CWG 2022: मुरली श्रीशंकर ने रचा इतिहास, बने लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 5, 2022, 03:45 AM IST

Murli Shreeshankar Won Gold in Mens Long Jump: भारत के 23 वर्षीय एथलीट मुरली श्रीशंकर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लॉन्ग जंप सपर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। 

CWG 2022: मुरली श्रीशंकर ने रचा इतिहास, बने लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय
Photo Credit: AP

बर्मिंघम: भारतीय एथलीट मुरली श्रीशंकर (Murli Shreeshankar)  ने गुरुवार को 22वें राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की लंबी कूद(Long Jump) स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। मुरली इसके साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लंबी कूद में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बन गए हैं। उन्होंने 8.08 मीटर लंबी छलांग लगाई और रजत पदक अपने नाम किया। यह भारत की झोली में आया दिन का पहला और कुल 19वां पदक था। 

पांचवें स्थान पर रहे मोहम्मद अनस 
लंबी कूद में भाग ले रहे भारत के एक अन्य एथलीट मोहम्मद अनस याहिया पांचवें स्थान पर रहे। वो 7.97 मीटर लंबी छलांग लगा सके। उनके ऊपर के सभी चार एथलीट ने 8 मीटर के आंकड़े को पार किया। स्पर्धा का स्वर्ण पदक बहमास के लेकुआन नेयर्न के नाम रहा। उन्होंने भी 8.08 मीटर लंबी छलांग लगाई। उन्होंने इस आंकड़े को अपनी दूसरी छलांग में ही छू लिया था।

क्वालीफाइंग राउंड में लगाई थी 8.05 मीटर लंबी छलांग 
मुरली श्रीशंकर क्वालीफाइंग राउंड में 8.05 मीटर लंबी छलांग लगाकर पहले पायदान पर रहे थे। स्वर्ण पदक जीतने वाले लेकुआन नेयर्न दूसरे और कांस्य पदक जीतने वाले दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी 8.06 मीटर लंबी छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर रहे।     

पांचवें प्रयास में पार किया आठ मीटर का आंकड़ा
मुरली श्रीशंकर ने फाइनल में शुरुआत 7.60 मीटर के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे और तीसरे प्रयास में 7.84 मीटर लंबी छलांग लगाई और इसके बाद चौथे प्रयास में फाउल कर बैठे। ऐसे में भारत की पदक की उम्मीदों को झटका लगता दिख रहा था। लेकिन अपने पांचवें प्रयास में उन्होंने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर पोडियम फिनिश के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी। 

आखिरी प्रयास को मामूली अंतर से दिया फाउल करार
आखिरी प्रयास में स्वर्ण के लिए श्रीशंकर ने शानदार छलांग लगाई लेकिन उसे बेहद मामूली अंतर के लिए फाउल करार दिया गया और भारत की झोली में गोल्ड मेडल आते-आते रह गया। 

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