Kalash Sthapana Muhurat 2019: जानिए शारदीय नवरात्री में कलश स्‍थापना करने का शुभ मुहूर्त और विधि

व्रत-त्‍यौहार
Updated Sep 28, 2019 | 11:32 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Kalash Sthapana Shubh Muhurat: 29 सितंबर से शारदीय नवरात्र प्रारम्भ हो रहे हैं। इस दिन मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्त कलश की स्थापना करते हैं। यहां जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त। 

Navratri Kalash Sthapana Shubh Muhurat
Navratri Kalash Sthapana Shubh Muhurat 

मुख्य बातें

  • नवरात्रि में आमतौर पर सभी घरों में लोग कलश स्थापित करके मां दुर्गा की अराधना करते हैं
  • इस दिन प्रातः स्नान करके पूरे नवरात्रि में पूजा का संकल्प लेते हैं
  • इस बार देवी मां हाथी पर सवार होकर आ रही हैं

Kalash Sthapana 2019: शारदीय नवरात्र की शुरुआत 29 सितंबर 2019 यानि कल से हो रही है। इस दिन मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्त व्रत रखने के साथ साथ कलश की स्थापना भी करते हैं। नवरात्रि के दिनों में माता रानी की पूजा करने से हर कार्य में सफलता मिलेगी। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए दुर्गासप्तशती के विभिन्न मंत्रों का जाप करते हुए हवन किया जाता है। 

नवरात्रि में आमतौर पर सभी घरों में लोग कलश स्थापित करके मां दुर्गा की अराधना करते हैं। माना जाता है कि अगर कलश की स्थापना सही तरीके से की जाए तभी यह फलदायी होता है। पूजन तथा कलश स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में करते हैं। ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार 29 सितंबर को नवरात्र प्रारम्भ होगा तथा इस प्रतिपदा को हस्त नक्षत्र और ब्रम्ह योग है।

कलह स्थापना का शुभ मुहूर्त-
इस दिन कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक है

कलश स्थापना के लिए सामग्री
मिट्टी का कटोरा, जौ, साफ मिट्टी, कलश, रक्षा सूत्र, लौंग इलाइची, रोली और कपूर। आम के पत्ते, पान के पत्ते, साबुत सुपारी, अक्षत, नारियल, फूल, फल।

कलश स्थापना की विधि (Kalash Sthapana Vidhi) 

  • इस दिन प्रातः स्नान करके पूरे नवरात्रि में पूजा का संकल्प लेते हैं।
  • मिट्टी की वेदी बनाकर जौ बोते हैं। इसी पवित्र वेदी पर कलश की स्थापना की जाती है।
  • घट के ऊपर माता की प्रतिमा स्थापित करते हैं। 
  • माता की मूर्ति घट के पास ही रखते हैं। यदि बड़ी मूर्ति है तो तख्त या किसी लकड़ी के बड़े तख्त पर माता को स्थापित कर पूजन आरम्भ करते हैं।
  • अब पूरे नवरात्र दुर्गासप्तशती का पाठ होगा। 
  • अखंड दीप कलश स्थापना के साथ ही रख दिया जाएगा तथा पूरे नवरात्रि यह जलता रहेगा।
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