आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लोग कॉल करने, मैसेज भेजने और इंटरनेट चलाने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब बात देश की सुरक्षा और सरकार के गोपनीय कामकाज की हो, तो सामान्य फोन के बजाय सुरक्षित संचार व्यवस्था की जरूरत होती है। इसी वजह से भारत में सरकारी अधिकारियों के लिए खास RAX टेलीफोन व्यवस्था चर्चा में रही है। इस फोन का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जुड़ा है। हालांकि, इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध किसी स्मार्टफोन की तरह समझना सही नहीं होगा।
क्या है RAX फोन?
RAX से जुड़ी सरकारी जानकारी में इसका इस्तेमाल टेलीफोन एक्सचेंज के लिए भी किया गया है। वहीं, सरकारी अधिकारियों के बीच सुरक्षित बातचीत के लिए इस्तेमाल होने वाले RAX टेलीफोन की व्यवस्था का जिक्र मीडिया रिपोर्ट्स में मिलता है। इसका उद्देश्य संवेदनशील सरकारी बातचीत को अनधिकृत लोगों तक पहुंचने से बचाना है। यह iPhone या दूसरे सामान्य स्मार्टफोन की तरह बाजार में बिकने वाला फोन नहीं है। इसका इस्तेमाल अधिकृत सरकारी अधिकारियों के लिए सीमित व्यवस्था के तहत किया जाता रहा है।
कैसे सुरक्षित रहती है बातचीत?
इकोनॉमिक टाइम्स की 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने RAX फोन इस्तेमाल करने वाले अधिकारियों की संख्या बढ़ाकर 5,000 तक करने की योजना बनाई थी। उस समय अधिकारियों को ऐसे फोन देने की बात कही गई थी, जिनमें फिंगरप्रिंट से पहचान की सुविधा और कॉल करने वाले की लाइव तस्वीर देखने जैसी विशेषताएं शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत को हैंडसेट के स्तर पर एन्क्रिप्ट करने की व्यवस्था भी थी। एन्क्रिप्शन का मतलब है कि बातचीत को सुरक्षित डिजिटल रूप में बदला जाता है, ताकि अनधिकृत व्यक्ति उसे आसानी से न पढ़ सके या सुन सके।
क्या केवल 5,000 लोग ही इस्तेमाल करते हैं?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। 5,000 यूजर्स का आंकड़ा अक्टूबर 2014 की रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के लिए प्रस्तावित विस्तार से जुड़ा था। इसे आज भारत में RAX फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों की मौजूदा संख्या नहीं माना जा सकता। इसी तरह, प्रधानमंत्री के मौजूदा फोन और कॉल करने की प्रक्रिया से जुड़े हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
किसने विकसित किया RAX?
C-DOT यानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के तहत काम करने वाला संस्थान है। इसने भारत में RAX नाम से टेलीफोन एक्सचेंज तकनीक विकसित की थी। हालांकि, ग्रामीण टेलीफोन एक्सचेंज और सरकारी अधिकारियों के सुरक्षित संचार वाले RAX फोन को एक ही चीज मानने से पहले उनके संदर्भ को समझना जरूरी है।
