Vijayadashami: इसलिए शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन मनाई जाती है विजयदशमी, यह ये पूरी कथा 

व्रत-त्‍यौहार
Updated Oct 06, 2019 | 08:30 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

नवरात्र (Navratr) के दसवें दिन विजयादशमी (Vijyadashmi) मनाया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा(Dussehra) क्यों मनाते हैं?

Vijayadashami
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मुख्य बातें

  • शारदीय नवरात्र के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है
  • भगवान श्रीराम ने शुरू किया था शारदीय नवरात्र
  • मां चंडी ने दिया था लंका विजय का श्रीराम को आशीर्वाद

नवरात्र साल में दो बार होती है। एक चैत्र माह में और दूसरी अश्वनी माह में। चैत्र वाली को चैत्र नवरात्र और अश्वनी वाली को शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है। चैत्र नवरात्र के नौवें दिन रामनवमी होती है यानी भगवान श्रीराम का जन्म, लेकिन शारदीय नवरात्र के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। इसके पीछे एक बड़ी वजह भगवान श्रीराम ही हैं। क्या आप ये जानते हैं कि नवरात्र की शुरुआत कब हुई और किसने की थी। नवरात्र की शुरुआत हुई क्यो? तो आइए आपके इन सारे सवालों का जवाब दें।

भगवान श्रीराम ने की थी नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा
शारदीय नवरात्र की शुरुआत भगवान राम ने की थी।भगवान राम ने समुद्र के किनारे अश्वनी माह में मां दुर्गा के नवरूपों की पूजा प्रारंभ की थी। इसमें चंडी पूजा सबसे खास थी। श्रीराम ने लगातार 9 दिनों तक शक्ति की पूजा की थी। ऐसा करने के पीछे उनका लंका पर विजय प्राप्त का माता से आशीर्वाद पाना था। नौंवे दिन जब मां ने उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया तब वह दसवें दिन लंका पहुंच कर रावण का वध किए थे और तब से नवरात्रि पूजन के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाने लगा। असत्य पर सत्य की जीत का जश्न।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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ब्रह्माजी ने दिया था चंडी पूजा की सलाह
लंका युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए ब्रह्माजी ने श्रीराम को चंडी देवी की पूजा की सलाह दी थी। उन्होंने भगवान श्रीराम से कहा था कि चंडी देवी के पूजन में वह दुर्लभ एक सौ आठ नीलकमल का प्रयोग जरूर करें। वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरत्व प्राप्ति के लिए चंडी मां की पूजा के लिए यज्ञ और पाठ का आयोजन किया। रावण को जब पता चला कि भगवान श्रीराम भी चंडी यज्ञ कर रहे तो उसने अपनी माया से भगवान श्रीराम के पूजा में शामिल होने वाले नीलकमल में से एक निकमल गायब कर दिया। यह बात जब भगवान श्रीराम को यत्र के समय पता चली तो भगवान को याद आया कि उन्हें भी लोग 'कमलनयन नवकंच लोचन' कहते हैं और ऐसा स्मरण कर उन्होंने अपने नयन को निकालने के लिए तलवार निकाल ली, तभी माता चंडी वहां प्रकट हुईं और कहा कि वह उनकी भक्ति से बेहद प्रसन्न हैं और उन्हें लंका विजय का आशीर्वाद दे दिया।

हनुमान जी ने रावण का यज्ञ किया विफल
“सहस्र चंडी पाठ के प्रथम मंत्र ‘हरिणी’ शब्द के बजाय ‘कारिणी’ कहने से मंत्र का उद्देश्य बदल गया था। और ह की जगह क का उच्चारण ब्राह्मणों ने हनुमान जी के कहने पर ही किया था। इससे मां चंडी का यज्ञ सफल नही हो पाया।

इसलिए नवरात्र पूजा के बाद दशमी के दिन भगवान श्रीराम के रावणवध की खुशी में दशहरा मनाया जाता है।

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