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आंख से काजल निकालकर ही क्यों लगाया जाता है नजर का काला टीका? जानिए इसका ज्योतिषीय और साइंटिफिक कारण

Kajal Se Kala Tika Kyon Lagate Hain: आपने अक्सर अपने बड़ों को कहते सुना होगा कि काला टीका लगा लो, नजर नहीं लगेगी। वहीं, कभी-कभी घर की महिलाएं अपनी आंख से काजल निकालकर काला टीका लगा देती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नजर का काला टीका आंख के काजल से निकालकर क्यों लगाया जाता है? अगर आपको लगता है कि सिर्फ रैंडम काजल मिल जाने के कारण ऐसा किया जाता है तो आप गलत हैं। जी हां, आंख से काजल निकालकर लगाने के पीछे साइंस और ज्योतिषीय दोनों ही कारण हैं। आइए जानते हैं कि क्यों आंख से निकालकर नजर का काला टीका लगाया जाता है?

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क्या सच में नजर लगती है

Kajal Se Kala Tika Kyon Lagate Hain : क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है, जब किसी फंक्शन या ऑफिस में आपके लुक या किसी चीज की ज्यादा तारीफ की जाती है, तो आपकी सिर में भारीपन सा फील होता है या फिर तबियत खराब लगने लगती है। ऐसे में आखों में जलन, शरीर गर्म लगना आदि लक्षण भी दिखते हैं। अगर हां तो यह कुछ और नहीं बल्कि आपकी बॉडी पर पड़ने वाली नेगेटिव दृष्टि का ही असर होता है।

पहले के जमाने से लेकर आज के आधुनिक युग में भी लोग नजरदोष को मानते हैं। पहले लोग काला टीका लगाते थे या काला धागा बांधते थे। वहीं, आज के समय में लोग एविल आई का प्रयोग करते हैं। हालांकि नजर वही है, लेकिन उससे बचने के तरीके सिर्फ मार्डन हो गए हैं। इन सभी मार्डन तरीकों के अलावा हमारा एक ट्रेडिसनल तरीका भी है, जिसको फिल्मों और धारावाहिकों में भी दिखाया जाता है और वो है आंख से काजल निकालकर नजर का टीका लगाना।

आपके कई बार देखा होगा कि लोग आंख से काजल निकालकर काला टीका लगा देते हैं। आपको लगता होगा कि रैंडम काजल आंख में अबलेवल होता है, इस कारण वहीं से लेकर नजर का काला टीका लगा दिया जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण छिपा हुआ है। आइए जानते हैं कि वह कारण क्या है और नजर लगती ही क्यों है?

क्यों लगती है नजर?

हमारा शरीर पंचतत्वों अग्नि, आकाश, पृथ्वी, वायु और जल से मिलकर बना है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की माने तो हमारी बॉडी में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड होती है। जिसे कई लोग औरा भी बोल देते हैं। जब हमारे इसी औरे में किसी दूसरे का नेगेटिव औरा जुड़ता है तो हमें असहज महसूस होता है। वहीं, अगर हमारा औरा डिस्टर्ब होता है तो शारीरिक समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में सिरदर्द, बुखार आदि कई प्रकार की समस्याएं भी शरीर में देखने को मिल जाती हैं।

अक्सर छोटे बच्चों का औरा कमजोर होता है। इस कारण उनको ज्यादा नजर लगती है। वहीं, कुछ गर्ल्स में भी यही समस्या होती है। इस कारण वे भी नजर की चपेट में जल्दी आ जाती हैं। दूसरा एक कारण ये भी है, कर्क लग्न की कुंडली और चंद्र राशि कर्क वाले लोग चंद्रमा से रूल होते हैं और इस कारण वे नजर दोष का शिकार जल्दी बन जाते हैं। ऐसे में हम घर से ही काला टीका, एविल आई या फिर काला धागा बांधकर निकलते हैं, जिससे नजर दोष से बचा जा सके। वहीं, बात करें काले टीके की तो अगर इसे आंख के काजल से लगाया जाए तो इसका प्रभाव दोगुना हो जाता है। इसके पीछे भी एक अहम कारण है।

क्यों आंख के ही काजल से लगाते हैं नजर का काला टीका?

हमारी नजर और बालों को शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि ही नजर दोष से हमें प्रोटेक्ट करते हैं। जब हम आंख से काजल निकालकर नजर का टीका लगाते हैं तो हम शनि को एक्टिवेट कर लेते हैं, जिससे नजरदोष से बचाव हो जाता है। सेम यही काम काले धागे के साथ भी होता है, वह भी नजर से बचाव इसी कारण करता है, क्योंकि वह खुद में नेगेटिव एनर्जी को एर्ब्जाब कर लेता है। नजर हमें तब लगती है, जब सामने वाला हमारी आंख पर नजर डालता है, लेकिन अगर काला टीका लगा होता है, तो उसकी नजर काले टीके पर पहले जाती है, इससे नकारात्मकता कम हो जाती है और हम नजर से बच जाते हैं।

पार्टी या फंक्शन में जाने से पहले करें ये उपाय

जब भी किसी पार्टी या फंक्शन में जाएं तो उसके पहले किसी या अपनी आंख के काजल से अपने कान के पीछे हेयर लाइन पर एक काला टीका लगा लें। फंक्शन से लौटने के बाद उस काले टीके को साफ कर लें। अगर बहुत तारीफ की गई हैं तो काले टीके को नमक के पानी में कपड़े को भिगोकर टीके को साफ करें। यहां इस बात का ध्यान रखें कि काले टीके को बिना साफ किएं आपको सोना नहीं हैं। हालांकि बच्चों को काला टीका ऐसा लगाएं कि उनके फेस पर दिखाई दे।

एविल आई और काले धागे के साथ करें ये काम

अगर आप एविल आई पहनते हैं तो उसे पानी से साफ करना आवश्यक है। वहीं, काला धागा भी समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। ऐसा करने से नजरदोष का प्रभाव नहीं पड़ता है और आप खुद को सुरक्षित रख पाते हैं।

क्या कहता है साइंस?

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि काला रंग त्वचा पर लगाने या पहनने से उष्मा का संतुलन बनता है, जो स्वास्थ्य लाभ दे सकता है, जैसे चिंता कम करना और नींद में सुधार आदि लाभ मिल सकते हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से, यह प्लेसिबो प्रभाव की तरह काम करता है, जहां व्यक्ति को सुरक्षा का अनुभव होता है, जिससे तनाव और डर कम होता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों और मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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