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Explainer: T20 में गरजा बल्ला, वनडे में क्यों खामोश हैं वैभव सूर्यवंशी? जानिए चमक से चुनौती तक की पूरी कहानी

आईपीएल 2025 में डेब्यू करने के बाद से हर क्रिकेट फैंस की जबान पर वैभव का नाम चढ़ गया। इसके बाद बिहार के इस लाल ने यूथ वनडे, टेस्ट और टी20 में ऐसा धमाल मचाया कि बच्चा-बच्चा वैभव का मुरीद हो गया। हालांकि, इन दिनों वैभव का बल्ला खामोश है। उनकी खराब बल्लेबाजी की आलोचना हो रही है। आइए इसी को समझने की कोशिश करते हैं कि ट्राई नेशन सीरीज में वैभव का बल्ला क्यों नहीं चल रहा है।

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ट्राई नेशन सीरीज में वैभव सूर्यवंशी का नहीं दिखा जादू।
Authored by: Umesh Kumar
Updated Jun 16, 2026, 23:39 IST
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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में इन दिनों अगर किसी युवा खिलाड़ी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है तो वह है, वैभव सूर्यवंशी का। महज 15 साल की उम्र में इस बल्लेबाज ने आईपीएल 2026 में ऐसी तबाही मचाई कि बड़े से बड़े गेंदबाजों के भी पसीने छूट गए। लेकिन कहते हैं ना कि 'हर चमकता सितारा हर रात एक जैसा नहीं चमकता।' फिलहाल वैभव के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है।

आईपीएल 2025 में डेब्यू करने के बाद से हर क्रिकेट फैंस की जबान पर वैभव का नाम चढ़ गया। इसके बाद बिहार के इस लाल ने यूथ वनडे, टेस्ट और टी20 में ऐसा धमाल मचाया कि इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तक शतकीय पारी खेली। फिर क्या था उन्हें अंडर-19 टीम में जगह मिल गई और वह अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने जिम्बाब्वे और नामीबिया पहुंच गए। यहां उन्होंने गेंदबाजों के साथ बेरहमी से पेश आए।

अंडर-19 वर्ल्ड कप में बिखेरी चमक

वनडे फॉर्मेट में खेले गए इस इवेंट में वैभव सूर्यवंशी ने 7 मैच की 7 पारियों में 169.50 की स्ट्राइक रेट से 439 रन बनाए। इसमें 41 चौके और 30 छक्के शामिल थे। वह टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में मात्र 80 गेंद पर 218.75 की स्ट्राइक से बल्लेबाजी करते हुए 175 रन की पारी खेली। इस पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल रहे।

Vaibhav Sooryavanshi

Vaibhav Sooryavanshi

IPL 2026 में मचाई तबाही

अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतकर भारत लौटे वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए दिग्गज गेंदबाजों की पिटाई कर दी। दुनिया के नंबर वन तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की पहली गेंद पर सिक्स मारकर उन्होंने बताया कि वह किस अंदाज में यह सीजन खेलने वाले हैं। वैभव ने अपने दमदम पर राजस्थान रॉयल्स को प्लेऑफ तक पहुंचाया। वह जिस मैच में चले उनमें राजस्थान ने बाजी मारी और जिसमें नहीं चले उनमें से अधिकतर मैच राजस्थान हार गई।

वैभव की तूफानी बल्लेबाजी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने IPL के एक सीजन में क्रिस गेल के सबसे ज्यादा सिक्स के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। वैभव ने नया इतिहास लिखते हुए 72 छक्के उड़ाए। वह आईपीएल में सबसे तेज शतक जड़ने के करीब पहुंच गए थे लेकिन यह सपना इस सीजन नहीं पूरा हुआ। वैभव सूर्यवंशी ने 237.31 की स्ट्राइक रेट से कुल 776 रन बनाए।

वैभव सूर्यवंशी

वैभव सूर्यवंशी

आईपीएल में गेंदबाजों की धुनाई करने वाले इस युवा बल्लेबाज को इंडिया में शामिल करने की मांग तेज हो गई। वैभव को इंडिया ए टीम में जगह मिली। फिर वो दिन आया जब इंडिया टीम के दरवाजे उन्होंने तोड़ दिए। इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए चुनी जा रही भारतीय टी20 टीम में उन्हें जगह दी गई।

15 साल की उम्र में रचा इतिहास

टीम में चयन होते ही वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा दिया। वह 15 साल और 71 दिन की उम्र में भारतीय सीनियर टीम में चुने जाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। सचिन को 16 साल की उम्र में भारतीय टीम में मौका मिला था, जबकि वैभव ने उससे पहले ही राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पर दस्तक दे दी।

हालांकि, अब वैभव की चमक फीकी पड़ती हुई दिख रही है। जब यह युवा बल्लेबाज जब इंडिया ए की जर्सी पहनकर श्रीलंका पहुंचा तो उम्मीद थी कि वह वहीं से अपनी कहानी आगे बढ़ाएगा। जहां आईपीएल में छोड़ी थी। मगर ट्राई सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में उनका बल्ला कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया। नतीजा यह हुआ कि अब क्रिकेट प्रेमियों के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है। आखिर वैभव सूर्यवंशी को हुआ क्या है?

इंडिया-ए में नहीं चला वैभव का जादू

श्रीलंका में खेली जा रही ट्राई वनडे सीरीज में वैभव अब तक तीन पारियां खेल चुके हैं। इन मुकाबलों में उन्होंने 14, 44 और 21 रन की पारियां खेलीं। यानी तीन मैचों में कुल 79 रन। उनका औसत 26.33 और स्ट्राइक रेट लगभग 164.58 का रहा है। तीसरे मुकाबले में श्रीलंका ए के खिलाफ जब टीम को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी, तब वह 21 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। सहान अराछिगे की गेंद पर उन्होंने ड्राइव खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर सीधे पॉइंट पर खड़े फील्डर के हाथों में समा गई। यह लगातार दूसरा मौका था, जब वैभव ऑफ-साइड में शॉट खेलते हुए कैच आउट हुए। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि विपक्षी टीमें अब उनकी बल्लेबाजी का गहन अध्ययन कर चुकी हैं और उनकी कमजोरियों पर सीधा वार कर रही हैं।

टी20 की रफ्तार, वनडे में धैर्य की जरूरत

वैभव की बल्लेबाजी का सबसे बड़ा गुण उनका बेखौफ अंदाज है। आईपीएल में उन्होंने मैदान के चारों कोनों में शॉट लगाए और गेंदबाजों को सोचने पर मजबूर कर दिया। लेकिन वनडे क्रिकेट टी20 से अलग खेल है। यहां सिर्फ चौके-छक्के नहीं, बल्कि पारी को बुनना भी पड़ता है। ऐसा लग रहा है कि वैभव फिलहाल दो नाव पर सवार हैं। एक तरफ उनका स्वाभाविक आक्रामक खेल है, दूसरी तरफ वनडे की मांग के मुताबिक संयम दिखाने की कोशिश।

Sooryavanshi India A

Sooryavanshi India A

अक्सर ऐसे दौर में बल्लेबाज न पूरी तरह आक्रमण कर पाता है और न ही पूरी तरह टिककर खेल पाता है। क्रिकेट की भाषा में कहें तो वैभव के बल्ले से अभी रन नहीं निकल रहे हैं। आईपीएल में धमाका करने के बाद अब वैभव किसी के लिए अनजान बल्लेबाज नहीं रहे। उनके वीडियो, शॉट चयन और पसंदीदा क्षेत्रों का विश्लेषण विरोधी टीमों ने भी किया है। ट्राई सीरीज में इसका एक उदाहरण दिखा। पहले मैच में मिड-ऑफ पर कैच, दूसरे मैच में शॉर्ट गेंद पर विकेटकीपर के हाथों कैच और तीसरे मैच में पॉइंट पर कैच। ये तीनों विकेट इस बात की गवाही देते हैं कि गेंदबाज एक तय योजना के साथ उनके खिलाफ उतर रहे हैं।

योजना में करना होगा बदलाव

वैभव की वर्तमान स्थिती देखते हुए यह कहा जा सकता है कि 'शेर को पकड़ने के लिए उसके रास्ते को समझना पड़ता है।' फिलहाल विपक्षी गेंदबाज यही कर रहे हैं। वैभव पहले कह चुके हैं कि वह मैच से पहले किसी खास गेंदबाज के खिलाफ ज्यादा होमवर्क नहीं करते और परिस्थितियों के हिसाब से खेलना पसंद करते हैं। जूनियर स्तर पर यह तरीका सफल रहा, लेकिन सीनियर क्रिकेट में कहानी थोड़ी अलग होती है। यहां हर गेंदबाज आपके खिलाफ रणनीति बनाता है। टी20 क्रिकेट में एक गेंदबाज को 4 ओवर की गेंदबाजी मिलती है। इसमें से उगर उसका एक ओवर भी खराब चला जाता है तो वह दवाब में आ जाता है। साथ ही वह बल्लेबाज के खिलाफ उतनी रणनीति नहीं बना पाता है। हालांकि, वनडे क्रिकेट में एक गेंदबाज 10 ओवर की गेंदबाजी करता है। उसके पास समय होता है, बल्लेबाज के खिलाफ प्लान बनाने के लिए। आपकी कमजोरियों को तलाशता है और फिर उसी जगह चोट करता है। ऐसे में बल्लेबाज को भी उतनी ही तैयारी के साथ मैदान पर उतरना पड़ता है। वैभव को भी अब अपने खेल के साथ-साथ विरोधी गेंदबाजों की योजनाओं को भी समझना होगा।

चिंता नहीं, सीखने का दौर

हालांकि, इन नाकामियों को लेकर बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। आखिरकार वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं। उनके करियर की यह शुरुआती सीढ़ियां हैं और ऐसे दौर हर बड़े खिलाड़ी के जीवन में आते हैं। क्योंकि 'सोने को आग में तपकर ही कुंदन बनना पड़ता है।' जिस उम्र में अधिकांश खिलाड़ी अंडर-16 क्रिकेट खेल रहे होते हैं, उस उम्र में वैभव इंडिया ए और सीनियर भारतीय टीम का हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए कुछ खराब पारियां उनके टैलेंट पर सवाल नहीं खड़े करतीं, बल्कि यह दिखाती हैं कि उन्हें अभी किन क्षेत्रों में सुधार करना है। वैभव को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का ककहरा सीखने की जरूरत है।

क्योंकि एक समय था जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को क्रिकेट की दुनिया में 'गॉड ऑफ द ऑफसाइड' कहा जाता था। लेकिन पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने उनको ऑफ साइड में आउट करने का गजब का तोड़ निकाला था। शोएब अख्तर, सौरव गांगुली को ऑफ साइड पर शॉर्ट पिच गेंद करके आउट करने की रणनीति बनाई जो सफल रही। वैभव को वनडे क्रिकेट में लंबा खेलना है तो उन्हें सनत जयसूर्या से सीखना चाहिए। पूर्व श्रीलंकाई ओपनर ने वनडे क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी की नई परिभाषा लिखी थी, लेकिन वह लंबी पारी खेलने के टेम्प्रामेंट से उतरते थे। वह जल्दी से 50 रन बना लेते फिर उसके बाद उस पारी को संवारने में जुट जाते। वैभव को भी आक्रामकता के साथ धैर्य दिखाना होगा। उन्हें कमजोर गेंदों का इंतजार करना पड़ेगा।

वैभव सूर्यवंशी के बल्ले की खामोशी फिलहाल चर्चा का विषय जरूर है, लेकिन इसे संकट नहीं बल्कि सीखने की प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए। आईपीएल की चमक के बाद अब उनके सामने लंबी पारी खेलने की चुनौती है। महान खिलाड़ी वही बनते हैं जो सफलता में जमीन पर रहें और असफलता में हिम्मत न हारें। वैभव के पास प्रतिभा भी है, समय भी है और अवसर भी। अब देखना यह होगा कि यह युवा बल्लेबाज आलोचनाओं के इस दौर को कैसे पार करता है। क्योंकि क्रिकेट में आखिर वही खिलाड़ी बड़ा बनता है, जो गिरकर संभलना और संभलकर आगे बढ़ना जानता हो।

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