देश की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत बनी हुई है, लेकिन कुछ प्रमुख आर्थिक संकेतकों में आई नरमी से यह संकेत मिल रहे हैं कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में बेहतर आर्थिक वृद्धि के बाद 2026-27 के शुरुआती महीनों में भी देश की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। ई-वे बिल, पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक), बिजली की खपत और वाहन बिक्री जैसे संकेतक घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखा रहे हैं।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रण में रहने की संभावना है।(फोटो क्रेडिट-iStock)
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रमुख उद्योगों का उत्पादन, ईंधन की खपत, हवाई यात्रियों की संख्या, उपभोक्ता विश्वास और श्रम बाजार जैसे कुछ संकेतकों में नरमी देखने को मिली है। इससे आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों की गति कुछ धीमी हो सकती है।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रण में रहने की संभावना है। इसकी वजह वैश्विक बाजार में जिंसों की कीमतों में कमी, कच्चे तेल के सस्ते होने और यूरिया जैसी वस्तुओं के दाम घटने को बताया गया है। इससे आयातित महंगाई का दबाव कम हो सकता है।
हालात सामान्य होने में लग सकता है समय
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। हालांकि, जिंसों की कीमतों में गिरावट से महंगाई पर अतिरिक्त दबाव कम होने की उम्मीद है। सरकार के पास पर्याप्त खाद्यान्न और कृषि जिंसों का बफर स्टॉक है, जिससे किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे देश पर बाहरी और महंगाई का दबाव कम हुआ है। साथ ही, व्यापार समझौतों में प्रगति से विदेशी निवेश बढ़ने की भी उम्मीद है।
हालांकि, मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि मानसून की स्थिति, अल नीनो का संभावित प्रभाव और वैश्विक संकट जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति या समुद्री परिवहन प्रभावित होता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और जिंसों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
(इनपुट-भाषा)
