं कि बड़े पर्वतारोही उन्हें खत लिखकर चेतावनी देते थे कि-तुम पागल हो, शायद कुछ ही दिन जियोगे। दुनिया में 14 ऐसे पर्वत हैं जो 8,000 मीटर से ऊंचे हैं, और इटली में जन्मे रेनहोल्ड मेसनर पहले इंसान थे जिन्होंने इन सभी चोटियों पर चढ़ाई की है जिसमें एवरेस्ट, K2 और कई खतरनाक पर्वत शामिल हैं।

रेनहोल्ड मेसनर बचपन से ही पहाड़ों के बीच पले‑बढ़े थे। वे 10 बच्चों वाले परिवार में साउथ टायरोल इलाके में बड़े हुए, जो ऑस्ट्रिया और इटली के बीच का पहाड़ी इलाका है। उनका छोटा भाई गुनथर मेसनर भी चढ़ाई में उनका साथ देता था। उनका गांव विल्नॉस वैली खूबसूरत डोलोमाइट पहाड़ों से घिरा हुआ था। पहाड़ उनके बचपन का सबसे बड़ा हिस्सा थे। कहते हैं कि रेनहोल्ड ने तो सिर्फ 5 साल की उम्र में 1000 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ाई कर ली थी।

रेनहोल्ड मेसनर की दिलचस्प कहानी

रेनहोल्ड मेसनर की दिलचस्प कहानी

नंगा परबत की चुनौती

नंगा परबत, जो दुनिया की सबसे ऊंची और खतरनाक चट्टानी दीवार मानी जाती है, उसे चढ़कर रेनहोल्ड मेसनर ने सबको हैरान कर दिया था। ये कोई आम चढ़ाई नहीं थी बल्कि साहस, धैर्य और जुनून का असली टेस्ट था। 1970 में उन्हें इस पर्वत की रुपल फेस पर चढ़ाई करने का मौका मिला। सच मानो, ये कोई आसान काम नहीं था। खराब मौसम, मुश्किल रास्ते और टीम लीडर के कुछ अजीब फैसलों ने मुश्किल और बढ़ा दी। सबसे दुखद बात यह हुई कि इसी अभियान के दौरान उनके भाई गुनथर की मौत हो गई। लेकिन रेनहोल्ड ने हार नहीं मानी और अपने दम पर बाकी टीम को सुरक्षित नीचे उतारा।

बिना सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन चढ़ गए एवरेस्ट

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट जहां ऑक्सीजन इतनी कम होती है कि वहां हर सांस एक चुनौती है। कोई बिना सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के वहां चढ़ पाए इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन, साल 1978 में रेनहोल्ड और उनके दोस्त पीटर हेबलर ने बिना किसी सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के एवरेस्ट के शिखर तक चढ़ाई की जिसको पहले हर कोई असंभव मानता था।

सुपरहीरो रेनहोल्ड मेसनर

सुपरहीरो रेनहोल्ड मेसनर

मेसनर ने कर दिया था कमाल

दिल में जूनून हो, तो एवरेस्ट भी रोक नहीं सकता। असली कमाल मेसनर ने 1980 में किया जब वो एवरेस्ट अकेले चढ़े और फिर से बिना किसी सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के। सर्द हवाएं, पत्थरीली चट्टानें और कम ऑक्सीजन के कारण यात्रा के दौरान हर कदम, हर सांस एक टेस्ट था। ये वो पल था जब ये आदमी सच में पहाड़ों का सुपरहीरो बन गया था।

कैलाश की पवित्रता ने रेनहोल्ड मेसनर को रोका

पहाड़ों से लेकर समुद्र तक और अंतरिक्ष से लेकर चांद तक शायद ही ऐसी कोई चीज बची हो जिसे इंसान ने नहीं जीता हो। माउंट एवरेस्ट और K2 तक फतह किए जा चुके हैं लेकिन तिब्बत में 6638 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट कैलाश आज भी अछूता है। आज तक इसपर कोई नहीं चढ़ सका है। रेनहोल्ड मेसनर ने भी इसपर चढ़ाई करने से मना कर दिया था जिसका कारण आपको जरूर जानना चाहिए।

कैलाश की पवित्रता ने रोका

कैलाश की पवित्रता ने रोका

कैलाश पर चढ़ने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि अगर कोई कैलाश पर चढ़ने के लिए सबसे ज्यादा योग्य व्यक्ति था तो वह रेनहोल्ड मेसनर ही थे। चीन की सरकार द्वारा इन्हें ऐसा करने के लिए ऑफर भी दिया गया था। चीनी सरकार द्वारा जब उन्हें ऑफर दिया गया तब उनके साथी पर्वतारोही ने उनसे कहा, 'किसी को भी पत्थर बन चुके देवाताओं को अपने जूते के नीचे नहीं कुचलना चाहिए।' साथी की बात को मेसनर ने समझा और कैलाश पर्वत पर चढ़ने से मना कर दिया।

मेसनर का कथन

मेसनर ने कैलाश को लेकर जो कहा वह बात आपको जरूर जानना चाहिए। मेसनर ने कहा था- ' कैलाश ना तो बहुत ऊंचा है और ना ही बहुत कठिन लेकिन, इसपर चढ़ना लोगों की आत्मा को जीतने जैसा है। ऐसे में मैं सुझाव दूंगा कि अगर तुम्हें पहाड़ ही चढ़ना है तो किसी और कठिन पहाड़ पर चढ़ो।'

कैलाश पर चढ़ने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति

कैलाश पर चढ़ने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति

मेसनर की ये बात हमें सीखाती है कि कुछ चीजें जीतने के लिए नहीं बल्कि सम्मान के लिए होती हैं। यह सिर्फ एक पहाड़ नहीं है बल्कि चार बड़े धर्मों हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के लिए एक पवित्र स्थल है। यह चढ़ने की जगह नहीं बल्कि पूजने की जगह है।

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