भाजपा में शामिल हुईं एथलीट पिंकी प्रमाणिक, संघर्षपूर्ण जीवन और सफलताओं की कहानी

Pinki Pramanik joins BJP: भारतीय एथलीट पिंकी प्रमाणिक ने राजनीति में कदम रखा है। वो अब भाजपा की सदस्य बन चुकी हैं। उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा है।

Pinki Pramanik joins BJP
पिंकी प्रमाणिक भाजपा में शामिल हुईं  |  तस्वीर साभार: Twitter

कोलकाता, 10 सितंबर: एशियाई खेलों (Asian Games) की स्वर्ण पदक विजेता पिंकी प्रमाणिक (Pinki Pramanik) भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने यह जानकारी दी। घोष ने कहा, ‘‘पिंकी आज से भाजपा परिवार का हिस्सा हैं।’’ पिंकी 2006 में एशियाई खेलों में स्वर्ण और राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाली चार गुणा 400 मीटर रिले टीम की सदस्य थीं।

वो 2012 में लैंगिक विवादों के घेरे में आ गई थी जब उनकी एक महिला दोस्त ने उन पर बलात्कार का आरोप लगाया। उसे खुद को लड़की साबित करने के लिये जांच से गुजरना पड़ा। उन्हें 2014 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बेकसूर बताया जिसके बाद से वह पूर्वी रेलवे में काम कर रही हैं।

17 की उम्र में पहली सफलता

पिंकी प्रमाणिक का जन्म 10 अप्रैल 1986 को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में हुआ था। वो एक ट्रैक एंड फील्ड एथलीट हैं जो मुख्य रूप से 400 मीटर और 800 मीटर रेस में हिस्सा लेती हैं। जब वो 17 साल की थीं तब उनको पहली सफलता मिली थी जब पिंकी ने एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

इसके बाद पिंकी को IAAF विश्व कप के दौरान एशिया का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ था। अगर बात करें घरेलू प्रतियोगिताओं की, तो पिंकी ने ऑल इंडिया ओपन नेश्नल चैंपियनशिप में तीन बार जीत हासिल की थी।

कार दुर्घटना और चोटें

साल 2007 का सीजन वो नहीं खेल सकी थीं क्योंकि उन्हें पैर में गंभीर चोट आई थी। इसके बाद वो ट्रैक पर लौटीं, 100 मीटर में रिकॉर्ड दौड़ भी लगाई और वो 2008 ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए खुद को तैयार करने में जुटी थीं। लेकिन उसी दौरान उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई और वो फिर ट्रैक से बाहर हो गईं।

साल 2010 में पिंकी प्रमाणिक पुरुलिया में एक एथलेटिक्स चैंपियनशिप को उद्घाटन करके घर लौट रही थीं। तभी उनकी कार दुर्घटना का शिकार हो गई। उन्हें चेहरे और घुटने में गंभीर चोटें आईं। उनकी हालत गंभीर नहीं थी लेकिन उन्हें पीठ में दर्द रह रहा था इसलिए काफी समय अस्पताल में बिताना पड़ा।

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