ब्रह्मांड में ब्लैक होल का निर्माण कैसे होता है, वैज्ञानिकों ने खोज निकाला रहस्य

हाल ही में पहली बार वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में एक बड़े आकार का मास ब्लैक होल का पता लगाया। इसके द्रव्यमान का अनुमान लगाया जाए तो यह 100 से 100,000 सोलर मास के बराबर हो सकता है।

universe black holes
यूनिवर्स ब्लैक होल 

वैज्ञानिकों ने हाल ही में ब्रह्मांड में ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया का खुलासा किया है। अब तक वैज्ञानिकों को ब्लैक होल बनन के सटीक जानकारी नहीं थी। हाल ही में पहली बार वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में एक बड़े आकार का मास ब्लैक होल का पता लगाया। इसके द्रव्यमान का अनुमान लगाया जाए तो यह 100 से 100,000 सोलर मास के बराबर हो सकता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ब्रह्मांड में ब्लैक होल का निर्माण कैसे होता है।

ब्रह्मांड में 9 ग्रह हैं आप कल्पना कर सकते हैं कि यदि ये सारे ग्रह एक साथ यदि अपनी ऊर्जा छोड़ दें तो क्या होगा। इस ऊर्जा का असर पृथ्वी पर भी पड़े तो सोचिए इसका कैसा असर पड़ेगा। इसकी आंच धरती पर एक तीव्र ऊर्जा लहर के रुप में आई जो दो बड़े ब्लैक होल्स के महाविलय से उत्पन्न हुई। इस घटना के सिग्नल ने पृथ्वी पर पहुंचने के लिए सात अरब साल का सफर पूरा किया। 

अरबों साल का सफर तय करने के बाद ये सिग्नल इतने शक्तिशाली थे कि पिछले साल अमेरिका और इटली में तैनात लेजर डिक्टेटर हिल गए। यह घटना पिछले साल 21 मई को हुई थी जिसकी विस्तृत रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है। रिसर्चरों के मुताबिक दो ब्लैक होल्स के विलय से एक महाविलय बना जिसका द्रव्यमान सूर्य से 142 गुना ज्यादा बड़ा था। 

टक्कर के बाद 9 सूर्यों के बराबर पदार्थ ऊर्जा में तब्दील हो गया। इस दौरान गुरुत्वाकर्षण खिंचाव इतना मजबूत होता है कि यहां से कोई भी चीज बाहर नहीं जा सकती है यहां तक कि प्रकाश भी नहीं। चक्राकार ब्लैक होल आपस में विलय के दौरान ग्रेविटेशनल वेव पैदा करते हैं। यह अंतरिक्ष में हलचल करने वाली अदृश्य तीव्र लहरें हैं जो प्रचंड ब्रह्मांडीय घटनाओं से जन्म लेती हैं। ये प्रकाश की गति से आगे बढ़ती हैं। 

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