दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp जल्द ही अपने प्लेटफॉर्म पर Username फीचर लाने जा रहा है। फिलहाल कंपनी ने यूजर्स के लिए Username Reservation शुरू कर दिया है, लेकिन फीचर लॉन्च होने से पहले ही इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। यहां तक कि भारत सरकार को भी इस मामले पर दखल देना पड़ा और यह कहना पड़ा कि फिलहाल इस फीचर को जारी नहीं किया जाए।
कुछ लोग इसे प्राइवेसी के लिए बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कई एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे Meta की कमाई बढ़ाने की रणनीति छिपी हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर WhatsApp को 2026 में Username फीचर लाने की जरूरत क्यों पड़ी और इससे यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
आखिर क्यों ला रहा है WhatsApp Username फीचर?
Meta का दावा है कि Username फीचर का उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को पहले से ज्यादा मजबूत बनाना है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में लोग अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल Username के जरिए संपर्क कर सकेंगे। इससे निजी नंबर सार्वजनिक करने की जरूरत कम होगी और अनजान लोगों के साथ बातचीत पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी, हालांकि टेक एक्सपर्ट्स का एक बड़ा ग्रुव इस दलील से पूरी तरह सहमत नहीं है। उनका मानना है कि फोन नंबर पहले से ही WhatsApp की पहचान का आधार है और सिर्फ Username जोड़ने से प्राइवेसी में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
क्या Meta की नजर WhatsApp से ज्यादा कमाई पर है?
2014 में Meta (तब Facebook) ने WhatsApp को करीब 21 अरब डॉलर में खरीदा था। इसके बाद यह दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला मैसेजिंग ऐप बन गया, लेकिन कमाई के मामले में यह Instagram की बराबरी नहीं कर सका।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Instagram हर साल Meta के लिए अरबों डॉलर की कमाई करता है, जबकि WhatsApp का राजस्व अभी भी काफी कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह ऐप की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और निजी मैसेजिंग पर आधारित संरचना है, जहां विज्ञापन दिखाने की गुंजाइश बेहद सीमित है। यही कारण है कि कई विश्लेषकों का मानना है कि Username फीचर भविष्य में WhatsApp के नए बिजनेस मॉडल की नींव बन सकता है।
आखिर क्या हो सकता है Meta का बड़ा प्लान?
जानकारों के अनुसार, Username फीचर सिर्फ प्राइवेसी तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में Meta इसका इस्तेमाल बिजनेस अकाउंट्स, AI एजेंट्स और कम्युनिटी प्लेटफॉर्म को मजबूत बनाने के लिए कर सकता है। माना जा रहा है कि कंपनियां एक ही मोबाइल नंबर के तहत कई अलग-अलग Username बनाकर अपनी सेल्स, कस्टमर सपोर्ट और अन्य सेवाओं को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगी।
Username फीचर और कंपनी की प्लानिंग
इसके अलावा AI चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट्स को भी Username के जरिए WhatsApp पर लाना आसान हो जाएगा। भविष्य में बिजनेस अकाउंट्स के Username वेरिफिकेशन, प्रीमियम सुविधाओं और अन्य सेवाओं के लिए Meta शुल्क भी ले सकता है, हालांकि कंपनी ने फिलहाल ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्या बढ़ जाएंगे साइबर फ्रॉड और फर्जी अकाउंट?
Username फीचर को लेकर सबसे बड़ी चिंता फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन ठगी की है। कई लोगों का मानना है कि किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या कंपनी से मिलता-जुलता Username बनाकर साइबर अपराधी लोगों को आसानी से धोखा दे सकते हैं, हालांकि Meta का कहना है कि प्रसिद्ध हस्तियों, सरकारी संस्थाओं और Meta Verified अकाउंट्स से जुड़े नाम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं। ऐसे Username केवल उनके वास्तविक मालिक ही रिजर्व कर सकेंगे। कंपनी ने यह भी कहा है कि ब्लॉक और रिपोर्ट सिस्टम के जरिए संदिग्ध अकाउंट्स पर लगातार नजर रखी जाएगी। व्हाट्सएप की हालत भी कुछ वैसी ही हो सकती है जैसा कि Twitter (अब X) के पेड ब्लू टिक सर्विस पेड शुरू होने पर हुआ था जिसके बाद कई लोगों ने मशहूर लोगों के नाम पर ब्लू टिक ले लिया।
क्या कोई भी Username जानकर आपको मैसेज कर सकेगा?
Meta ने इस आशंका को भी खारिज किया है। कंपनी के अनुसार, WhatsApp पर Username को सामान्य तरीके से सर्च नहीं किया जा सकेगा, ठीक उसी तरह जैसे अभी किसी मोबाइल नंबर को सर्च नहीं किया जा सकता। इसके अलावा नया Username Key फीचर भी दिया जाएगा। यदि कोई यूजर इसे सक्रिय करता है, तो उससे संपर्क करने के लिए सामने वाले व्यक्ति को केवल Username ही नहीं बल्कि Username Key भी पता होना जरूरी होगा। जरूरत पड़ने पर यूजर इस Key को कभी भी बदल सकता है।
किन सवालों पर Meta ने दी सफाई?
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Username रखना पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) होगा। यदि पसंद का Username उपलब्ध नहीं है तो इसकी वजह यह हो सकती है कि वह पहले से Instagram या Facebook पर मौजूद हो, किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के लिए सुरक्षित रखा गया हो या फिर किसी अन्य यूजर ने पहले ही रिजर्व कर लिया हो।
Meta ने यह भी बताया कि यदि कोई यूजर WhatsApp पर वही Username चाहता है जो उसके Instagram या Facebook अकाउंट पर है, तो उसे दोनों अकाउंट लिंक करने होंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद अकाउंट को दोबारा अनलिंक भी किया जा सकता है। यूजर्स भविष्य में अपना Username बदल भी सकेंगे, बशर्ते नया Username उपलब्ध हो।
क्या WhatsApp का दावा पूरी तरह सही है?
Username फीचर निश्चित रूप से कुछ मामलों में प्राइवेसी बढ़ा सकता है, खासकर तब जब यूजर अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते, लेकिन टेक इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि Meta इस फीचर के जरिए भविष्य में बिजनेस सेवाएं, AI इंटीग्रेशन, कम्युनिटी फीचर्स और नए रेवेन्यू मॉडल भी तैयार कर सकता है यानी यह कहना जल्दबाजी होगी कि Username फीचर केवल प्राइवेसी के लिए लाया जा रहा है। इसके पीछे Meta की लंबी व्यावसायिक रणनीति भी हो सकती है।
फिलहाल WhatsApp ने केवल Username Reservation शुरू किया है और कंपनी का कहना है कि यह फीचर इस साल के अंत तक चरणबद्ध तरीके से सभी यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा। ऐसे में आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि WhatsApp का नया Username फीचर केवल प्राइवेसी बढ़ाने का माध्यम बनता है या फिर Meta के लिए कमाई का एक नया जरिया भी साबित होता है।
