Delhi travel: अगर आपने कभी दिल्ली की गलियों में कदम रखा है, तो आपको एहसास हुआ होगा कि ये शहर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है बल्कि ये एक पूरी फिल्म है, जो हर दिन अपने आप शूट होती है। एक समय ऐसा था जब दिल्ली सिर्फ फिल्मों की शूटिंग का बैकग्राउंड हुआ करती थी। इंडिया गेट की एक झलक, सरकारी दफ्तरों के सीन या फिर कुछ बड़े-बड़े घरों की लोकेशन और कहानी वापस मुंबई भाग जाती थी। लेकिन धीरे-धीरे सब बदल गया। फिल्मों में दिल्ली अब एक ऐसी जगह बन चुकी है जहां हर गली में कहानी है।
दिल्ली में आबको सबकुछ देखने को मिलेगा। चांदनी चौक की भीड़ में कॉमेडी है और पुरानी दिल्ली की गलियों में इमोशन्स का पूरा ड्रामा। आज जब आप दिल्ली घूमने निकलते हो, तो लगता है जैसे आप किसी फिल्म के अंदर चल रहे हों। यहां हर मोड़ पर एक नया सीन, हर चेहरे पर एक नई कहानी और हर आवाज में एक नया डायलॉग छुपा है।
दिल्ली-6: पुरानी दिल्ली जो यादों में सांस लेती है
अभिषेक बच्चन और सोनम कपूर की फिल्म 'दिल्ली-6' में इस शहर को बेहद खूबसूरत तरह से पेश किया गया था। चांदनी चौक की तंग गलियों में सुबह की अजान और मंदिर की घंटियां एक साथ सुनाई देती हैं। सूरज की रोशनी बालकनियों और संकरी गलियों में ऐसे गिरती है जैसे शहर धीरे-धीरे आंखें खोल रहा हो। अगर आप पुरानी दिल्ली, खासकर चांदनी चौक में घूमते हैं, तो लगेगा जैसे किसी फिल्म सेट में आ गए हों। तंग गलियां, साइकिल रिक्शा, मसालों की खुशबू और हर तरफ शोर-यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो कई फिल्मों की जान रहा है।
पुरानी दिल्ली जो यादों में सांस लेती है (फोटो: pinterest)
विक्की डोनर: जब घर का कमरा ही बन जाता है पूरा शहर
आयुष्मान खुराना की फिल्म 'विक्की डोनर' में एक सीन है जहां विक्की का परिवार अपने लाजपत नगर वाले छोटे से लिविंग रूम में बैठा है। जगह कम है, लेकिन आवाजें बहुत ज्यादा। सब लोग एक साथ बोल रहे हैं, फैसले भी हो रहे हैं और बहस भी। कैमरा ज्यादा हिलता भी नहीं, लेकिन माहौल इतना टाइट है कि लगता है जैसे कमरे में नहीं, पूरे दिल्ली के बीच में खड़े हैं। अगर आपको असली दिल्ली समझनी है, तो लाजपत नगर और वेस्ट दिल्ली की गलियों में घूमना जरूरी है। यही वो जगहें हैं जहां फिल्मों ने मिडिल क्लास की असली जिंदगी दिखाई है।
जब घर का कमरा ही बन जाता है पूरा शहर (फोटो: pinterest)
रांझणा: गुस्सा, जिद और गली-मोहल्ले का प्यार
दिल्ली यूनिवर्सिटी और उसके आसपास का इलाका फिल्मों में हमेशा से खास रहा है। 'रांझणा' फिल्म में कुंदन की कहानी दिल्ली यूनिवर्सिटी के इर्दगिर्द घूमते ही नजर आती है। फिल्म में एक सीन था जब कुंदन कॉलेज गेट के बाहर जोर-जोर से बहस कर रहा होता है। मजे की बात ये है कि शहर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता-ट्रैफिक चलता रहता है, भीड़ गुजरती रहती है।
गली-मोहल्ले का प्यार (फोटो: pinterest)
बैंड बाजा बारात: जब दिल्ली रोम-कॉम में बीच में बोल पड़ती है
फिल्म का एक यादगार सीन वेस्ट दिल्ली की शादी वाली तंग गली में होता है। चारों तरफ शोर ही शोर, दुकानदार दाम लगा रहे हैं, रिश्तेदार अपनी-अपनी बात पर बहस कर रहे हैं, और इसी भीड़-भाड़ में बिट्टू और श्रुति अपना वेडिंग बिजनेस का सपना लेकर खड़े हैं। लेकिन, दिल्ली यहां किसी के सपने के लिए रुकती नहीं। स्कूटर बीच से निकल जाते हैं, लोग आपकी निजी बातें भी सुन लेते हैं, और हर चीज में एक तरह की हड़बड़ी और जुगाड़ दिखती है।
बैंड बाजा बारात फिल्म का सीन (फोटो: pinterest)
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: मस्ती छोड़कर आस्था क्यों चुन रहे हैं Gen Z, नया फैशन बन गया है स्पिरिचुअल ट्रैवल
कनॉट प्लेस और ओल्ड दिल्ली
कनॉट प्लेस दिल्ली का वो हिस्सा है जो फिल्मों में अक्सर स्टाइल और एंबिशन का सिंबल बनता है। सफेद कॉलम वाली इमारतें, कॉफी शॉप्स और बिजी लोग। वहीं दूसरी तरफ फिल्मों में जब इमोशनल सीन चाहिए होता है, तो अक्सर कैमरा ओल्ड दिल्ली में रुकता है क्योंकि यहाँ भावनाएं सिर्फ दिखती नहीं बल्कि महसूस भी होती हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: ऊटी या दार्जिलिंग-2026 की गर्मी में कहां जाएं घूमने, कौन सी जगह है असली पहाड़ों की रानी
दिल्ली एक ऐसा शहर है जहां की गलियां, बाजार, कॉलेज और घर-सब कुछ लगातार बोलते ही रहते हैं। शायद यही वजह है कि फिल्मों में दिल्ली सिर्फ दिखती नहीं, सुनाई भी देती है। कभी प्यार की तो कभी हल्की मुस्कान की यह शहर हर यात्री को कुछ ना कुछ कहानी देकर भेजता है।
