मुंबई: ओलंपिक पदक विजेता और विश्व की पूर्व नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने कहा कि भारत को ’खेल राष्ट्र’ कहलाने के लिए बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी से अधिक जरूरी है कि वह वैश्विक पदक तालिका में शीर्ष देशों में शामिल हो। साइना ने सेंट जेवियर्स कॉलेज द्वारा आयोजित अंतर-महाविद्यालयीन महोत्सव ’मल्हार’ में कहा कि भारत में खेलों, खासकर महिला खेलों, की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी बदली है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
पदक तालिका में शीर्ष पर रहना होगा
साइना ने कहा,'हम ओलंपिक या बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम पदक तालिका में शीर्ष पर रहें। तभी हम खुद को एक खेल राष्ट्र कह सकते हैं। देश की महिला खिलाड़ियों ने अपनी क्षमता को पहचानना शुरू कर दिया है और पिछले एक से डेढ़ दशक में खेलों में खासा बदलाव आया है। महिलाएं अब यह समझ रही हैं कि हम सक्षम हैं और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।'
महिला खेलों में हुआ है बड़ा बदलाव
साल 2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी ने आगे कहा,'पिछले 15-20 वर्षों में विशेष रूप से महिला खेलों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हरियाणा की कई लड़कियां कुश्ती, मुक्केबाजी और बैडमिंटन जैसे खेलों में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। मैं चाहती हूं कि इस तरह का बदलाव पूरे देश में हो ताकि भविष्य में भारत को सही मायने में खेल राष्ट्र कहा जा सके।'
खेलों में पैसा कमाना नहीं है आसान
साइना ने सभी खेलों में उभरते खिलाड़ियों को शुरुआत से ही पर्याप्त आर्थिक सहायता देने वाली व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा,'खेलों में पैसा कमाना आसान नहीं है और शीर्ष 15 या 20 खिलाड़ियों में जगह बनाने से पहले अच्छे प्रायोजन और वित्तीय मदद मिलना भी मुश्किल होता है। यह पुरुष या महिला की बात नहीं है, बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ देने की बात है। जब तक आप शीर्ष 15 या 20 में नहीं पहुंचते, आपको अच्छे प्रायोजन या पर्याप्त आर्थिक मदद मिलना मुश्किल होता है।'
क्रिकेट की तुलना में अन्य खेलों में करना पड़ता है संघर्ष
साइना ने क्रिकेट से तुलना करते हुए कहा कि अन्य खेलों के खिलाड़ियों को अभी भी काफी संघर्ष करना पड़ता है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने पर खिलाड़ियों को प्रायोजन जरूर मिलते हैं, लेकिन हर खिलाड़ी असाधारण प्रतिभा वाला नहीं होता। उन्होंने कहा,'कई बार परिणाम देर से आते हैं और कई बार जल्दी, लेकिन हर खिलाड़ी से लगातार प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। यह स्थिति खिलाड़ियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसलिए कम उम्र से ही खेलों का प्रचार, मार्केटिंग और प्रायोजन बेहतर करने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक खिलाड़ी आगे आ सकें।'
(भाषा)
