एक फौजी के शौर्य को समर्पित है मणिपुर में होने वाला ये फुटबॉल टूर्नामेंट, जानिए इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें

मणिपुर के फिरजौल जिले के एक छोटे से गांव पारबुंग में एक सैन्य अधिकारी के की शहादत को याद करने के लिए हमार जनजाति के लोगों ने एक फुटबॉल टूर्नामेंट की शुरुआत की गई थी। 13 जनवरी को इसके 15वें संस्करण का आगाज हुआ।

Lt Col Rajiv Bakshi Memorial Football Tournament
राजीव बख्शी मेमेरियल फुटबॉल टूर्नामेंट  

मुख्य बातें

  • लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव बख्शी मेमोरियल फुटबॉल टूर्नामेंट के 15वें संस्करण का हुआ आगाज
  • साल 2007 में स्थानीय लोगों के लिए शहीद होने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव बख्शी की याद में स्थानीय लोगों ने सेना के सहयोग से की थी शुरुआत
  • असम रायफल्स की ऐना बटालियन के कंधों पर होती है टूर्नामेंट के आयोजन की जिम्मेदारी

नई दिल्ली: आम तौर पर जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में भारतीय सेना की उपस्थिति और उनके काम करने के तरीकों पर सालों सवाल खड़े किए गए। भारतीय सेना के मानवीय रूप को देशवासियों के सामने पेश करने की कोशिश बेहद कमजोर तरीके से की गई। इसी वजह से पूर्वोत्तर भारत में भारतीय सेना को शांति स्थापित करने और लोगों का विश्वास जीतने में सालों लग गए।

आज पूर्वोत्तर भारत में शांति के सुर गूंज रहे हैं तो इसमें सेना की अहम भूमिका है। सेना ने वहां शांति स्थापित करने और लोगों का विश्वास जीतने के लिए कई तरह की सफल कोशिशें की। जिसके लिए भारतीय सैनिकों को शहादत भी देनी पड़ी। स्थानीय लोगों और सेना के बीच संबंधों को और मजबूत करने की ऐसी ही एक कवायद 15 साल पहले असम रायफल्स ने मणिपुर के पारबुंग गांव में शुरू हुई थी। जिसे आज वहां रहने वाले हमार जनजाति के लोगों और सेना के बीच बढ़ते विश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। 

कहां है पारबुंग 
पारबुंग मणिपुर के फिरजौल जिले का एक बहुत छोटा गांव है। इस गांव में मुख्य रूप से हमार जनजाति के लोग रहते हैं। हाल ही में इस गांव में बिजली पहुंची है। यहां आज भी मूलभूत सुविधाओं और यातायात के साधनों का आभाव है। एक  दशक पहले तक इस इलाके में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बहुत सी समस्याएं थीं और उग्रवादी संगठनों का बोलबाला था। 

16 जनवरी, 2006 की काली रात
16 जनवरी, 2006 की रात उग्रवादियों ने बड़े पैमाने पर यूएनएलएफ और केसीपी के उग्रावादियों ने पारबुंग से 11 किमी दूर लुंगथुलेन गांव में लोगों को यातनाएं दीं और महिलाओं के साथ बलात्कार किया। ऐसे में लोगों ने डर की वजह से गांव खाली कर दिए और जंगल में जाकर छिप गए। इसके बाद उग्रवादियों से बचने के लिए लोगों ने सेना की मदद ली। 18 जनवरी, 2006 को लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव बक्शी के नेतृत्व में 13वीं डोगरा रेजिमेंट ने मोर्चा संभाला और लोगों की मदद के लिए बराक नदी के क्षेत्र से होते हुए लुंगथुलेन गांव तक पहुंचे।

मुठभेड़ में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल बख्शी
जहां उन्होंने पारबुंग गांव में छिपे उग्रवादियों को खत्म करने की योजना बनाई। 20 जनवरी को लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव बख्शी के नेतृत्व वाली टीम ने पारबुंग गांव में प्रवेश किया। इसके बाद सेना और उग्रवादियों के हुई मुठभेड़ में जमकर गोलियां चलीं। इस दौरान एक उग्रवादी की मौत हुई और दो गंभीर रूप से घायल हुए। लेकिन सेना को भी नुकसान हुआ और लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव बख्शी शहीद हो गए। बाद में इस ऑपरेशन को कमांडिंग ऑफीसर कर्नल बीपीएस लांबा ने पूरा किया। इसके बाद मरणोपरांत लेफ्टिनेंट राजीव बख्शी को उनके अदम्य साहस और शौर्य के लिए ‘सेना पदक’ से सम्मानित किया गया। 

आज भी नहीं भूले हैं जनरल बख्शी की शहादत 
पारबुंग और आस-पास के इलाके के गांव के लोग आज उनके समुदाय के लोगों की रक्षा करते हुए बगैर अपनी जान न्यौछावर होने वाले लेफ्टिनेंट राजीव बख्शी की शहादत का सम्मान करते हैं। जिस जगह राजीव बख्शी शहीद हुए थे गांव के लोगों ने ठीक उसी जगह उनके सम्मान में ‘बख्शी हट’ का निर्माण किया और इसके बाद असम राइफल्स के साथ मिलकर उनकी याद में हर साल स्थानीय स्तर पर फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित कराने का फैसला किया।

खिताब में मिलती है ट्रॉफी और 30 हजार रुपये 
हर साल जनवरी में आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट में आसपास के इलाके के गांवों की टीमें भाग लेती हैं। सभी टीमें खिताब जीतने के लिए टीमें साल भर तैयारी करती हैं। चैंपियन बनने वाली टीम को 30 हजार रुपये नकद धनराशि के अलावा एक चमचमाती ट्रॉफी पुरस्कार में दी जाती है। स्थानीय लोगों का का इस टूर्नामेंट के साथ भावनात्मक लगाव है। 

इस बार हो रहा है 15वें संस्करण का आयोजन, 2006 में हुई थी शुरुआत
लेफ्टिनेंट राजीव बख्शी मेमोरियल फुटबॉल टूर्नामेंट के 15वें संस्करण का आगाज आज(13 जनवरी) हो रहा है। इसका खिताबी मुकाबला 20 जनवरी को खेला जाएगा। इस  टूर्नामेंट की तैयारी असम राइफल्स की ऐना बटालियन के कंधों पर होती है। इस बार टूर्नामेंट के बारे में पूरे देश को जोड़ने की कोशिश की गई गई है कि लोगों की रक्षा की जान न्यौछावर करने के लिए स्थानीय समुदाय लगाव और समर्पण के साथ 15 साल से टूर्नामेंट का आयोजन कर रहा है। 



स्थानीय संस्कृति की झलक आती है नजर
इस टूर्नामेंट के दौरान मणिपुर की स्थानीय संस्कृति की झलक नजर आती है। महिला और पुरुष स्थानीय पारंपरिक पोषाक पहने नजर आते हैं। उद्धाटन और समापन समारोह के दौरान स्थानीय नृत्य और अन्य पारंपरिक रीतिरिवाज और संगीत की झलक नजर आती है।

पिछली बार पारबुंग एफसी  ने जीता था खिताब
टूर्नामेंट के मैच पुलबंग के स्थानीय मैदान पर 13-20 जनवरी के बीच खेले जाएंगे। इस बार टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें भाग ले रही हैं। गत विजेता पारबुंग एफसी को इस बार अपने घरेलू मैदान में खेलने का फायदा मिलेगा। टूर्नामेंट से जुड़ा एक प्रोमो वीडियो लॉन्च किया गया है जिसमें  के स्थानीय खिलाड़ी, कलाकार और रणविजय सिंह जाने माने फिल्मी सितारे नजर आए हैं।
 

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