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COAI की सिफारिशों के आधार पर सैटकॉम स्पेक्ट्रम समीक्षा का कोई प्रश्न नहीं: TRAI

Satcom spectrum: भारतीय दूरकम्युनिकेशन नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से जुड़े सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि व्यापक परामर्श प्रक्रिया और पारदर्शिता के बाद सैटेलाइट कम्युनिकेशन के बारे में सुझाव पहले ही सरकार को सौंपे जा चुके हैं। सीओएआई ने 29 मई को लिखे पत्र में दूरकम्युनिकेशन विभाग से ट्राई के सुझावों की विस्तृत समीक्षा करने का अनुरोध किया है।

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TRAI

Satcom spectrum: दूरकम्युनिकेशन नियामक ट्राई ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के संबंध में सरकार को सौंपी गई अपनी सिफारिशों की किसी भी समीक्षा से इनकार किया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने पिछले हफ्ते एक पत्र में कहा था कि ट्राई के सुझाव गलत धारणाओं पर आधारित हैं और उन्हें लागू करने से स्थलीय दूरकम्युनिकेशन सेवाओं को नुकसान होगा।

भारतीय दूरकम्युनिकेशन नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से जुड़े सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि व्यापक परामर्श प्रक्रिया और पारदर्शिता के बाद सैटेलाइट कम्युनिकेशन के बारे में सुझाव पहले ही सरकार को सौंपे जा चुके हैं। सूत्रों ने कहा कि नियामक ने परामर्श के दौरान सभी हितधारकों को पर्याप्त अवसर दिया था। ऐसे में दूरकम्युनिकेशन कंपनियों की प्रतिक्रिया के आधार पर इन सुझावों की समीक्षा का सवाल ही नहीं खड़ा होता है।

सीओएआई ने 29 मई को लिखे पत्र में दूरकम्युनिकेशन विभाग से ट्राई के सुझावों की विस्तृत समीक्षा करने का अनुरोध किया है। उसने खास तौर पर स्थलीय कम्युनिकेशन और सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को समान अवसर दिए जाने का मुद्दा उठाया है। दूरकम्युनिकेशन नियामक ने पिछले महीने सुझाव दिया था कि स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को अपने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में सरकार को देना होगा।

शहरी क्षेत्रों में सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनियों को प्रति ग्राहक सालाना 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा।

इनपुट-भाषा

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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