Does BCCI Earns from Asia Cup: एशियाई क्रिकेट काउंसिल ने भारत की मेजबानी में खेले जाने वाले एशिया कप 2025 के शेड्यूल का आधिकारिक तौर पर शनिवार 26 जुलाई को कर दिया है। टूर्नामेंट का आयोजन यूएई में 9 से 28 सितंबर के बीच होगा। टूर्नामेंट में कुल आठ टीमें भाग लेंगी। जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में भारत, पाकिस्तान, यूएई और ओमान को जगह मिली है। वहीं ग्रुप बी में बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान और हांगकांग की टीमें हैं। ग्रुप दौर के मैच 9 से 19 सितंबर के बीच खेले जाएंगे। इसके बाद दोनों ग्रुप की टॉप-दो टीमें सुपर फोर राउंड में एक दूसरे से भिड़ेंगी। जब भी एशिया कप का आयोजन होता है, लाखों दर्शक भारत के मैचों को देखते हैं, स्टेडियम खचाखच भरे होते हैं और टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारी विज्ञापन से जमकर कमाई होती है, लेकिन इन सबके बावजूद बीसीसीआई को इस टूर्नामेंट से कोई आर्थिक लाभ नहीं होता है इसके पीछे की क्या वजह है आइए जानते हैं।
कौन करता है एशिया कप का आयोजन?
एशिया कप का आयोजन एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) द्वारा किया जाता है, न कि किसी एक देश के बोर्ड द्वारा। ACC एक स्वतंत्र संगठन है, जिसका उद्देश्य एशिया में क्रिकेट को बढ़ावा देना है। इसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और कुछ अन्य सदस्य देश शामिल हैं। इसका हेडक्वार्टर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में स्थित है। एशियन क्रिकेट काउंसिल ही एशिया कप के प्रसारण के अधिकार बेचता है, प्रायोजकों से डील करता है और उससे जो कमाई होती है, वह उसके सदस्यों में बराबर हिस्से में बांटी जाती है, लेकिन यहां एक बड़ी बात यह है कि बीसीसीआई इस हिस्सेदारी से खुद को अलग रखता है।
बीसीसीआई की खुद को अलग रखने की ये है वजह
पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने 2023 में अपने यू ट्यूब चैनल पर ये दावा किया था कि बीसीसीआई एशिया कप की कमाई से एक रुपया भी नहीं लेता है। उनके मुताबिक इसके पीछे वजह ये है कि बीसीसीआई पहले से ही आईसीसी और अन्य द्विपक्षीय सीरीज से भरपूर कमाई करता है और उसकी आर्थिक स्थिति बाकी एशियाई देशों से कहीं मजबूत है और वह दूसरे देशों की मदद कर बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहता है। आकाश चोपड़ा ने कहा था कि "एशिया कप के इतिहास में बीसीसीआई ने कभी भी टूर्नामेंट से अपना हिस्सा नहीं लिया है। वे इसे कभी छूते तक नहीं। इसके बजाय, बीसीसीआई अपना हिस्सा उन देशों को सौंप देता है जहां क्रिकेट के विकास की आवश्यकता होती है। बीसीसीआई काफी अमीर है और वे बड़े भाई बनकर खुश हैं। इसलिए, वे अपना हिस्सा नहीं मांगते। कोई भी अन्य देश चाहे वह पाकिस्तान हो, श्रीलंका हो या बांग्लादेश, ऐसा नहीं करता। केवल बीसीसीआई ही अपना हिस्सा छोड़ता है।" आकाश चोपड़ा भले ही पुख्ता दावा कर रहे हो लेकिन बीसीसीआई ने ना ही इस पर आधिकारिक रुप से हामी भरी है और ना ही इसे नकारा है।
एशियाई देशों की शुरुआत से ही मदद कर रहा बीसीसीआई
एशियन क्रिकेट काउंसिल का गठन ही एशियाई महाद्वीप में क्रिकेट का प्रचार करने और इसके स्तर में सुधार के लिए किया गया था और बीसीसीआई ने शुरुआत से ही बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए बाकि देशों की मदद की है। बोर्ड ने अफगानिस्तान की टीम को बनाने में आर्थिक सहायता और ट्रेनिंग की सुविधा दी है साथ ही भारत ने हाल ही में नेपाल की टीम को भी टी20 वर्ल्ड कप क्वालिफायर से पहले सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में ट्रेनिंग करने का मौका दिया है। एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में भी जहां मेजबानी करने वाले देश को टिकट की बिक्री से लेकर ब्रॉडकास्टिंग राइट्स तक में अतिरिक्त कमाई होती है और हर देश इसीलिए इसका आयोजन करना चाहता है लेकिन भारत ने केवल एक बार इसकी मेजबानी की है ताकि श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों को मेजबानी से फायदा हो। भारत 2025 में दूसरी बार मेजबानी कर रहा है और इसमें भी पाकिस्तान के साथ विवाद के चलते वे मैचों को यूएई में शिफ्ट करने को मान गए हैं तााकि टूर्नामेंट हो सके और छोटी टीमों को बड़ी टीमों के साथ खेलकर फायदा हो। बीसीसीआई को यह भी अहसास है कि अगर वह एशिया कप से कमाई में हिस्सा लेने लगे, तो बाकी देशों को क्रिकेट के विकास के बजट में कटौती करनी पड़ सकती है जिससे क्षेत्र में क्रिकेट का विस्तार रुक सकता है। यही कारण है कि बीसीसीआई एशिया कप की आय को अन्य देशों के लिए छोड़ देता है, जिससे अफगानिस्तान और ओमान जैसे बोर्ड अपनी वित्तीय स्थिति सुधार सकें।
बीसीसीआई की सॉफ्ट पॉवर होती है मजबूत
एशिया कप से बीसीसीआई द्वारा कोई कमाई न लेना एक रणनीतिक और दूरदर्शी फैसला है। यह दिखाता है कि भारतीय बोर्ड केवल आर्थिक लाभ पर नहीं, बल्कि क्रिकेट के क्षेत्रीय विकास, सहयोग और नेतृत्व पर भी ध्यान देता है। यही वजह है कि एशिया में भारत का क्रिकेटिंग दबदबा बना हुआ है और बीसीसीआई बाकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा शक्तिशाली संस्था बनी हुई है।यह न केवल क्रिकेट के हित में है, बल्कि बीसीसीआई की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत करता है, जो आने वाले समय में और भी असरदार साबित हो सकती है।
क्या सच में एशिया कप से कमाई नहीं करती है बीसीसीआई?
एशिया कप से होने वाली कमाई का समान तरीके से बंटवारा एशियन क्रिकेट काउंसिल करती है जिसका हिस्सा बीसीसीआई भी है हालांकि आकाश चोपड़ा के दावों और क्रिकेट के गलियारों में चर्चा के मुताबिक बीसीसीआई अपना हिस्सा किसी आर्थिक रुप से कमजोर बोर्ड को दे देती है, लेकिन इसे लेकर ना ही बीसीसीआई ने और ना ही इसका फायदा पाने वाले बोर्ड ने आधिकारिक रुप से कोई चर्चा नहीं की है। हालांकि भारत सरकार नया स्पोर्ट्स बिल लेकर आ रही है। जिसके तहत बीसीसीआई भी अब आरटीआई के तहत आने वाला है और इसके लागू होने के बाद इस दावे का सच पता चल सकता है।
