CWG 2022: बॉक्सिंग रिंग में भारतीय मुक्केबाजों ने मचाया धमाल, 3 गोल्ड सहित सात पदक जीतकर रहा दूसरे पायदान पर 

भारतीय मुक्केबाजों ने रविवार को बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के दसवें दिन घमाल मचाते हुए तीन स्वर्ण और एक रजत पदक सहित कुल चार पदक अपने नाम किए। बॉक्सिंग में भारत ने कुल 7 पदक जीते।

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निकहत जरीन, अमित पंघाल और नीतू घंघास   |  तस्वीर साभार: ANI
मुख्य बातें
  • 22वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने मुक्केबाजी में जीते कुल 7 पदक
  • 3 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक के साथ भारत बॉक्सिंग में रहा दूसरे पायदान पर
  • निकहत जरीन, अमित पंघाल और नीतू घंघास ने गोल्ड पर जड़ा पंच

बर्मिंघम: मौजूदा विश्व चैम्पियन निकहत जरीन सहित भारतीय स्टार मुक्केबाज अमित पंघाल और नीतू गंघास ने रविवार को राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किये जबकि सागर अहलावत ने रजत पदक अपने नाम किया। भारत ने 22वें राष्ट्रमंडल खेलों में बॉक्सिंग में अपने अभियान का अंत 7 मेडल के साथ किया। बॉक्सिंग की स्पर्धाओं में भारत ने 3 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक जीते और दूसरे पायदान पर रहा।

निकहत और अमित ने जड़ा गोल्डन पंच
रविवार को शानदार फॉर्म में चल रही विश्व चैंपियन निकहत जरीन ने लाइट फ्लाईवेट (48-50 किग्रा) स्पर्धा में उत्तरी आयरलैंड की कार्ले मैकनॉल पर एकतरफा फाइनल में 5-0 से जीत दर्ज की। वहीं अमित पंघाल ने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में मिली हार का बदला चुकता करते हुए पुरुष फ्लाईवेट वर्ग में जबकि नीतू गंघास ने पदार्पण में ही दबदबा बनाते हुए स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले। पंघाल (48-51 किग्रा) को चार साल पहले गोल्ड कोस्ट में इंग्लैंड के ही एक प्रतिद्वंद्वी से इसी चरण में हार मिली थी लेकिन इस बार 26 साल के मुक्केबाज ने अपनी आक्रामकता के बूते घरेलू प्रबल दावेदार मैकडोनल्ड कियारान को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

विरोधी मुक्केबाज को पंघाल ने किया घायल
पंघाल काफी तेजी से मुक्के जड़ रहे थे जिससे इस दौरान मैकडोनल्ड के आंख के ऊपर एक कट भी लग गया जिसके लिये उन्हें टांके लगवाने पड़े और खेल रोकना पड़ा। अपनी लंबाई का इस्तेमाल करते हुए मैकडोनल्ड ने तीसरे राउंड में वापसी की कोशिश की लेकिन एशियाई खेलों के चैम्पियन ने उनके सभी प्रयास नाकाम कर दिये। पंघाल ने सेमीफाइनल में जाम्बिया के टोक्यो ओलंपियन पैट्रिक चिनयेम्बा के खिलाफ वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी जो उनके लिये ‘टर्निंग प्वाइंट’ रही।

ऐसे दी ब्रिटिश मुक्केबाज को मात
उन्होंने कहा, 'यह सबसे कठिन मुकाबला रहा और ‘टर्निंग प्वाइंट’ भी। मैंने पहला राउंड गंवा दिया था लेकिन अपना सबकुछ लगाकर वापसी कर जीत हासिल की।' ब्रिटिश प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ रणनीति के बारे में उन्होंने कहा, 'वह मुझसे काफी लंबा था और मुझे काफी आक्रामक होना पड़ा ताकि मुक्का मारने के लिये उसके हाथों के अंदर जा सकूं। यह रणनीति कारगर रही। मेरे कोच ने बढ़िया काम किया क्योंकि हमने रणनीति बनायी और मैंने वैसा ही रिंग में किया।'

विश्व चैम्पियनशिप के रजत पदक विजेता पंघाल ने कहा, 'मैंने पहले दो राउंड जीतने के लिये अच्छा किया। मुझे लगा कि वह अंतिम राउंड जीत गया लेकिन मैं तब तक उससे काफी आगे जा चुका था। पर वह काफी अच्छा प्रतिद्वंद्वी था।' उन्होंने कहा, 'इससे मेरा ऑस्ट्रेलिया (गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेल) में फाइनल में हारने का बदला चुकता हो गया। मैं जानता था कि यह काफी चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि मैं इंग्लैंड में उसके ही मुक्केबाज से लड़ रहा था। लेकिन जज निष्पक्ष और सटीक रहे।'

नीतू ने खोला बॉक्सिंग में गोल्ड का खाता
वहीं सबसे पहले रिंग में उतरी नीतू ने महिलाओं के मिनिममवेट (45-48 किग्रा) वर्ग के फाइनल में विश्व चैम्पियनशिप 2019 की कांस्य पदक विजेता रेस्जटान डेमी जेड को सर्वसम्मत फैसले में 5-0 से पराजित किया। राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण में ही नीतू ने गजब का आत्मविश्वास दिखाया और फाइनल में भी वह इसी अंदाज में खेली जैसे पिछले मुकाबलों में खेली थीं।

नीतू को मिला लंबाई का फायदा
मेजबान देश की प्रबल दावेदार के खिलाफ मुकाबले का माहौल 21 साल की भारतीय मुक्केबाज को भयभीत कर सकता था लेकिन वह इससे परेशान नहीं हुईं। नीतू अपनी प्रतिद्वंद्वी से थोड़ी लंबी थीं जिसका उन्हें फायदा मिला, उन्होंने विपक्षी के मुक्कों से बचने के लिये पैरों का अच्छा इस्तेमाल किया। उन्होंने पूरे नौ मिनट तक मुकाबले के तीनों राउंड में नियंत्रण बनाये रखा और विपक्षी मुक्केबाज के मुंह पर दमदार मुक्के जड़ना जारी रखते हुए उसे कहीं भी कोई मौका नहीं दिया।

पिता को नीतू ने समर्पित किया पदक
नीतू ने तेज तर्रार, ‘लंबी रेंज’ के सटीक मुक्कों से प्रतिद्वंद्वी को चारों खाने चित्त कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं। मुझे सांस भी नहीं आ रहा।' उनके पिता हरियाणा विधानसभा में कर्मचारी हैं। भारत के मुक्केबाजी में ‘मिनी क्यूबा’ कहलाये जाने वाले भिवानी की नीतू ने कहा, ‘‘मेरे माता-पिता मेरी प्रेरणा रहे हैं और मेरा स्वर्ण पदक उनके लिये ही है।'

जीत के साथ शुरुआत के बाद सागर ने गंवाया गोल्ड
बॉक्सिंग स्पर्धाओं के आखिरी मुकाबले में सागर अहलावत को सुपर हैवीवेट वर्ग में इंग्लैंड के डिलीसियस ओरी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। पहले राउंड में 5-0 के अंतर से जीत के साथ शुरुआत करने के बाद सागर अपनी लय खो बैठे और थकान उनके ऊपर हावी हो गई। अंतिम दो राउंड में उन्हें 0-5 के अंतर से हार मिली और इसके साथ हो गोल्ड जीतने का उनका सपना टूट गया। अच्छी शुरुआत के बाद 1-2 के अंतर से गोल्ड मेडल गंवा दिया। सागर फाइनल में पहुंचकर गोल्ड मेडल नहीं जीत पाने वाले अकेले भारतीय रहे।
 
भारत के लिए बॉक्सिंग में गोल्ड निकहत जरीन, अमित पंघाल और नीतू घंघास ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं सागर ने भारत को रजत दिलाया। रोहित टोकस, हुसैम उद्दीन मोहम्मद और जैमसिन ने अपने नाम कांस्य पदक किए। 
 

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