Achinta Sheuli: 12 साल की उम्र में किया सिलाई-कढ़ाई का काम, अब गोल्ड जीतकर बढ़ाया देश का मान 

Who is Achinta Sheuli: जानिए कौन हैं अचिंत शिउली? जिन्होंने भारत के लिए 22वें राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग में पुरुषों के 73 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता। ऐसा रहा है उनका जीवन संघर्ष।

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गोल्ड मेडल जीतने के बाद अचिंत शिउली  |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • 20 साल के अचिंत शिउली ने दो गेम रिकॉर्ड्स के साथ 22वें राष्ट्रमंडल खेलों में जीता स्वर्ण पदक
  • 12 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद जीवनयापन के लिए करना पड़ा सिलाई-कढ़ाई का काम
  • भाई की वजह से हुई वेटलिफ्टिंग की शुरुआत, कटी पतंग ने दिखाया था पहली बार जिम का रास्ता

बर्मिंघम: पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के रहने वाले 20 वर्षीय भारतीय वेटलिफ्टर अचिंत शिउली ने रविवार को बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 73 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक दो नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ अपने नाम कर लिया। पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत कर रहे शिउली ने पूरे मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने स्नेच राउंड में सबसे ज्यादा 143 किग्रा भार उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड कायम किया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में 170 किग्रा भार उठाकर कुल 313 किलो वजन के साथ भी राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड बना डाला।

आठवीं में पढ़ते थे तब हुआ पिता का निधन 
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के दुएलपुर में 24 नवंबर 2001 को अचिंत शिउली का जन्म हुआ था। उनका बचपन बेहद संघर्ष में गुजरा। पिता साइकिल रिक्शा चलते थे, जब वो आठवीं में पढ़ते थे उसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया। उसी समय उनके पॉल्ट्रीफॉर्म पर जंगली लोमड़ी ने हमला कर दिया। ऐसें में परिवार का खर्च चलाने के लिए सबको काम करना पड़ा। ऐसे में महज 12 साल की उम्र में अचिंत को साड़ियों में जरी और कढ़ाई का काम करना पड़ा। वो धीरे-धीरे एक कुशल टेलर बन गए। 

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पिता के निधन के बाद करना पड़ा सिलाई-कढ़ाई का काम
12 साल की उम्र में ही वो पहली बार एक स्थानीय जिम में गए। अचिंत के बड़े भाई वेटलिफ्टर थे। उनसे ही यह खेल उन्हें विरासत में मिला। जब तक अचिंत के पिता जीवित रहे उनका बड़ा भाई वेटलिफ्टिंग करता था। पिता के निधन के बाद उनके भाई को वेटलिफ्टिंग छोड़नी पड़ी और परिवार के जीवनयापन के लिए सिलाई-कढ़ाई का काम सीखना पड़ा। वेटलिफ्टिंग और सिलाई-कढ़ाई दोनों के गुर उसने अपने बड़े भाई से सीखे।  

पिता की मौत के बाद बेहद कठिन थी दिनचर्या 
उस दौरान जब अचिंत ने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की तब उनकी दिनचर्या बेहद कठिन थी। सुबह पांच बजे उठकर वो दौड़ने जाते। इसके बाद घर लौटकर सिलाई का काम करते। उसके बाद जिम जाते और फिर स्कूल जाते। स्कूल से लौटने के बाद वो वेटलिफ्टिंग का अभ्यास करते। घर लौटकर फिर से सिलाई-कढ़ाई का काम करना पड़ता। इसके बाद रात खाना खाकर वो 10 बजे सोने चले जाते और फिर सूरज उगने से पहले बिस्तर छोड़ देते। 

कटी पतंग ने दिखाया जिम का रास्ता 
अचिंत दुर्घटना वश भारोत्तोलन के खेल में आ गए। एक दिन वो पतंग उड़ा रहे थे। तभी एक पतंग कटकर स्थानीय जिम में जा गिरी। जिम के अंदर लोगों को व्यायाम और ट्रेनिंग करता देख वो अचरज में पड़ गए और उनकी आंखें खुली रह गईं। उसके बाद उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ जिम जाना शुरू कर दिया। 

शानदार रहा है करियर 
अचिंत का अबतक का करियर बेहद शानदार रहा है। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों से पहले वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ चुके थे। साल 2019 में उन्होंने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। यह सीनियर वर्ग में उनका पहला पदक था। साल 2021 में वो जूनियर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ताशकंद में आयोजित राष्ट्रमंडल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। 
 

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