अवनि लेखरा ने रचा इतिहास, बनीं पैरालंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला 

अवनि लेखरा ने टोक्यो पैरालंपिक खेलों में अपने नाम दूसरा पदक करके इतिहास रच दिया है।

Avani Lekhra
अवनि लेखरा 

मुख्य बातें

  • पैरालंपिक खेलों में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं अवनि लेखरा
  • टोक्यो पैरालंपिक में ही 10 मीटर एयर राइफल स्टैडिंग एसएच1 स्पर्धा में जीता है स्वर्ण पदक
  • अब 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशन एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक हासिल किया

टोक्यो: निशानेबाज अवनि लेखरा ने शुक्रवार को टोक्यो पैरालंपिक खेलों की 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशन एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक हासिल किया जिससे वह दो पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गयीं। उन्नीस साल की लेखरा इससे पहले 10 मीटर एयर राइफल स्टैडिंग एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं।

लेखरा ने 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशन एसएच1 स्पर्धा में 1176 के स्कोर से दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल के लिये क्वालीफाई किया था। फाइनल काफी चुनौतीपूर्ण रहा जिसमें लेखरा ने कुल 445.9 अंक का स्कोर बनाया और वह यूक्रेन की इरिना श्चेटनिक से आगे रहकर पदक हासिल करने में सफल रहीं। वहीं यूक्रेन की निशानेबाज एलिमिनेशन में खराब शॉट से पदक से चूक गयीं।

जयपुर की निशानेबाज के 2012 में हुई कार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लग गयी थी, उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्टैडिंग एसएच1 स्पर्धा में 249.6 के विश्व रिकार्ड की बराबरी कर पैरालंपिक का नया रिकॉर्ड बनाया था।

जोगिंदर सिंह सोढ़ी थे एक पैरालंपिक में कई पदक जीतने वाले पहले भारतीय 
उनसे पहले जोगिंदर सिंह सोढ़ी खेलों के एक ही चरण में कई पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे। उन्होंने 1984 पैरालंपिक में एक रजत और दो कांस्य पदक जीते थे। उनका रजत पदक गोला फेंक में जबकि दो कांस्य पदक चक्का फेंक और भाला फेंक में मिले थे।

शुक्रवार की स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन की झांग कुईपिंग ने 457.9 अंक से खेलों के नये रिकॉर्ड के साथ हासिल किया जबकि जर्मनी की नताशा हिल्ट्रोप ने 457.1 अंक से रजत पदक हासिल किया।

एचएच1 राइफल स्पर्धा में खिलाड़ियों के पैरों में विकार होता है जिसमें उनका पैर काटना पड़ा हो या फिर नीचे के अंग में पक्षाघात हो गया। कुछ खिलाड़ी बैठकर जबकि कुछ खड़े होकर हिस्सा लेते हैं। 

पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पी स्पर्धा में दीपक फाइनल के लिये क्वालीफाई करने में असफल रहे। वह 1114 के स्कोर से 18वें स्थान पर रहे।


 

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