Google Play ने इंडियन डेवलपर्स के लिए पेश किया नया प्रीपेड ऐप सब्सक्रिप्शन

गूगल ने भारत सहित उभरते बाजारों में एंड्रॉइड ऐप डेवलपर्स के लिए नई प्री-पेड ऐप सब्सक्रिप्शन क्षमताओं और अन्य बदलाव पेश किए हैं, ताकि उन्हें अधिक राजस्व प्राप्त करने में मदद मिल सके।

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गूगल ने भारत सहित उभरते बाजारों में एंड्रॉइड ऐप डेवलपर्स के लिए नई प्री-पेड ऐप सब्सक्रिप्शन क्षमताओं और अन्य बदलाव पेश किए हैं, ताकि उन्हें अधिक राजस्व प्राप्त करने में मदद मिल सके। टेक दिग्गज ने कहा कि यूजर्स को प्रीपेड प्लान से सदस्यता लेने की अनुमति दी जाएगी जो एक निश्चित अवधि के लिए ऐप और उसकी सेवाओं तक पहुंच प्रदान करेगा।

गूगल ने बुधवार को एक बयान में कहा, "उपयोगकर्ता आपके ऐप या प्ले स्टोर में टॉप-अप खरीदकर इस एक्सेस को बढ़ा सकते हैं। प्रीपेड प्लान आपको भारत और दक्षिण पूर्व एशिया सहित उन क्षेत्रों में यूजर्स तक पहुंचने की अनुमति देते हैं जहां पे-एज-यू-गो स्टैंडर्ड है।"

कंपनी ने अपने वार्षिक गूगल आई/ओ डेवलपर सम्मेलन के दौरान कहा, वे उन यूजर्स के लिए एक विकल्प भी प्रदान कर सकते हैं जो ऑटो-रेन्यूयिंग सदस्यता खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं।

गूगल ने उभरते बाजारों में उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने के लिए 'अल्ट्रा-लो' मूल्य बिंदुओं के लॉन्च के साथ विस्तारित मूल्य निर्धारण विकल्पों की भी घोषणा की।

गूगल को सूचित किया, "सदस्यता में प्रत्येक आधार योजना एक अलग बिलिंग अवधि और नवीनीकरण प्रकार को परिभाषित करती है। उदाहरण के लिए, आप मासिक ऑटो-रिनिविंग योजना, वार्षिक ऑटो-रिनिविंग योजना और 1 महीने की प्रीपेड योजना के साथ सदस्यता बना सकते हैं।"

कंपनी ने कहा कि वह डेवलपर्स को कई आधार योजनाओं और विशेष प्रस्तावों को कॉन्फिगर करने की अनुमति देकर गूगल प्ले पर सदस्यता बेचना आसान बना रही है।

कंपनी ने कहा, "प्रत्येक सदस्यता के लिए, अब आप कई आधार योजनाओं और ऑफर को कॉन्फिगर कर सकते हैं। यह आपको एसकेयू की लगातार बढ़ती संख्या को बनाने और प्रबंधित करने की आवश्यकता को हटाकर परिचालन लागत को कम करते हुए, अपनी सदस्यता को कई तरीकों से बेचने की अनुमति देता है।"

डेवलपर्स कीमतों को 5 यूएस सेंट तक कम कर सकते हैं जो उन्हें स्थानीय बिक्री और प्रचार चलाने और इन-ऐप टिपिंग का समर्थन करने की अनुमति देगा।

टेक दिग्गज ने पिछले साल लैटिन अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत के 20 से अधिक बाजारों में उत्पादों के लिए न्यूनतम मूल्य सीमा कम कर दी थी।

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