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लोहागढ़ में अब इतिहास नहीं Siya Point पूछ रहे हैं लोग, आखिर क्या है डार्क टूरिज्म का ये ट्रेंड

Dark Tourism: पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस के बाद लोहागढ़ किले का Siya Point चर्चा में है। जानें डार्क टूरिज्म क्या होता है, लोग ऐसी जगहों की ओर क्यों आकर्षित होते हैं और भारत-दुनिया के इसके प्रमुख उदाहरण।

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डार्क टूरिज्म : घुमक्कड़ी का ये तरीका सुना है क्या
Authored by: Medha Chawla
Updated Jul 1, 2026, 17:59 IST
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Dark Tourism: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस के बाद लोहागढ़ किला एक अलग वजह से सुर्खियों में है। पहले यहां आने वाले पर्यटक मराठा इतिहास, किले की बनावट और मशहूर विंचू काटा (Scorpion's Tail) के बारे में पूछते थे। लेकिन अब कई लोगों की मंजिल सिर्फ एक जगह है Siya Point।

न्यूज18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में लोहागढ़ आने वाले पर्यटकों की संख्या में करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो किले का इतिहास जानने नहीं, बल्कि उस जगह को देखने पहुंच रहे हैं, जहां यह चर्चित वारदात हुई थी।

सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जहां किसी हादसे, मर्डर, युद्ध या बड़ी त्रासदी के बाद पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई। ट्रैवल की दुनिया में इस ट्रेंड को डार्क टूरिज्म (Dark Tourism) कहा जाता है।

नाम नया है, लेकिन ट्रेंड काफी पुराना

डार्क टूरिज्म का मतलब है ऐसी जगहों पर जाना, जहां कभी कोई दुखद घटना हुई हो। यह कोई चर्चित मर्डर हो सकता है, युद्ध का मैदान, प्राकृतिक आपदा, जेल, नरसंहार या कोई ऐसा हादसा जिसने इतिहास बदल दिया हो।

हालांकि यहां आने वाले सभी लोगों का मकसद एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग इतिहास को समझने आते हैं। कुछ उस जगह से जुड़ी कहानी महसूस करना चाहते हैं। वहीं कुछ लोग सिर्फ इसलिए पहुंच जाते हैं क्योंकि वह जगह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी होती है।

यानी जगह वही रहती है, लेकिन उसे देखने की वजह हर इंसान की अलग होती है।

क्यों लोगों को लुभाता है डार्क टूरिज्म

क्यों लोगों को लुभाता है डार्क टूरिज्म

लोहागढ़ इसका सबसे ताजा उदाहरण है

करीब 300 साल पुराने लोहागढ़ किले की पहचान कुछ दिन पहले तक तक उसकी मजबूत किलेबंदी, मराठा इतिहास और विंचू काटा रही है। मानसून में यहां ट्रेकिंग करने वालों की भी अच्छी-खासी भीड़ रहती है।

लेकिन आज सोशल मीडिया पर इस किले की चर्चा किसी ऐतिहासिक वजह से नहीं, बल्कि एक क्राइम केस की वजह से हो रही है। एक तरह से देखें तो हालिया घटना ने सदियों पुराने इतिहास पर अपनी अलग परत चढ़ा दी है।

आखिर दर्द और हादसा देखने क्यों आते हैं लोग

अगर आपने कभी किसी चर्चित हादसे या क्राइम की खबर पढ़कर मन ही मन सोचा हो कि असल में वहां हुआ क्या होगा - तो आप अकेले नहीं हैं।

सायकॉलजी में इसे 'Morbid Curiosity' कहा जाता है। आसान भाषा में कहें तो ऐसी घटनाओं के बारे में जानने की स्वाभाविक जिज्ञासा, जो डराती भी हैं और सोचने पर भी मजबूर करती हैं।

यही वजह है कि लोग सिर्फ खबर पढ़कर संतुष्ट नहीं होते। अगर मौका मिले तो उस जगह को अपनी आंखों से भी देखना चाहते हैं।

सोशल मीडिया ने इस ट्रेंड को दी और हवा

कुछ साल पहले तक किसी बड़ी घटना की चर्चा अखबारों और टीवी तक सीमित रहती थी। अब एक वायरल रील, यूट्यूब व्लॉग या क्राइम डॉक्यूमेंट्री किसी जगह की पहचान ही बदल देती है।

पर्यटन विशेषज्ञ मानते हैं कि कई बार लोग किसी शहर का नाम पहली बार किसी ट्रैवल गाइड में नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम पर देखते हैं। फिर ट्रिप की प्लानिंग भी उसी हिसाब से होने लगती है। लोहागढ़ का 'सीया पॉइंट' इसका ताजा उदाहरण है कि सोशल मीडिया किसी जगह को किस हद तक अचानक पॉपुलर बना सकता है।

डार्क टूरिज्म सिर्फ क्राइम तक सीमित नहीं है

डार्क टूरिज्म सुनते ही सबसे पहले मर्डर या अपराध का ख्याल आता है, लेकिन इसकी दुनिया इससे कहीं बड़ी है। डार्क टूरिज्म में ये सब भी शामिल होता है -

  • War Tourism – युद्ध से जुड़े स्मारक और रणभूमि
  • Disaster Tourism – प्राकृतिक या औद्योगिक आपदाओं वाली जगहें
  • Crime Tourism – चर्चित अपराधों से जुड़ी लोकेशन
  • Prison Tourism – ऐतिहासिक जेल
  • Ghost Tourism – रहस्य और भूतिया कहानियों से जुड़ी जगहें

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसी जगहों के होने की वजह भले ही अलग-अलग हो, लेकिन कुछ बुरा कैसे हुआ होगा और लोगों ने उसे कैसे झेला होगा - यह जिज्ञासा इन सभी को जोड़ती है।

दुनिया के वो टूरिस्ट स्पॉट जहां 'डार्क साइड' देखने जाते हैं लोग

पोलैंड का ऑशविट्ज़ हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर खींचता है। नजारों की वजह से नहीं। दरअसल, यहां नाजी यातना शिविर था, जहां लाखों लोगों की जान गई। आज भी इस जगह को देखने के लिए बहुत लोग पहुंचते हैं।

यूक्रेन का चेरनोबिल 1986 की परमाणु दुर्घटना के बाद दशकों तक बंद रहा। कभी जिस इलाके में लोगों के जाने पर रोक थी, वहां आज गाइडेड टूर कराए जाते हैं और लोग उस त्रासदी को महसूस करने पहुंचते हैं।

अमेरिका का ग्राउंड ज़ीरो, जापान का हिरोशिमा पीस मेमोरियल और कंबोडिया के किलिंग फील्ड्स भी ऐसी जगहें हैं, जहां लोग छुट्टियां मनाने नहीं, बल्कि इतिहास और दुख व दर्द को करीब से महसूस करने जाते हैं।

भारत में भी हैं डार्क टूरिज्म के उदाहरण

भारत में भी डार्क टूरिज्म नया नहीं है। यहां भी तमाम ऐसी जगहें हैं जहां आपदाओं और यातनाओं की कहानियों को महसूस करने के लिए पर्यटक जाते हैं।अंडमान की सेल्युलर जेल, भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ी जगहें इतिहास के ऐसे ही दर्दनाक अध्यायों की याद दिलाते हैं।

वहीं राजस्थान का कुलधरा गांव और भानगढ़ किला अलग वजह से लोगों को आकर्षित करते हैं। दरअसल, यहां इतिहास के साथ रहस्य भी जुड़ गया है और कई लोग इन जगहों पर इतिहास जानने से ज्यादा वहां प्रचलित कहानियां सुनने पहुंचते हैं।

इन उदाहरणों से जाहिर है कि दुखद घटनाओं की वजह से किसी जगह की असली पहचान पीछे छूट जाती है और उससे जुड़ी कहानी आगे निकल आती है।

डार्क टूरिज्म पर निकलें, लेकिन संभलकर...

डार्क टूरिज्म पर निकलें, लेकिन संभलकर...

जाएं लेकिन व्यवहार को संभालें

ऑशविट्ज़ हो, हिरोशिमा हो या जलियांवाला बाग... ये सिर्फ टूरिस्ट स्पॉट नहीं हैं। ये हजारों लोगों की यादों और दर्द से जुड़ी जगहें भी हैं। इसलिए पर्यटकों से ऐसी जगहों पर जाने के बाद शालीन और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में ऐसे स्मारकों पर रील बनाने, तेज आवाज में हंसने या अनुचित व्यवहार को अच्छा नहीं माना जाता।

दरअसल, इतिहास को समझना और किसी के दर्द को तमाशा बना देना... दोनों के बीच बहुत महीन रेखा होती है। इसका ध्यान न होने पर हम अनजाने में ही किसी की भावनाओं को आहत कर सकते हैं।

एक सवाल, जिसका जवाब शायद हर पर्यटक को खुद देना होगा

हो सकता है कुछ महीनों बाद लोहागढ़ का Siya Point फिर खबरों से गायब हो जाए और लोग दोबारा वहां ट्रेकिंग, इतिहास और विंचू काटा देखने पहुंचने लगें। लेकिन इस पूरी घटना ने एक सवाल जरूर छोड़ दिया है।

क्या हम किसी जगह को उसके इतिहास की वजह से याद रखते हैं... या उस एक घटना की वजह से, जो वायरल होने की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गई। शायद अगली बार किसी ऐसी जगह पर जाते वक्त हर पर्यटक को खुद से यही सवाल पूछना चाहिए।

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